भारतकोश
योगिनी हृदयम् (अमृतानन्दनाथ विमर्शिनी एवं पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी सविस्तार सटीक)

योगिनी हृदयम् (अमृतानन्दनाथ विमर्शिनी एवं पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी सविस्तार सटीक)

Yogini Hridayam with Amritanandanatha Dipika by Vraj Vallabha Dwivedi

अमृतानन्दनाथ (भाष्यकार: पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished485 पृष्ठ

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तृतीयः ] दीपिकाभाषानुवादसहितम् ३१३ कौमारी पीतवर्णा च शक्तितोमरधारिणी । वरदाभयहस्ता च ध्यातव्या ^१परमेश्वरी ॥११९॥ स्पष्टम् ॥११९॥ वैष्णवी श्यामवर्णा च शङ्खचक्रगदाब्जकान्^२ । हस्तपद्मैश्च बिभ्राणा भूषिता दिव्यभूषणैः ॥१२०॥ वाराही श्यामलच्छाया ^३पोत्रिवक्त्रसमुज्ज्वला । हलं च मुसलं खड्गं खेटकं दधती भुजैः ॥१२१॥ स्पष्टम् ॥१२०-१२१॥ ऐन्द्री श्यामलवर्णा च वज्रोत्पललसत्करा । स्पष्टम् ॥१२२॥ चामुण्डा कृष्णवर्णा च शूलं डमरुकं तथा ॥१२२॥ खड्गं वेतालकं चैव दधाना दक्षिणेर्भुजैः^४ । नागखेटकघण्टाख्यान्^५ दधानान्त्यैः कपालकम् ॥१२३॥ कौमारी का वर्ण पीत है। इस परमेश्वरी का ध्यान शक्ति और तोमर धारिणी देवी के रूप में करना चाहिये। इसके अन्य दो हाथ वर और अभय मुद्रा से सुशोभित हैं ॥११९॥ इसका अर्थ स्पष्ट है ॥११९॥ वैष्णवी श्याम वर्ण की है। यह अपने हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण किये हुए है और दिव्य भूषणों से भूषित है। वाराही श्यामल वर्ण की है, इसका मुह सूकर का है और यह अपनो भुजाओं में हल, मुसल, खड्ग (तलवार) और खेटक (दण्ड) लिये हुए है ॥१२०-१२१॥ अर्थ स्पष्ट है ॥१२०-१-१॥ ऐन्द्री श्यामल वर्ण की है। इसके दोनों हाथों में वज्र और कमल शोभित है ॥ अर्थ स्पष्ट है ॥१२२॥ चामुण्डा कृष्ण वर्ण की है। यह अपने दाहिने चार हाथों में शूल, डमरु, खड्ग और वेताल धारण किये हुए है और बायें चार हाथों में नाग, खेटक, घण्टा और कपाल लिये हुए है ॥१२२-१२३॥ १. च सुरेश्वरि-ख. ने. छ. ज. झ. । २. वराभयान्-क. ग. उ. । ३. पोत्र-क. । ४. णैः करैः-क. ग. । ५. मुण्डाख्यं-ख., घण्टाख्यं-ने. च. छ. । Courtesy: Shri Tarun Dwivedi, Surviving Son of Late Vraj Vallabh Dwivediji (15 Jul 1926 - 17 Feb 2012)