भारतकोश
योगिनी हृदयम् (अमृतानन्दनाथ विमर्शिनी एवं पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी सविस्तार सटीक)

योगिनी हृदयम् (अमृतानन्दनाथ विमर्शिनी एवं पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी सविस्तार सटीक)

Yogini Hridayam with Amritanandanatha Dipika by Vraj Vallabha Dwivedi

अमृतानन्दनाथ (भाष्यकार: पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी) द्वारा

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३९४ योगिनीहृदयम् [ पूजासंकेतः

ओ मा ! शिव ने रहस्य से परिपूर्ण तुम्हारे स्वरूप का उपदेश यहाँ रहस्यमयी अस्पष्ट भाषा में ही किया था। अपने गुरु की आज्ञा मिलने पर मैंने यहाँ उसकी स्पष्ट व्याख्या कर दी है, इसके लिये मुझे आप क्षमा करें ।।

इस तरह से श्रीमत्परमयोगीन्द्र पुण्यानन्द के शिष्य अमृता- नन्द योगिप्रवर विरचित योगिनीहृदयदीपिका का यह तीसरा पूजासंकेत प्रकरण पूरा हुआ ॥ ३ ॥

॥ यह ग्रन्थ भी यहाँ समाप्त होता है ॥