योगिनी हृदयम् (अमृतानन्दनाथ विमर्शिनी एवं पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी सविस्तार सटीक)
Yogini Hridayam with Amritanandanatha Dipika by Vraj Vallabha Dwivedi
अमृतानन्दनाथ (भाष्यकार: पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३९६ परापञ्चाशिका १स्वप्रकाशात्मकं २सर्वं ३तमःकेवलतां गतम्। यच्च किञ्चिज्जगत्यस्मिन्४ प्रकाशान्नाति५रिच्यते ॥१०॥ विमर्शसरणी६ प्राप्तमित्येषा तात्त्विकी ७गतिः। अवधा८नैकतानानां मतिरेवात्र साक्षिणी ॥११॥ किं ९प्रमाणैर्वराकैस्तैश्चिदनुप्राणितात्मभिः। नहि वैकर्तनं ज्योतिर्दीपालोकमपेक्षते ॥१२॥ १० शक्तिपातपवित्रे११ऽस्मिन् धीतत्त्वे१२ च परीक्ष्यताम्। आदर्शो१३ विमलाभोगे१४ ननु१५ सर्वं प्रकाशते ॥१३॥ इत्थं चिदात्मकं १६सर्वं षट्त्रिंशद्१७भेदमुद्रितम्। आदौ १८शुद्धात्मकं १९तत्त्वं पञ्चधा २०तमसः परम् ॥१४॥ शिवः शक्तिश्च सादाख्यमीशो विद्येति भिद्यते२१। २२अक्षादिशान्तवर्णात्मा निर२३णायि शिवेन तु२४ ॥१५॥ कलाविद्ये२५ रागकालौ२६ नियतिर्बन्ध उच्यते। मायापूर्वो२७ वकारादि२८यकारान्ता२९क्षरात्मकः ॥१६॥ पुमान् शक्तिर्मनो बुद्धिरहङ्क३०तृन्मादिपञ्चकम्। श्रोत्रादिपञ्चकं ३१नादि ३२णादि वागादिपञ्चकम् ॥१७॥ तन्मात्रपञ्चकं ३३ञादि ३४ङादि व्योमादिपञ्चकम्। सिसृक्षोः प्रथम३५स्पन्दः शिवतत्त्वं ३६प्रभोः स्मृतम् ॥१८॥
१. यत्-मु. अख. ग. घ. म.। २. विश्वं-अघ.। ३. तत्त्वं-अख. ग. घ. म.। ४. देतत्-मु., न्नौतत्-अख. ग. घ. म., ञ्चैतत्-ल.। ५. दति-मु. म.। ६. सरणि- स. अक. ख. ग.। ७. मति.-मु. अघ.। ८. भासैक-मु., स्थानैक-स. अक.। ९. वराकः प्रमाणेस्तै-अख. ग. म.। १०. नास्ति पङ्क्तिः-स. अक.। ११. त्रेषु-अख. ग. म, त्रायां धिया तत्त्वं परीक्षते-अघ.। १२. तत्त्वं सम्प-अख. ग. म.। १३. आदर्श-मु. अघ.। १४. लादर्श-स. अक.। १५. न तु-मु. ल. अक.। १६. विश्वं-स. अक. घ.। १७. स्तत्त्वमु-स. अक., तत्त्वभेदितम्-अख. ग. म., द्भेदतत्तवतः-मु.। १८. चिदा- अख. ग. म.। १९. चक्रं-अख. ग. म.। २०. तु ततः-अख. ग. म.। २१. कथ्यते- स. अक.। २२. हला-स. अक., शक्त्या-अख. ग. घ. म.। २३. मायि-मु. अघ.। २४. तत्-स. अक. ख. ग. म.। २५. विद्या-मु. अख. ग. म.। २६. कालाः-ल. म., काल-मु.। २७. पूर्णो-ल। २८. अका-मु.। २९. त्मकः पुमान्-स. अक., क्षरात्मिका शक्तिः-अख. ग. म.। ३०. कारादि-मु. अख. ग.। ३१. तादि-मु.। ३२. टादि-मु.। ३३. चादि-मु.। ३४. कादि-मु.। ३५. प्रथमः-स.। ३६. विभोः-मु. अघ.। Courtesy: Shri Tarun Dwivedi, Surviving Son of Late Vraj Vallabh Dvivediji (15 Jul 1926 - 17 Feb 2012)