भारतकोश
योगिनी हृदयम् (अमृतानन्दनाथ विमर्शिनी एवं पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी सविस्तार सटीक)

योगिनी हृदयम् (अमृतानन्दनाथ विमर्शिनी एवं पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी सविस्तार सटीक)

Yogini Hridayam with Amritanandanatha Dipika by Vraj Vallabha Dwivedi

अमृतानन्दनाथ (भाष्यकार: पं. व्रजवल्लभ द्विवेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished485 पृष्ठ

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३८ योगिनीहृदयम् [ चक्रसंकेतः तैजसं परमेशानि तन्मध्य^१स्थितशक्तयः । निष्कलाः परमेशानि विद्युत्पुञ्जनिभाः स्मरेत् ॥ तदूर्ध्वे कर्णिकामध्ये वह्निबिम्बं तदूर्ध्वगम् । पूर्णपीठं च ^२तन्मध्ये शाकिनी संस्थिता शिवे ॥ इति । शाक्ते, शक्तिः हृल्लेखा, तदूर्ध्वस्थितत्वाच्छाक्तं^३ स्वाधिष्ठानं ^४षडस्र- कमलम् । तदुक्तं स्वच्छन्दसंग्रहे— आधारपङ्कजस्योर्ध्वे सार्धद्वयङ्गुलकोपरि । तैजसं साष्टपत्रं च पीतकर्णिकया युतम् ॥ हृल्लेखाकर्णिकामध्ये स्थितानङ्गादिसेविते^५ । एतस्माद् द्व्यङ्गुलादूर्ध्वं स्वाधिष्ठानं षडस्रकम् ॥ आप्यं च ^६बन्दिनीशक्तिपूर्वाभिः शक्तिभिर्वृतम्^७ । काकिनीमभिसंचिन्त्य ... .... ॥ इति । किया जाता है। यह पंकज पृथ्वी तत्त्व का प्रतिनिधि है। इसके ऊपर दूसरा तैजस पंकज विद्यमान है। हे परमेश्वरि ! इस चक्र में विद्युत्पुंज के समान देदीप्यमान निष्कल शक्तियों का ध्यान करना चाहिये । इस चक्र पर कर्णिका के मध्य में वह्निबिम्ब विद्यमान है और इसके ऊपर पूर्णगिरि पीठ है । हे शिवे ! यहाँ शाकिनी देवी निवास करती हैं। शक्ति हृल्लेखा को कहते हैं। ऊपर वर्णित वह्निचक्र के ऊपर विद्यमान शाक्त षड्- दल कमल स्वाधिष्ठान के नाम से प्रसिद्ध है। स्वच्छन्दसंग्रह में यह इस तरह से वर्णित है— आधार पंकज से ढाई अंगुल के ऊपर तैजस कमल विद्यमान है। यह आठ दल वाला और पीतवर्ण की कर्णिका से युक्त है। इसकी कर्णिका में हृल्लेखा विद्यमान है और उसमें ^१अनङ्गा प्रभृति शक्तियाँ निवास करती हैं। इस अष्टदल चक्र से दो अंगुल ऊपर षड्दल स्वाधिष्ठान चक्र स्थित है। यह जल तत्त्व का प्रतिनिधि है। इसमें ^२बन्दिनी प्रभृति शक्तियों से घिरी हुई काकिनी देवी का ध्यान किया जाता है। १. मध्ये सित-ग. घ. ने. ज. झ. उ. । २. तस्योर्ध्वे-ख. ग. घ. ने. झ. उ. । ३. शाक्तस्याधिष्ठानं-ग. ने. । ४. 'षडस्रकमलम्' नास्ति-ख. ग. घ. ने. ज. उ. । ५. देवता-ख. । ६. वशिनी-ग. घ. ने. उ. । ७. वृतम्-ग. घ. ज. उ. । १. नित्याषोडशिकार्णव (१।१७७-१७८) में वर्णित अनङ्गकुसुमा आदि आठ देवियों को यहाँ स्मरण किया गया लगता है। २. ब भ म य र ल इन छः अक्षरों की अधिष्ठात्री बन्दिनो, भद्रकाली, महामाया, यशस्विनी, रक्ता और लम्बौष्ठिका नामक देवियों का ध्यान यहाँ किया जाता है।