युक्तिकल्पतरु (महाराज भोज - नौका-निर्माण, जलयान-विज्ञान, शस्त्र, दुर्ग एवं राजधर्म सटीक)

युक्तिकल्पतरु (महाराज भोज - नौका-निर्माण, जलयान-विज्ञान, शस्त्र, दुर्ग एवं राजधर्म सटीक)
Yuktikalpataru of Maharaja Bhoja with Commentary
महाराज भोज (सम्पादक: पण्डित ईश्वरचन्द्र शास्त्री) द्वारा
DevanagariHindipublished278 पृष्ठ
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under य? Look at यथैव: य has a small dot/smudge? No, यथैव विद्वान् ।)
* Line 17:
`न हि व्यवस्थास्ति गुणागुणेषु;`
Wait, semicolon at the end? Yes, `;`!
* Line 18:
`सर्व्वत्र सर्व्वाकृतयो भवन्ति ॥ ८५ ॥`
Notice double v: `सर्व्वत्र सर्व्वाकृतयो भवन्ति ॥ ८५ ॥`.
* Line 19:
`ब्रह्मादि जाति-भेदेन शुक्तयोपि चतुर्विधाः ।`
Wait: `ब्रह्मादि` or `ब्राह्मादि`?
First letter: `ब्र` or `ब्रा`? There is no aa-kar, it's `ब्रह्मादि`!
Wait, look at line 21: `ब्राह्मणस्तु`. Here `ब्रा` has an aa-kar. In line 19, `ब्रह्मादि` has NO aa-kar, it is `ब्रह्मादि`.
`जाति-भेदेन`: has hyphen: `जाति-भेदेन`.
`शुक्तयोपि`: `शुक्तयोपि` (no avagraha).
`चतुर्विधाः ।`
* Line 20:
`तासु सर्वासु जातं हि मौक्तिकं स्याच्चतुर्विध