भारतकोश
ईशादि नौ उपनिषद्

ईशादि नौ उपनिषद्

Ishadi Nau Upanishad

ऋषिगण द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

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( १० )

मन्त्रविषयपृष्ठ
इन्द्रियोंसे आत्माकी भिन्नता जाननेका फल..... १६१
७—९तत्त्व-विचारके वर्णनमें आत्माको बुद्धिसे पर बतलाना
और सर्वश्रेष्ठ, सबके आश्रय परमेश्वरको जान लेनेपर
अमृतत्वकी प्राप्तिका कथन..... १६२
१०—११योगके स्वरूप और साधनका प्रकरण..... १६४
१२—१३भगवद्विश्वाससे भगवत्प्राप्तिका कथन..... १६५
१४—१५निष्कामभावकी एवं संशयरहित निश्चयकी महिमा..... १६६
१६मरनेके बाद जीवकी गतिका विषय..... १६७
१७शरीर और आत्माके भीतर रहनेवाले परमेश्वरकी उन दोनोंसे
विलक्षणता और उसके ज्ञानसे मोक्षकी प्राप्तिका निरूपण..... १६८
१८उपर्युक्त ब्रह्मविद्या और योगविधिके द्वारा नचिकेताको
ब्रह्मकी प्राप्ति होनेका कथन..... १६९
शान्तिपाठ..... १७०

( ४ ) प्रश्नोपनिषद्

उपनिषद्के सम्बन्धमें प्राक्कथन तथा शान्तिपाठ ..... १७१

( प्रथम प्रश्न )

१—३ | सुकेशादि ऋषियोंका महर्षि पिप्पलाद गुरुके पास जाना, गुरुकी आज्ञाके अनुसार तप करना और प्रजोत्पत्तिके विषयमें कबन्धीका प्रश्न | ..... १७२ ---|---|--- ४—८ | परमेश्वरके संकल्पद्वारा प्राण और रयिके संयोगसे जगत्की उत्पत्तिका वर्णन एवं आदित्य और चन्द्रमामें प्राण और रयि-दृष्टिका कथन | ..... १७५ ९—११ | प्राण और रयिके सम्बन्धसे परमेश्वरकी उपासनाके प्रकार और उसके फलके निरूपणमें संवत्सरादिमें प्रजापति-दृष्टिका वर्णन तथा सूर्यमें उसके आत्मस्वरूप परमेश्वरको उपास्यदेव बतलाना ... | १७९ १२ | मासादिमें प्रजापति-दृष्टि करके उपासना करनेका प्रकार | ..... १८२ १३ | दिन-रातमें प्रजापति परमेश्वरकी दृष्टि करके उपासना करनेका प्रकार तथा दिनोंमें मैथुनका निषेध | ..... १८३ १४ | अन्नको प्रजापतिस्वरूप बताकर उसे प्रजाका कारण बताना | ..... १८४