ईशादि नौ उपनिषद्

ईशादि नौ उपनिषद्
Ishadi Nau Upanishad
ऋषिगण द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished548 पृष्ठ
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( ६ )
| मन्त्र | विषय | पृष्ठ |
|---|---|---|
| २ | शिष्यद्वारा विलक्षणतापूर्वक अपनी अनुभूतिका वर्णन | ..... ५५ |
| ३-४ | गुरु-शिष्य-संवादका निष्कर्ष | ..... ५६ |
| ५ | ब्रह्म-तत्त्वको इसी जन्ममें जान लेनेकी अत्यावश्यकताका प्रतिपादन | ..... ५७ |
तृतीय खण्ड
| १-२ | परब्रह्म परमात्माकी महिमान जाननेके कारण देवताओंका अभिमान और उसके नाशके लिये यक्षका प्रादुर्भाव | ..... ५९ |
|---|---|---|
| ३-६ | यक्षको जाननेके लिये अग्निदेवका प्रयत्न और यक्षके द्वारा अग्निदेवके अभिमानका नाश | ..... ६० |
| ७-१० | यक्षको जाननेके लिये वायुदेवका प्रयत्न और यक्षके द्वारा वायुदेवके अभिमानका नाश | ..... ६३ |
| ११-१२ | यक्षको जाननेके लिये इन्द्रदेवका प्रयत्न, यक्षका अन्तर्धान होना तथा उमादेवीका प्राकट्य और उनसे इन्द्रका प्रश्न | ..... ६५ |
चतुर्थ खण्ड
| १-३ | उमादेवीद्वारा यक्षरूपमें प्रकट परब्रह्मके तत्त्वका उपदेश, उपदेश पाकर इन्द्रको ब्रह्मज्ञानकी प्राप्ति तथा अग्नि, वायु और इन्द्रकी श्रेष्ठता एवं उनमें भी इन्द्रकी सर्वश्रेष्ठताका निरूपण | ..... ६७ |
|---|---|---|
| ४ | आधिदैविक दृष्टान्तसे ब्रह्मज्ञानकी पूर्वावस्थाके विषयमें सांकेतिक आदेश और उसका महत्त्व | ..... ६९ |
| ५ | उसी प्रकार आध्यात्मिक दृष्टान्तसे ब्रह्मज्ञानकी पूर्वावस्थाके विषयमें सांकेतिक आदेश और निरन्तर प्रेमपूर्वक उसका स्मरण होनेका कथन | ..... ७० |
| ६ | परब्रह्मकी उपासनाका प्रकार और फल | ..... ७१ |
| ७ | उपसंहार | ..... ७२ |
| ८-९ | ब्रह्मविद्याके साधनोंका वर्णन तथा ब्रह्मविद्याका रहस्य जाननेकी महिमा | ..... ७२ |
| शान्तिपाठ | ..... ७४ |
( ३ ) कठोपनिषद्
| उपनिषद्के सम्बन्धमें प्राक्कथन तथा शान्तिपाठ | ..... ७५ |
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