श्रीरामचरितमानस

श्रीरामचरितमानस
Shri Ramcharitmanas
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
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| विषय | पृष्ठ-संख्या | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|
| १११-भरतजीका अयोध्या लौटना, | |||
| भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, | |||
| नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके | |||
| चरित्र-श्रवणकी महिमा ..... | ६०९ | १२७-शबरीपर कृपा, नवधा भक्ति- | |
| उपदेश और पम्पासरकी ओर | |||
| प्रस्थान ..... | ६६६ | ||
| अरण्यकाण्ड | १२८-नारद-राम-संवाद ..... | ६७४ | |
| ११२-मंगलाचरण ..... | ६१९ | १२९-संतोंके लक्षण और सत्संग- | |
| भजनके लिये प्रेरणा ..... | ६७८ | ||
| ११३-जयन्तकी कुटिलता और फलप्राप्ति ..... | ६२० | किष्किन्धाकाण्ड | |
| ११४-अत्रि-मिलन एवं स्तुति ..... | ६२२ | १३०-मंगलाचरण ..... | ६८१ |
| ११५-श्रीसीता-अनसूया-मिलन और | |||
| श्रीसीताजीको अनसूयाजीका | |||
| पातिव्रतधर्म कहना ..... | ६२५ | १३१-श्रीरामजीसे हनुमान्जीका मिलना | |
| और श्रीराम-सुग्रीवकी मित्रता ..... | ६८२ | ||
| ११६-श्रीरामजीका आगे प्रस्थान, विराध- | |||
| वध और शरभङ्ग-प्रसङ्ग ..... | ६२८ | १३२-सुग्रीवका दुःख सुनाना, बालिवधकी | |
| प्रतिज्ञा, श्रीरामजीका मित्र- | |||
| लक्षण-वर्णन ..... | ६८६ | ||
| ११७-राक्षस-वधकी प्रतिज्ञा करना ..... | ६३० | १३३-सुग्रीवका वैराग्य ..... | ६८९ |
| ११८-सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, | |||
| अगस्त्य-संवाद, रामका दण्डक- | |||
| वन-प्रवेश और जटायु-मिलन ..... | ६३१ | १३४-बालि-सुग्रीव-युद्ध, बालि-उद्धार... | ६९० |
| ११९-पञ्चवटी-निवास और श्रीराम- | |||
| लक्ष्मण-संवाद ..... | ६३८ | १३५-ताराका विलाप, ताराको श्रीरामजी- | |
| द्वारा उपदेश और सुग्रीवका राज्याभिषेक | |||
| तथा अंगदको युवराजपद ..... | ६९३ | ||
| १२०-शूर्पणखाकी कथा, शूर्पणखाका | |||
| खर-दूषणके पास जाना और | |||
| खर-दूषणादिका वध ..... | ६४१ | १३६-वर्षा-ऋतु-वर्णन ..... | ६९५ |
| १२१-शूर्पणखाका रावणके निकट जाना, | |||
| श्रीसीताजीका अग्नि-प्रवेश और | |||
| माया-सीता ..... | ६४९ | १३७-शरद-ऋतु-वर्णन ..... | ६९७ |
| १२२-मारीचप्रसंग और स्वर्ण-मृगरूपमें | |||
| मारीचका मारा जाना ..... | ६५२ | १३८-श्रीरामकी सुग्रीवपर नाराजी, | |
| लक्ष्मणजीका कोप ..... | ६९९ | ||
| १२३-श्रीसीताहरण और श्रीसीता-विलाप ..... | ६५७ | १३९-सुग्रीव-राम-संवाद और | |
| सीताजीकी खोजके लिये बंदरोंका | |||
| प्रस्थान ..... | ७०१ | ||
| १२४-जटायु-रावण-युद्ध ..... | ६५८ | १४०-गुफामें तपस्विनीके दर्शन ..... | ७०५ |
| १२५-श्रीरामजीका विलाप, जटायुका | |||
| प्रसंग ..... | ६६० | १४१-वानरोंका समुद्रतटपर आना, सम्पातीसे | |
| भेंट और बातचीत ..... | ७०५ | ||
| १२६-कबन्ध-उद्धार ..... | ६६५ | १४२-समुद्र लॉघनेका परामर्श, जाम्बवन्तका | |
| हनुमान्जीको बल याद दिलाकर | |||
| उत्साहित करना ..... | ७०९ | ||
| १४३-श्रीरामगुणका माहात्म्य ..... | ७११ |