१०८ उपनिषद् (ज्ञान खण्ड - भाग २)
108 Upanishads Part 2 - Gyan Khand
पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)
यहाँ पृष्ठ का लिप्यन्तरण प्रस्तुत है:
मन्त्रानुक्रमणिका [पृष्ठ ४९६]
| मन्त्र प्रतीक | उपनिषद् विवरण | मन्त्र प्रतीक | उपनिषद् विवरण |
|---|---|---|---|
| कतम इन्द्रः कतमः | बृह० ३.९.६ | क्षरं प्रधानममृताक्षरम् | श्वेता० १.१० |
| कतमा कतमर्कतमतू | छान्दो० १.१.४ | क्षेत्राज्ञाधिष्ठितं | मन्त्रि० १९ |
| कतमे ते त्रयो देवा | बृह० ३.९.८ | गताः कलाः पञ्चदश | मुंड० ३.२.७ |
| कतमे रुद्रा इति | बृह० ३.९.४ | गायत्री वा इदःसर्वम् | छान्दो० ३.१२.१ |
| कतमे वसव इत्यग्निश्च | बृह० ३.९.३ | गुणान्वयो यः फलकर्मकर्ता | श्वेता० ५.७ |
| कतमे षडित्यग्निश्च | बृह० ३.९.७ | गुरुर्प्येवंविच्छुचौ | मुद्ग० ४.१२ |
| कथं बन्धः कथं मोक्षः | सर्व० १ | गो अश्वमिह महिमेत्याकचक्षते | छान्दो० ७.२४.२ |
| कर्तृत्वाद्व... बन्धः | निरा० २० | गौरनाद्यन्तवती सा | मन्त्रि० ५ |
| कर्मेति च.... कर्म | निरा० ११ | ग्राह्यमिति.... ग्राह्यम् | निरा० ३७ |
| कल्पन्ते हास्मा ऋतव | छान्दो० २.५.२ | धनमुत्सृज्य वा | ना०ब्रि० ३७ |
| कल्पन्ते हास्मै | छान्दो० २.२.३ | घृतकौशिकाद् घृतकौशिकः | बृह० २.६.३, ४.६.३ |
| कस्मिन्नु त्वं चात्मा | बृह० ३.९.२६ | घृतात्परं मण्डमिवा. | श्वेता० ४.१६ |
| कांस्य घण्टानिनादः | प्रण० १२ | घोषिणी प्रथमा मात्रा | ना०बि० ९ |
| काम एव यस्रायतन | बृह० ३.९.११ | चक्षुरेव ब्रह्मणश्चतुर्थः | छान्दो० ३.१८.५ |
| काम क्रोध लोभमय | मैत्रा० १.३ | चक्षुरेवात्मा | छान्दो० १.७.२ |
| काम क्रोध लोभमोह | मुद्ग० ४.४ | चक्षुर्वै ग्रहः | बृह० ३.२.५ |
| कामस्याप्तिं | कठ० १.२.११ | चक्षुर्होच्चक्राम | बृह० ६.१.९ |
| कामान् यः कामयते | मुण्ड० ३.२.२ | चक्षुर्होच्चक्राम | छान्दो० ५.१.९ |
| कार्योपाधिरयम् | शु०र० ४२ | चतुरौदुम्बरो भवत्यौदु. | बृह० ६.३.१३ |
| कालत्रयेऽपि | ना०बि० ८ | चतुर्णामपि वेदानाम् | शु०र० १७ |
| कालः प्राणश्च | मन्त्रि० १२ | चतुर्भिः पश्यते | अमृ० ३० |
| कालः स्वभावो | श्वेता० १.२ | चतुर्मुखेन्द्र देवेषु | शु०र० ३२ |
| काली कराली च | मुण्ड० १.२.४ | चतुर्विंशति संख्यातं | मन्त्रि० १५ |
| काष्ठवज्जायते देह | ना०बि० ५३ | चन्द्रमा एव सविता | गाय० ३.५ |
| का साम्नो गतिरिति | छान्दो० १.८.४ | चिज्जडानां तु यो | स्क० ४ |
| किं देवतोऽस्यां दक्षिणायाम् | बृह० ३.९.२१ | चित्तमेव हि संसारः | मैत्रा० ४.४ (ग) |
| किं देवतोऽस्यां ध्रुवायाम् | बृह० ३.९.२४ | चित्तं वाव सङ्कल्पाद्भूयो | छान्दो० ७.५.१ |
| किं देवतोऽस्यां प्रतीच्याम् | बृह० ३.९.२२ | चित्तस्य हि प्रसादेन | मैत्रा० ४.४ (घ) |
| किं देवतोऽस्यां प्राच्याम् | बृह० ३.९.२० | छन्दांसि यज्ञाः | श्वेता० ४.९ |
| किं ब्रह्म... ब्रह्मेति | निरा० ३ | जनकःह वैदेहं यज्ञ. | बृह० ४.३.१ |
| किं देवतोऽस्यामुदीच्यां | बृह० ३.९.२३ | जनको ह वैदेह आसां च | बृह० ४.१.१ |
| किल्विषं हि क्षयम् | अमृ० ९ | जनको ह वैदेहः कूर्चा. | बृह० ४.२.१ |
| कुतस्तु खलु | छान्दो० ६.२.२ | जनको ह वैदेहो बहु. | बृह० ३.१.१ |
| कुर्वन्नेवेह कर्माणि | ईश० २ | जनोलोकस्तु | ना०बि० ४ |
| कुलगोत्र जातिवर्णाश्रम० | मुद्ग० ४.८ | जागरित स्थानो बहिः | माण्डू० ३ |
| कूटस्थोपहित भेदानां | सर्व० ११ | जागरित स्थानो वैश्वा. | माण्डू० ९ |
| कृतकृत्यः | शु०र० १० | जाग्रन्निद्राविनिर्मुक्तः | ना०बि० ५५ |
| केनेषितं पतति | केन० १.१ | जातिरिति... प्रकल्पिता | निरा० १० |
| केवलमोक्ष... बन्धः | निरा० २७ | जातेऽग्निमुपसमाधायाङ्क | बृह० ६.४.२४ |
| कोऽयमात्मेति | ऐत० ३.१.१ | जानश्रुतिर्ह पौत्रायणः | छान्दो० ४.१.१ |
| क्व तर्हि यजमानस्य | छान्दो० २.२४.२ | जानाम्यहम् | कठ० १.२.१० |
| क्षत्रं प्राणो वै क्षत्रम् | बृह० ५.१३.४ | जिह्वा वै ग्रहः | बृह० ३.२.४ |
४१७ मन्त्रानुक्रमणिका मन्त्र प्रतीक उपनिषद् विवरण मन्त्र प्रतीक उपनिषद् विवरण जीव इति च ब्रह्म० निरा० ५ तत्रापरा ऋग्वेदो. मुण्ड० १.१.५ जीवः शिवः शिवो स्क० ६ तत्रोद्गातृनास्तावे. छान्दो० १.१०.८ जीवापेतं वाव किलेदम् छान्दो० ६.११.३ तत्सवितुर्वरेण्यमित्यसौ मैत्रा० ५.७ ज्ञाज्ञो द्वाव जावीशानीशावजा श्वेता० १.९ तत् स्त्रिया आत्मभूयं ऐत० २.१.२ ज्ञातृज्ञानज्ञेय सर्व० ९ तथामुष्मिँल्लोके छान्दो० १.९.४ ज्ञात्वा देवम् श्वेता० १.११ तथेति ह समुपविविशुः छान्दो० १.८.२ ज्ञानमिति ... ज्ञानम् निरा० १३ तदपानेनाजिघृक्षत् ऐत० १.३.१० ज्येष्ठाय स्वाहा श्रेष्ठाय बृह० ६.३.२ तदभिमृशेदन् वा बृह० ६.४.५ तं चेदेतस्मिन्वयसि..आदित्या छान्दो० ३.१६.६ तदभ्यद्रवत्... अग्निंर्वा केन० ३.४ तं चेदेतस्मिन्वयसि... रुद्रा छान्दो० ३.१६.४ तदभ्यद्रवत्... वायुर्वा केन० ३.८ तं चेदेतस्मिन्वयसि... वसव छान्दो० ३.१६.२ तदाहुर्यदयमेक इवैव बृह० ३.९.९ तं चेद्ब्रूयुरास्मिँश्चेदिदम् छान्दो० ८.१.४ तदाहुर्यद्ब्रह्मविद्यया बृह० १.४.९ तं चेद्ब्रूयुर्यदिदमस्मिन् छान्दो० ८.१.२ तदुक्तमृषिणा ऐत० २.१.५ तं जायोवाच तप्तो छान्दो० ४.१०.२ तदुताप्याहुः सान्नैन्नमुपा. छान्दो० २.१.२ तं जायोवाच हन्त छान्दो० १.१०.७ तदु ह जानश्रुतिः छान्दो० ४.१.५ तं दुर्दर्शं कठ० १.२.१२ तदु ह जानश्रुतिः पौत्रायणः छान्दो० ४.२.१ तं मद्गुरुपनिपत्याभ्युवाद छान्दो० ४.८.२ तदुह शौनकः कापेयः छान्दो० ४.३.७ तं यज्ञमिति मुद्र० १.७ तदेजति तन्नैजति ईश० ५ तं यज्ञायथोपासते मुद्र० ३.३ तदेतच्चतुष्पादद्ब्रह्म छान्दो० ३.१८.२ तं षड्विंशक इत्येते मन्त्रि० १४ तदेतत्प्रेयः पुत्रात्प्रेयो बृह० १.४.८ तं ह स्मैतमेवम् गा० ८.१ तदेतत्सल्यं मन्त्रेषु मुण्ड० १.२.१ त इमे सत्याः कामा छान्दो० ८.३.१ तदेतत् सत्यमृषिरङ्गिराः मुण्ड० ३.२.११ त इह व्याघ्रो वा सिंह हो छान्दो० ६.९.३ तदेतत्सत्यं यथा मुण्ड० २.१.१ त एतदेव रूपमभि- छान्दो० ३.६.२,७.२, तदेतत्सृष्टं ऐत० १.३.३ ८.२,९.२,१०.२ तदेतदिति मन्यन्ते कठ० २.२.१४ तच्चक्षुषाजिघृक्षत् ऐत० १.३.५ तदेतदृचाऽभ्युक्तम् मुण्ड० ३.२.१० तच्छ्रोत्रेनाजिघृक्षत् ऐत० १.३.९ तदेतदृचाभ्युक्तं.....एष बृह० ४.४.२३ तच्छ्रुत्वा व्यासवचनं शु०२० ९ तदेतद्ब्रह्म क्षत्रं विट् बृह० १.४.१५ तच्छ्रुत्वा सकलाकारं शु०२० ५२ तदेतन्मिथुनमोमित् छान्दो० १.१.६ तच्छ्रोत्रेणाजिघृक्षत् ऐत० १.३.६ तदेतन्मूर्त्तं यदन्यद्वा. बृह० २.३.२ ततः परतरं शुद्धं ना०बि० १७ तदेते श्लोका... अणुः पन्था बृह० ४.४.८ ततः परं ब्रह्मापरम् श्वेता० ३.७ तदेते... स्वप्नेन बृह० ४.३.११ ततो ब्रह्मोपदिष्टम् शु०२० ४७ तदेवाग्निस्तदादित्य. श्वेता० ४.२ ततो यदुत्तरतरम् श्वेता० ३.१० तदेष... तदेव सक्तः सह बृह० ४.४.६ ततो विलीनपाशोऽसौ ना०बि० २० तदेष... यदा सर्वे बृह० ४.४.७ तत्कर्म कृत्वा श्वेता० ६.३ तदेष श्लोकः यदा छान्दो० ५.२.९ तत्तु जन्मान्तर ना०बि० २४ तदेष श्लोकः । यानि छान्दो० २.२१.३ तत्पदमहामन्त्रस्य शु०२० २३ तदेष श्लोकः शतम् छान्दो० ८.६.६ तत्त्वचाजिघृक्षत् ऐत० १.३.७ तदेष श्लोको न पश्यो छान्दो० ७.२६.२ तत्प्राणेनाजिघृक्षत् ऐत० १.३.४ तदेष श्लोको भवति बृह० २.२.३ तत्र देवास्त्रयः प्रण० ३ तदैक्षत बहु स्याम् छान्दो० ६.२.३ तत्र यत्प्रकाशाते सर्व० ८ तद्व तद्वनं नाम केन० ४.६
मन्त्रानुक्रमणिका ४९८ मन्त्र प्रतीक | उपनिषद् विवरण | मन्त्र प्रतीक | उपनिषद् विवरण
तद्धापि ब्रह्मदस्तश्चैकिता. | बृह० १.३.२४ | तद्यक्षरत्तदादित्यम् | छान्दो० ३.१.४ तद्धि मौद्गल्य | गाय० १.२ | तद्यक्षरत्तदादित्य.. कृष्णः | छान्दो० ३.३.३ तद्धेदं तर्ह्यव्याकृतमासीत् | बृह० १.४.७ | तद्यक्षरत्तदादित्यम्.. परं | छान्दो० ३.४.३ तद्धैतत् सत्यकामो | छान्दो० ५.२.३ | तद्यक्षरत्तदादित्य.. मध्ये | छान्दो० ३.५.३ तद्धैतद्धोर आङ्गिरसः | छान्दो० ३.१७.६ | तद्यक्षरत्तदादित्य.. शुक्लः | छान्दो० ३.२.३ तद्धैतद्ब्रह्मा... आचार्य | छान्दो० ८.१५.१ | तन्नम इत्युपासीत | तैत्ति० ३.१०.४ तद्धैतद्ब्रह्मा... ज्येष्ठाय | छान्दो० ३.११.४ | तन्मनसाजिघृक्षत् | ऐत० १.३.८ तद्धैषां विजज्ञौ | केन० ३.२ | तप इति च... तपः | निरा० ३५ तद्धोभये देवासुरा | छान्दो० ८.७.२ | तपः प्रभावाद्देवप्रसादाच्च | श्वेता० ६.२१ तद्ब्रह्म तापत्रयातीतम् | मुद्ग० ४.१ | तपः श्रद्धे ये | मुण्ड० १.२.११ तद्य इत्थं विदुः ये चेमे. | छान्दो० ५.१०.१ | तपसा चीयते ब्रह्म | मुण्ड० १.१.८ तद्य इह रमणीयचरणा | छान्दो० ५.१०.७ | तम एव यस्यायतन | बृह० ३.९.१४ तद्य एवैतं ब्रह्मलोकम् | छान्दो० ८.४.३ | तमग्निरभ्युवाद सत्यकाम | छान्दो० ४.६.२ तद्य एवैतावरं च | छान्दो० ८.५.४ | तमब्रवीत्प्रीयमाणो | कठ० १.१.१६ तद्यत्तत्सत्यमसौ | बृह० ५.५.२ | तमभ्यतपत्तस्य | ऐत० १.१.४ तद्यत्प्रथमममृतम् | छान्दो० ३.६.१ | तमशना पिपासे | ऐत० १.२.५ तद्यत्रैतत्सुप्तः समस्तः | छान्दो० ८.११.१ | तमाजुहाव तमभ्युवाचा | गाय० १.४ तद्यत्रैतत्सुप्तः | छान्दो० ८.६.३ | तमीश्वराणां परमम् | श्वेता० ६.७ तद्यथा तृणजलायुका | बृह० ४.४.३ | तमुपसङ्गृह्य | गाय० २.८ तद्यथाऽनः सुसमाहित | बृह० ४.३.३५ | तमु ह परः प्रत्युवाच | छान्दो० ४.१.३ तद्यथा पेशस्कारी पेशसो | बृह० ४.४.४ | तमु ह परः प्रत्युवाचाह | छान्दो० ४.२.३ तद्यथा महापंथ आतत | छान्दो० ८.६.२ | तमेकनेमिं त्रिवृतं | श्वेता० १.४ तद्यथा महामत्स्य उभे | बृह० ४.३.१८ | तमेतमग्निरित्यध्वर्यव | मुद्ग० ३.२ तद्यथा राजानं प्रयि० | बृह० ४.३.३८ | तमेताः सप्ताक्षितय | बृह० २.२.२ तद्यथा राजानमायन्त० | बृह० ४.३.३७ | तमेव धीरो विज्ञाय | बृह० ४.४.२१ तद्यथा लवणेन | छान्दो० ४.१७.७ | तमो वा इदमेकमास | मैत्रा० ४.५ तद्यथास्मिन्नाकाशे | बृह० ४.३.१९ | तयोरन्यतरां मनसा | छान्दो० ४.१६.२ तद्यथेषीकातूलमग्नौ | छान्दो० ५.२४.३ | तस्मा आदित्याश्च | छान्दो० २.२४.१६ तद्यथेह कर्मजितो लोकः | छान्दो० ८.१.६ | तस्मा उ ह ददुस्ते | छान्दो० ४.३.८ तद्यद्भक्तं प्रथमम् | छान्दो० ५.१९.१ | तस्मा एतत् प्रोवाच | गा० २.७ तद्यद्वृक्नो रिष्येद् भूः | छान्दो० ४.१७.४ | तस्माच्च देवा | मुण्ड० २.१.७ तद्यद्रजतःसेयं पृथिवी | छान्दो० ३.१९.२ | तस्मादग्निः समिधो | मुण्ड० २.१.५ तद्युक्तस्तन्मयो | ना० बि० १९ | तस्मादप्यद्येहाददान. | छान्दो० ८.८.५ तद्ये ह वै | प्रश्न० १.१५ | तस्मादाहुः सोष्य. | छान्दो० ३.१७.५ तद्वत्सत्यमविज्ञाय | ना०बि० २७ | तस्मादिति च मन्त्रेण | मुद्ग० १.८ तद्वा अस्यैतदतिच्छन्दा | बृह० ४.३.२१ | तस्मादिदन्द्रो | ऐत० १.३.१४ तद्वा एतदक्षरं गार्ग्यदृष्टं | बृह० ३.८.११ | तस्मादु हैवं विद्द्यद्यपि | छान्दो० ५.२४.४ तद्वा एतदनुज्ञाक्षरं | छान्दो० १.१.८ | तस्मादृचः साम | मुण्ड० २.१.६ तद्विप्रासो विपन्धवो | स्क० १५ | तस्मादेतत्पुरुषम्. | मुद्ग० ४.११ तद्विष्णोः परमं पदम् | स्क० १४ | तस्माद्वा इन्द्रो | केन० ४.३ तद्देगुह्योपनिषत्सु | श्वेता० ५.६ | तस्माद्वा एतं सेतुम् | छान्दो० ८.४.२ तद्वै तदेतदेव तदास | बृह० ५.४.१ | तस्माद्वा एते | केन० ४.२
४९९ मन्त्रानुक्रमणिका मन्त्र प्रतीक उपनिषद् विवरण मन्त्र प्रतीक उपनिषद् विवरण तस्माद्विराडित्यनया मुद्ग० १.५ तस्यै तपोदमः केन० ४.८ तस्मिञ्छुक्लमृतनीलमाहुः बृह० ४.४.९ तस्यै वाचः पृथिवी बृह० १.५.११ तस्मिन्त्रिमानि सर्वाणि छान्दो० २.९.२ तस्यैष आदेशो केन० ४.४ तस्मिन्नेतस्मिन्नग्नौ... अन्नं छान्दो० ५.७.२ तं ह कुमार कठ० १.१.२ तस्मिन्नेतस्मिन्नग्नौ... रेतो छान्दो० ५.८.२ तं ह चिरं वसेत्याज्ञा- छान्दो० ५.३.७ तस्मिन्नेतस्मिन्नग्नौ.. वर्षम् छान्दो० ५.६.२ तं ह प्रवाहणो छान्दो० १.८.८ तस्मिन्नेतस्मिन्नग्नौ... श्रद्धां छान्दो० ५.४.२ तं ह शिलकः छान्दो० १.८.६ तस्मिन्नेतस्मिन्नग्नौ... सोम छान्दो० ५.५.२ तं हंस उपनिपत्याभ्युवाद छान्दो० ४.७.२ तस्मिन्द्यावत्संपातम् छान्दो० ५.१०.५ तं हाङ्गिरा उद्गीथम् छान्दो० १.२.१० तस्मिंस्त्वयि किं केन० ३.९ तं हाभ्युवाद रैकैद छान्दो० ४.२.४ तस्मै तृणं केन० ३.६ तं हैतमतिधन्वा छान्दो० १.९.३ तस्मै तृणं निदधावेतदादत्स्वेति केन० ३.१० तं हैतमुद्दालक बृह० ६.३.७ तस्मै श्वा श्वेतः छान्दो० १.१२.२ तं होवाच किंगोत्रः छान्दो० ४.४.४ तस्मै स विद्वान् मुण्ड० १.२.१३ तं होवाच नैतदब्राह्मणो छान्दो० ४.४.५ तस्मै स होवाच इहैवान्तः प्रश्न० ६.२ तं होवाच...महतो ऽभ्याहित- छान्दो० ६.७.३ तस्मै स होवाच एतद्वै प्रश्न० ५.२ तं होवाच यथा सोम्य छान्दो० ६.७.५ तस्मै स होवाच द्वेविद्ये मुण्ड० १.१.४ तं होवाच यं वै सोम्यै- छान्दो० ६.१२.२ तस्मै स होवाच प्रजाकामो प्रश्न० १.४ तां योगमिति कठ० २.३.११ तस्मै स होवाच यथा प्रश्न० ४.२ तां भवान् प्रब्रवीत्विति गा० १.६ तस्मै स होवाचाकाशो प्रश्न० २.२ ताऽहैत्तामेके बृह० ५.१४.५ तस्मै स होवाचाति प्रश्न० ३.२ ता आप ऐक्षन्त छान्दो० ६.२.४ तस्य क्व मूलं ... खलु छान्दो० ६.८.४ ता एता देवताः ऐत० १.२.१ तस्य क्व मूल.... सोम्य छान्दो० ६.८.६ तानि वा एतानि यजूंषि छान्दो० ३.२.२ तस्य प्रथमया विष्णो- मुद्ग० १.२ तानि वा एतानि सामान्येत छान्दो० ३.३.२ तस्य प्राची दिक्प्राच्यः बृह० ४.२.४ तानि ह वा एतानि छान्दो० ७.४.२ तस्य प्राची दिग्जुहूर्नाम छान्दो० ३.१५.२ तानि ह वा एतानि चित्तं छान्दो० ७.५.२ तस्य यथा कप्यासम् छान्दो० १.६.७ तानि ह वा एतानि त्रीणि छान्दो० ८.३.५ तस्य यथाभिनहनम् छान्दो० ६.१४.२ तानु तत्र मृत्युरथा छान्दो० १.४.३ तस्य ये प्राञ्चो रश्मयस्ता छान्दो० ३.१.२ तान्यभ्यतपत्तेभ्यः छान्दो० २.२३.३ तस्यर्क् च साम छान्दो० १.६.८ तान्वरिष्ठः प्राण प्रश्न० २.३ तस्य वा एतस्य पुरुषस्य बृह० ४.३.९ तान्ह स ऋषिरुवाच प्रश्न० १.२ तस्य .... सुवर्णं वेद बृह० १.३.२६ तान् हैतैः श्लोकैः बृह० ३.९.२८ तस्य सौम्य यो गाय० १.३ तान्होवाच प्रातर्वः छान्दो० ५.११.७ तस्य .... स्वं वेद बृह० १.३.२५ तान् होवाच ब्राह्मणा बृह० ३.१.२ तस्य ह वा एतस्य छान्दो० ३.१३.१ तान्होवाचाश्वपतिर्वै छान्दो० ५.११.४ तस्य ह वा एतस्यात्मनो छान्दो० ५.१८.२ तान्होवाचैहैव छान्दो० १.१२.३ तस्य ह वा एतस्यैवम् छान्दो० ७.२६.१ तान्होवाचैतावत् प्रश्न० ६.७ तस्य हैतस्य पुरुषस्य बृह० २.३.६ तान्होवाचैते वै खलु छान्दो० ५.१८.१ तस्य हैतस्य साम्नो यः बृह० १.३.२७ तापत्रयं त्वाध्यात्मिक. मुद्ग० ४.२ तस्या उपस्थानं गायत्र्य बृह० ५.१४.७ ताभ्यः पुरुषमानयत्ता ऐत० १.२.३ तस्या वेदिरुपस्थो बृह० ६.४.३ ताभ्यो गामानयत्ता ऐतरेय० १.२.२ तस्या ह मुखमुपोद्गृह्णन् छान्दो० ४.२.५ तावदेव निरोद्धव्यं मैत्रा० ४.४ (ज)
मन्त्रानुक्रमणिका ५००
| मन्त्र प्रतीक | उपनिषद् विवरण | मन्त्र प्रतीक | उपनिषद् विवरण |
|---|---|---|---|
| तालमात्रविनिष्कम्पो | अमृ० २४ | ते होचुर्भगवन्यद्येवम् | मैत्रा० ३.१ |
| तावद्रथेन गन्तव्यम् | अमृ० ३ | ते होचुर्येन हैवाथैन | छान्दो० ५.११.६ |
| ता वा अस्यैता हितो | बृह० ४.३.२० | तौ वा एतौ द्वौ | छान्दो० ४.३.४ |
| तावानस्य महिमा | छान्दो० ३.१२.६ | तौहद्वात्रिंशतं वर्षाणि | छान्दो० ८.७.३ |
| तासां त्रिवृतं त्रिवृतमेकैकाम्.. | छान्दो० ६.३.३ | तौ ह प्रजापतिरुवाच | छान्दो० ८.७.४ |
| तासां त्रिवृतं त्रिवृतमेकैकां नु | छान्दो० ६.३.४ | तौ ह प्रजापतिरुवाच साध्वलङ्कृतौ | छान्दो० ८.८.२ |
| तिर्यगूर्ध्वमधोदृष्टिं | अमृ० २३ | तौ हान्वीक्ष्य प्रजापतिः | छान्दो० ८.८.४ |
| तिलेषु तैलम् | श्वेता० १.१५ | तौ होचतुर्यथैवेद० | छान्दो० ८.८.३ |
| तिस्रो मात्रा मृत्युमत्यः | प्रश्न० ५.६ | त्रयं वा इदं नाम रूपम् | बृह० १.६.१ |
| तिस्रो रात्रीर्यदवात्सीर्गृहे | कठ० १.१.९ | त्रयः प्राजापत्याः | बृह० ५.२.१ |
| तेऽग्निमब्रुवञ्जातवेद | केन० ३.३ | त्रयी विद्या हिङ्कारस्त्रयः | छान्दो० २.२१.१ |
| तेजसः सोम्याश्यमानस्य | छान्दो० ६.६.४ | त्रयो धर्मस्कन्धा यज्ञः | छान्दो० २.२३.१ |
| तेजो वावादित्ये भूयः | छान्दो० ७.११.१ | त्रयो लोका एत एव | बृह० १.५.४ |
| तेजोऽशितं त्रेधा विधीयते | छान्दो० ६.५.३ | त्रयो वेदा एत एव | बृह० १.५.५ |
| तेजो ह वाव उदानः | प्रश्न० ३.९ | त्रयो होद्गीथे | छान्दो० १.८.१ |
| ते तमर्चयन्तस्त्वं | प्रश्न० ६.८ | त्रिणाचिकेत | कठ० १.१.१७ |
| ते देवा अब्रुवन्नेतावद्वा | बृह० १.३.१८ | त्रिणाचिकेतस्त्रयमेतद्वि | कठ० १.१.१८ |
| ते ध्यानयोगानुगता | श्वेता० १.३ | त्रिरुन्नतं स्थाप्य | श्वेता० २.८ |
| तेन तꣳह बको | छान्दो० १.२.१३ | त्रिंशत्सार्धाङ्गुलः | अमृ० ३३ |
| तेन तꣳ ह बृहस्पति | छान्दो० १.२.११ | त्रीण्यात्मनेऽकुरुतेति | बृह० १.५.३ |
| तेन तꣳहायास्य | छान्दो० १.२.१२ | त्वावै ग्रहः | बृह० ३.२.९ |
| तेन हवा एवं विदुषा | गाय० ७.१ | त्वङ्मांसशोणिता. | मुद्ग० ४.३ |
| तेनेयं त्रयी विद्या | छान्दो० १.१.९ | त्वं पद महामन्त्रस्य | शु०२० २५ |
| तेनोभौ कुरुतो यश्चैत | छान्दो० १.१.१० | त्वं पदार्थादौपाधि० | सर्व० १४ |
| तेभ्यो ह प्रातेभ्यः | छान्दो० ५.११.५ | त्वं भूर्भुवः स्वस्त्वम् | एका० १३ |
| ते य एवमेतद्विदुर्यं | बृह० ६.२.१५ | त्वमिति तदिति | शु०२० ४१ |
| ते यथा तन्न विवेकम् | छान्दो० ६.९.२ | त्वं मनुष्यवं | मैत्रा० ४.४ (ङ) |
| ते वा एते गुह्या | छान्दो० ३.५.२ | त्वं वज्रभृद्भूत. | एका० ५ |
| ते वा एतेऽथर्वाङ्गिरस | छान्दो० ३.४.२ | त्वं स्त्री त्वं पुमानसि | श्वेता० ४.३ |
| ते वा एते पञ्च | छान्दो० ३.१३.६ | त्वं स्त्री पुमांस्त्वं | एका० ११ |
| ते वा एते रसानाꣳरसा | छान्दो० ३.५.४ | दध्नः सोम्य मध्यमानस्य | छान्दो० ६.६.१ |
| तेषां खल्वेषां भूतानाम् | छान्दो० ६.३.१ | दिवश्चैनमादित्याच्च | बृह० १.५.१९ |
| तेषामसौ विरजो | प्रश्न० १.१६ | दिव्यो ह्यमूर्तः | मुण्ड० २.१.२ |
| ते ह खल्वथोर्ध्वरेतसो | मैत्रा० ४.१ | दुःखमिति......स्वर्गः | निरा० १६ |
| ते ह नासिक्यं | छान्दो० १.२.२ | दुग्धेऽस्मै.....एतदेवम् | छान्दो० २.८.३ |
| ते ह प्राणाः प्रजापतिम् | छान्दो० ५.१.७ | दुग्धेऽस्मै.... एतामेव | छान्दो० १.१३.४ |
| ते ह यथैवेदं | छान्दो० १.१२.४ | दूरमेते विपरीते | कठ० १.२.४ |
| ते ह वाचमूचुस्त्वं न | बृह० १.३.२ | दृप्त बालाकिर्हानूचानो | बृह० २.१.१ |
| ते ह सम्पादयाञ्चक्रुः | छान्दो० ५.११.२ | दृश्यमानस्य सर्वस्य | शु०२० ३८ |
| ते हेमे प्राणा अहꣳश्रेयसे | बृह० ६.१.७ | दृष्टिः स्थिरा यस्य | ना०बि० ५६ |
| ते होचुः क्नु सोऽभूद्यो | बृह० १.३.८ | देवपितृकार्याभ्यां | तैत्ति० १.११.२ |
| ते होचुरुपकोसलेषा | छान्दो० ४.१४.१ | देवमनुष्य.....बन्धः | निरा० २२ |
५०१ मन्त्रानुक्रमणिका मन्त्र प्रतीक उपनिषद् विवरण मन्त्र प्रतीक उपनिषद् विवरण देवनामसि प्रश्नो० २.८ न नरेणावरेण कठ० १.२.८ देवर्षयो ब्रह्माणं शु०र० २ न निजं निजवत् स्क० २ देवाः पितरो मनुष्या बृह० १.५.६ न प्राणेन कठ० २.२.५ देवा वै मृत्योर्बिभ्य्... छान्दो० १.४.२ न भिद्यते कर्मचारैः ना० बि० ६ देवासुरा ह वै छान्दो० १.२.१ नमः शिवाय गुरवे निरा० १ देवैरत्रापि...किल कठ० १.१.२२ नमः शान्तात्मने मैत्रा० ४.४ (ण) देवैरत्रापि... पुरा कठ० १.१.२१ न मान नावमानं ना०बि० ५४ देहादीनामसत्त्वात्तु ना० बि० २३ नरक इति .......एव नरकः निरा० १७ देहो देवालयः स्क० १० नवद्वारे पुरे देही श्वेता० ३.१८ द्यौरवगादित्यः छान्दो० १.६.३ न वधेनास्य... मध. छान्दो० ८.१०.४ द्यौरेवोदन्तरिक्षं छान्दो० १.३.७ न वधेनास्य हन्यते छान्दो० ८.१०.२ द्वया ह प्राजापत्या बृह० १.३.१ नवमी महती ना०बि० ११ द्वा सुपर्णा सयुजा श्वेता० ४.६ नवम्यां तु महर्लोकम् ना०बि० १६ द्वा सुपर्णा सयुजा मुण्ड० ३.१.१ न वित्तेन तर्पणीयो कठ० १.१.२७ द्वितीयायां समुत्क्रान्तो ना०बि० १३ न वै तत्र न निम्लोच छान्दो० ३.११.२ द्विधा वा एष आत्मानम् मैत्रा० ५.१ न वै नूनं भगवन्तस्त छान्दो० ६.१.७ द्विसप्ततिसहस्त्राणि प्रण० ११ न वै वाचो न चक्षू छान्दो० ५.१.१५ द्वे अक्षरे ब्रह्मपरे श्वेता० ५.१ न संदृशे कठ० २.३.९ द्वे वाव ब्रह्मणो रूपे मैत्रा० ५.३ न संदृशे तिष्ठति श्वेता० ४.२० द्वे वाव ब्रह्मणो रूपे बृह० २.३.१ न सांपरायः प्रतिभाति कठ० १.२.६ द्वौ खण्डावुच्येते योऽयमुक्तः मुद्ग० २.२ न स्विदेतेऽप्युच्छिष्टा छान्दो० १.१०.४ धनुर्गृहीत्वौपनिषदं मुण्ड० २.२.३ न हवा अस्मा छान्दो० ३.११.३ धाता विधाता पवनः एका० ६ न हाप्सु प्रैत्यप्सुमान् छान्दो० २.४.२ धियो योनः गाय० ६.१ नाचिकेतमुपाख्यानं कठ० १.३.१६ ध्यानक्रियाभ्याम् मन्त्रि० ७ नान्तः प्रज्ञं न. माण्डू० ७ ध्यानं वाव चित्ताद्भूयो छान्दो० ७.६.१ नान्यस्मै कस्मैचन छान्दो० ३.११.६ ध्यानं-जीवत्वं सर्वभूतानां शु०र० २६ नाम वा ऋग्वेदो छान्दो० ७.१.४ ध्यानं- जीवो ब्रह्मैति शु०र० २८ नायमात्मा प्रवचनेन मुण्ड० ३.२.३ ध्यानं- ज्ञानं ज्ञेयं शु०र० २४ नायमात्मा प्रवचनेन कठ० १.२.२३ ध्यानं- नित्यानन्द शु०र० २१ नायमात्मा बलहीनेन मुण्ड० ३.२.४ ध्यायतेध्यासिता मन्त्रि० ४ नाविरतो दुश्चरितान् कठ० १.२.२४ न कंचन वसतौ तैत्ति० ३.१०.१ नासिकापुटमङ्गुल्या अमृ० २० नक्षत्राण्येवर्कूचन्द्रमाः छान्दो० १.६.४ नाहं कर्ता नैव भोक्ता सर्व० १८ न चक्षुषा गृह्यते मुण्ड० ३.१.८ नाहं देहो जन्ममृत्यू सर्व० २१ न जायते म्रियते कठ० १.२.१८ नाहं भवाम्यहं सर्व० १६ न तत्र चक्षुर्गच्छति केन० १.३ नाहं मन्ये सुवेदेति केन० २.२ न तत्र रथा न रथयोगा बृह० ४.३.१० नित्योऽनित्यानां कठ० २.२.१३ न तत्र सूर्यो कठ० २.२.१५ नित्यो नित्यानाम् श्वेता० ६.१३ न तत्र सूर्यो भाति मुण्ड० २.२.१० निधनमिति त्र्यक्षरम् छान्दो० २.१०.४ न तत्र सूर्यो भाति श्वेता० ६.१४ नियामनसमर्थोऽयम् ना०बि ४५ न तस्य कश्चित्पतिरस्ति श्वेता० ६.९ निरञ्जने विलीयेते ना०बि० ५० न तस्य कार्यं करणम् श्वेता० ६.८ निर्णिज्य क१ सं चमसं छान्दो० ५.२.८
मन्त्रानुक्रमणिका ५०२ मन्त्र प्रतीक | उपनिषद् विवरण | मन्त्र प्रतीक | उपनिषद् विवरण निःशब्दं तत्परम् | नाबि० ४८ | पुरस्ताद् ब्रह्मणस्तस्य | प्रण० १ निष्कलं निष्क्रियं | श्वेता० ६.१९ | पुरा तृतीय सवनस्य | छान्दो० २.२४.११ नीलः पतङ्गो हरितो | श्वेता० ४.४ | पुरा प्रातरनुवाकस्योपा. | छान्दो० २.२४.३ नीहार धूमार्कानिलानलानाम् | श्वेता० २.११ | पुरा माध्यन्दिनस्य | छान्दो० २.२४.७ नैनमूर्ध्वम् | श्वेता० ४.१९ | पुरुष एवेदं विश्वं | मुण्ड० २.१.१० नैव वाचा न | कठ० २.३.१२ | पुरुष एवेदꣳ सर्वम् | श्वेता० ३.१५ नैव स्त्री न पुमानेष | श्वेता० ५.१० | पुरुषसूक्तार्थनिर्णयम् | मुद्ग० १.१ नैवेह किंचनाग्र आसीत् | बृह० १.२.१ | पुरुषः सोम्योत | छान्दो० ६.१६.१ नैवैतेन सुरभि | छान्दो० १.२.९ | पुरुषःसोम्योतोपतापिन्म् | छान्दो० ६.१५.१ नैषा तर्केण | कठ० १.२.९ | पुरुषे ह वा अयमादितो | ऐत० २.१.१ नो इतराणि ये के | तैत्ति० १.११.३ | पुरुषो नारायणो भूतम् | मुद्ग० २.३ नोच्छ्वसेन्न | अमृ० १४ | पुरुषो वा अग्निर्गौतम- | बृह० ६.२.१२ न्यग्रोधफलमत आहरेतीदम् | छान्दो० ६.१२.१ | पुरुषो वाव गौतमाग्निः | छान्दो० ५.७.१ पञ्च पादं पितरं | प्रश्न० १.११ | पुरुषो वाव यज्ञः | छान्दो० ३.१६.१ पञ्च मा राजन्य बन्धुः | छान्दो० ५.३.५ | पूर्णमदः पूर्णमिदम् | बृह० ५.१.१ पञ्चमी नामधेया | ना०बि० १० | पूषन्नेकर्षे यम | ईश० १६ पञ्चम्यामथ मात्रायां | ना०बि० १४ | पृथिवी च पृथिवीमात्रा | प्रश्न० ४.८ पञ्चस्रोतोऽम्बुम् | श्वेता० १.५ | पृथिवी वाव गौतमाग्निः | छान्दो० ५.६.१ पद्मकं स्वस्तिकम् | अपृ० १९ | पृथिवी हिङ्कारोऽन्तरिक्षम् | छान्दो० २.१७.१ पद्मसूत्रनिभा | प्रण० १० | पृथिव्यन्तरिक्षं द्यौः | तैत्ति० १.७.१ परब्रह्मपयोराशौ | शु०२० ५० | पृथिव्यर्चं समदधात् | गाय० ४.३ परमं पदमिति... पदम् | निरा० ३६ | पृथिव्येव यस्यायतन | बृह० ३.९.१० परमात्मेति च ...स सूर्यः | निरा० ७ | पृथिव्यै चैनमग्नेश्च | बृह० १.५.१८ परमेवाक्षरं प्रतिपद्यते | प्रश्न० ४.१० | पृथ्व्याप्यतेजोऽनिलखे | श्वेता० २.१२ पराचः कामाननुयन्ति | कठ० २.१.२ | प्रकृतिरिति च.....प्रकृतिः | निरा० ६ पराञ्चि खानि | कठ० २.१.१ | प्रजापतिर्लोकानभ्यतपत् | छान्दो० २.२३.२ परिपूर्णः परात्मास्मिन्देहे | शु०२० ३३ | प्रजापतिर्लोकानभ्यतपत्तेषाम् | छान्दो० ४.१७.१ परीक्ष्य लोकान् | मुण्ड० १.२.१२ | प्रजापतिर्वा एषोऽग्रे | मैत्रा० २.६ परोवरीयो हास्य भवति | छान्दो० २.७.२ | प्रजापतिर्विराट् | मन्त्रि० १३ पर्जन्यो वा अग्निर्गौतम | बृह० ६.२.१० | प्रजापतिश्वरसि | प्रश्न० २.७ पर्जन्यो वाव गौतमाग्नि० | छान्दो० ५.५.१ | प्रणवो धनुः शरो | मुण्ड० २.२.४ पशुषु पञ्चविधं | छान्दो० २.६.१ | प्रतिबोधविदितं | केन० २.४ पश्चाद्व्याययीत | अमृ० २२ | प्रते ब्रवीमि | कठ० १.१.१४ पश्यन्त्यस्यां | मन्त्रि० ८ | प्रत्याहारस्तथा ध्यानम् | अमृ० ६ पादादिकं गुणास्तस्य | ना०बि० २ | प्रथमायां तु मात्रायाम् | ना०बि० १२ पायूपस्थेऽपानं चक्षुः | प्रश्न० ३.५ | प्रवृत्तोऽश्वतरीरथो | छान्दो० ५.१३.२ पार्थिवः पञ्चमात्रस्तु | अमृ० ३१ | प्रस्तोतर्या देवता | छान्दो० १.१०.९ पिता माता प्रजाैत | बृह० १.५.७ | प्लवा होते अदृढा | मुण्ड० १.२.७ पितृमातृसहोदर...बन्ध | निरा० १९ | प्राचीनशाल औपमन्यवः | छान्दो० ५.११.१ पिबन्त्येनाम | मन्त्रि० ६ | प्राण आद्यो हृदि | अमृ० ३५ पीतोदका जग्धतृणा | कठ० १.१.३ | प्राण इति होवाच | छान्दो० १.११.५ पुरमेकादशद्वारम् | कठ० २.२.१ | प्राण एव ब्रह्मणश्चतुर्थः | छान्दो० ३.१८.४
५०३ मन्त्रानुक्रमणिका मन्त्र प्रतीक | उपनिषद् विवरण || मन्त्र प्रतीक | उपनिषद् विवरण प्राण एव सविता | गाय० ३.१० || ब्रह्म हेदं श्रियम् | गाय० ४.१ प्राणं देवा अनु | तैत्ति० २.३.१ || ब्रह्मादिपिपीलिका पर्यन्तं | सर्व० १० प्राणः प्रसूतिर्भुवनस्य | एका० ३ || ब्रह्मा देवानां | मुण्ड० १.१.१ प्राणस्य प्राणमुत चक्षुष | बृह० ४.४.१८ || ब्रह्माद्यं स्थावरान्तं | मन्त्रि० १६ प्राणस्येदं वशे सर्वं | प्रश्न० २.१३ || ब्रह्मामृतम् | स्क० १२ प्राणाग्रय एव | प्रश्न० ४.३ || ब्रह्मैव स्वशक्तिं ...बहुजीवः | निरा० ५ प्राणान् प्रपीड्येह | श्वेता० २.९ || ब्रह्मैवाहं सर्ववेदान्त | सर्व० २० प्राणायामैर्दहेद्दोष | अमृ० ८ || ब्रह्मैवेदममृतं | मुण्ड० २.२.११ प्राणे तृप्यति चक्षुस्तृप्यति | छान्दो० ५.१९.२ || ब्रह्मोपदेश कालोऽयमिदानीं | शु०र० ५ प्राणेन रक्षन्नवरं कुलायम् | बृह० ४.३.१२ || भगव इति ह प्रतिशश्राव | छान्दो० ४.१४.२ प्राणेषु पञ्चविधं परोवरीयः | छान्दो० २.७.१ || भगवन्नस्थिचर्मस्नायु० | मैत्रा० १.२ प्राणोऽपानो व्यान | बृह० ५.१४.३ || भगवांस्त्वेव मे | छान्दो० १.११.३ प्राणो ब्रह्म कं | छान्दो० ४.१०.५ || भयं क्रोधमथालस्य० | अमृत० २८ प्राणो ब्रह्मेति | तैत्ति० ३.३.१ || भयादस्याग्निस्तपति | कठ० २.३.३ प्राणो वा आशाया | छान्दो० ७.१५.१ || भर्गो देवस्य धीमहीति | गाय० ५.१ प्राणो वै ग्रहः | बृह० ३.२.२ || भवन्ति हास्य पशवः | छान्दो० २.६.२ प्राणो होवैतानि सर्वाणि | छान्दो० ७.१५.४ || भवत्याविच्छिन्नो... तृतीयं | गा० ६.२ प्राणो ह्येष यः | मुण्ड० ३.१.४ || भवत्याविच्छिन्नो.... द्वितीय | गा० ५.२ प्राप हायार्चकुलं | छान्दो० ४.९.१ || भवत्याविच्छिन्नोऽस्य | गा० ४.४ प्रियात्म जननवर्धन० | मुद्र० ४.६ || भानुमण्डलसंकाशा | ना० बि० ७ बद्धः सुनादगन्धेन | ना०बि०४३ || भावग्राह्यमनी० | श्वेता० ५.१४ बन्ध इति च.....बन्धः | निरा० १८ || भिद्यते हृदयग्रन्थि..... | मुण्ड० २.२.८ बलं वाव विज्ञानाद्भूयोपि | छान्दो० ७.८.१ || भीषाऽस्माद्वातः | तैत्ति० २.८.१ बहूनामेमि प्रथमो | कठ० १.१.५ || भूतसंमोहने काले | मन्त्रि० २ बृहच्च तद् | मुण्ड० ३.१.७ || भूमिरन्तरिक्षम् | बृह० ५.१४.१ बृहद्रथो ह वै नाम | मैत्रा० १.१ || भूमौ दर्भासने रम्ये | अमृ० १८ ब्रह्मणश्च ते पादं ब्रवाणीति | छान्दो० ४.५.२ || भूर्भुवः सुवरिति वा | तैत्ति० १.५.१ ब्रह्मणः सोम्य ते पादम् | छान्दो० ४.६.३ || भूर्लोकः पादयोस्तस्य | ना०बि० ३ ब्राह्मणः सोम्य...चाग्निः | छान्दो० ४.७.३ || भृगुर्वे वारुणिः।वरुणं | तैत्ति० ३.१.१ ब्राह्मणः सोम्य...प्राणः | छान्दो० ४.८.३ || भृगुस्तस्मै यतो | तैत्ति० ३.११.१ ब्रह्माणाऽकाशमभिपन्नम् | गाय० ७.२ || मकरन्दं पिबन्भृङ्गो | ना०बि० ४२ ब्रह्म तं परादाद्यो० | बृह० ४.५.७ || मकारश्चाग्निसंकाशो | प्रण० ८ ब्रह्म तं ....भूतानि | बृह० २.४.६ || मघवन्मर्त्यं वा इदं | छान्दो० ८.१२.१ ब्रह्म प्रणव संधानं नादो | ना०बि० ३० || मटचीहतेषु कुरुष्वाटिक्या | छान्दो० १.१०.१ ब्रह्म ब्रह्मेत्यथायन्ति | मन्त्रि० २० || मद्गृहे पादं वक्तेति | छान्दो० ४.८.१ ब्रह्म वा इदमग्र आसीत् | बृह० १.४.१० || मन आदि चतुर्दश करणैः | सर्व० ४ ब्रह्म वा इदमग्र आसीदेकमेव | बृह० १.४.११ || मन आदिश्च | सर्व० ७ ब्रह्मवादिनो वदन्ति | छान्दो० २.२४.१ || मन एव मनुष्याणां | मैत्रा० ४.४ (ट) ब्रह्मवादिनो वदन्ति | श्वेता० १.१ || मन एव सविता | गाय० ३.१ ब्रह्मविदाप्नोति | तैत्ति० २.१.१ || मनः सङ्कल्पकं | अमृ० १६ ब्रह्मविदिव वै सोम्य | छान्दो० ४.९.२ || मनसैवानुद्रष्टव्यम् | बृह० ४.४.१९ ब्रह्म ह देवेभ्यो | केन० ३.१ || मनसैवेदमाप्तव्यं | कठ० २. . १
मन्त्रानुक्रमणिका ५०४ मन्त्र प्रतीक उपनिषद् विवरण मन्त्र प्रतीक उपनिषद् विवरण मनस्तत्र लयं ना०बि० ४७ य एको जालवानीशत श्वेता० ३.१ मनो ब्रह्मेति तैत्ति० ३.४.१ य एकोऽवर्णो बहुधा श्वेता० ४.१ मनो ब्रह्मेत्युपासीत छान्दो० ३.१८.१ य एतदुपनिषदम् मुद्ग० ४.१० मनोमयः प्राणशरीरो छान्दो० ३.१४.२ य एते ब्रह्मलोके छान्दो० ८.१२.६ मनोमयोऽयं पुरुषो बृह० ५.६.१ य एवं विद्वान् प्रश्न० ३.११ मनोवाव वाचो भूयो छान्दो० ७.३.१ य एवं वेद क्षेम तैत्ति० ३.१०.२ मनो वै ग्रहः बृह० ३.२.७ य एष एतस्मिन्मण्डले बृह० ५.५.३ मनो हिङ्कारो वाक् छान्दो० २.११.१ य एष सुप्तेषु कठ० २.२.८ मनो हि द्विविधं मैत्रा० ४.४ (च) य एष स्वप्ने छान्दो० ८.१०.१ मनो होच्चक्राम बृह० ६.१.११ य एषोऽक्षिणि पुरुषो छान्दो० ४.१५.१ मनो होच्चक्राम छान्दो० ५.१.११ यच्चक्षुषा न पश्यति केन० १.६ मन्त्रोपनिषदं ब्रह्म मन्त्रि० १० यच्चन्द्रमसो रोहित छान्दो० ६.४.३ मह इति ब्रह्म तैत्ति० १.५.३ यच्च स्वभावं पचति श्वेता० ५.५ मह इत्यादित्यः । आदित्येन तैत्ति० १.५.२ यच्चित्तस्तेनैष प्रश्न० ३.१० महतः परमव्यक्तम् कठ० १.३.११ यच्छेद्वाङ्मनसी कठ० १.३.१३ महति श्रूयमाणे ना०बि० ३६ यच्छ्रोत्रेण केन० १.७ महान्प्रभुर्वे पुरुषः श्वेता० ३.१२ यजुः प्राणो वै यजुः प्राणे बृह० ५.१३.२ महापुरुष आत्मानम् मुद्ग० २.४ यजुर्वेदोऽन्तरिक्षम् प्रण० ५ महावाक्यान्य० शु०२० ४५ यज्जाग्रतो दूरमुदैति शिव० १ मात्रातिलिङ्गपदम् अमृ० ४ यज्ञ एव सविता गाय० ३.१२ मानवो ब्रह्मैवैक छान्दो० ४.१७.१० यज्ञेनेत्युपसंहारः मुद्ग० १.९ मा नस्तोके तनये श्वेता० ४.२२ यतश्चोदेति कठ० २.१.९ मायां तु प्रकृतिम् श्वेता० ४.१० यतो वाचो...कदाचनेति तैत्ति० २.४.१ माया नाम अनादिरन्तवती सर्व० १५ यतो वाचो...कुतश्चनेति तैत्ति० २.९.१ मासेभ्यः पितृलोकम् छान्दो० ५.१०.४ यत्किञ्च विजिज्ञास्यम् बृह० १.५.९ मासेभ्यः संवत्सर छान्दो० ५.१०.२ यत्किञ्चाविज्ञातं प्राणस्य बृह० १.५.१० मासो वै प्रजापतिः प्रश्न० १.१२ यत्तदद्रेश्यमग्राहम.. मुण्ड० १.१.६ मित्रः सुपर्णश्चन्द्र एका० १२ यत्तु जन्मान्तराभावात् ना०बि० २४ मूढ इति च .....मूढः निरा० ३३ यत्ते कश्चिदब्रवीत् बृह० ४.१.२ मृतवत्तिष्ठते योगी ना०बि० ५२ यत्पुरुषेणेत्यनया मुद्ग० १.६ मृत्योप्रोक्तां कठ० २.३.१८ यत्प्रज्ञानमुत चेतो शिव० ३ मैत्रेयीति होवाच....उद्या० बृह० २.४.१ यत्प्राणेन केन० १.८ मैत्रेयीति हे वाच....प्रव्रजिष्यन्वा बृह० ४.५.२ यत्र कुत्रापि वा ना०बि० ३८ मोक्ष इति च......मोक्षः निरा० २९ यत्र नान्यत्पश्यति छान्दो० ७.२४.१ यं यं लोकं मुण्ड० ३.१.१० यत्र वान्यदिव बृह० ४.३.३१ यं यमन्तमभिकामो छान्दो० ८.२.१० यत्र सुप्तो न कंचन माण्डू० ५ य आकाशे तिष्ठन् बृह० ३.७.१२ यत्र हि द्वैतमिव..जिघ्रति बृह० २.४.१४ य आत्माऽ पहतमाप्मा छान्दो० ८.७.१ यत्र हि द्वैतमिव..पश्यति बृह० ४.५.१५ य आदित्ये तिष्ठन् बृह० ३.७.९ यत्रैतदस्मिञ्छरीरे छान्दो० ३.१३.८ य इमं परमं कठ० १.३.१७ यत्सप्तान्नानि..पितेति बृह० १.५.२ य इमं मध्वदं कठ० २.१.५ यत्सप्तान्नानि मेधया बृह० १.५.१ य इमं सृष्टियज्ञम् मुद्ग० २.७
५०५ मन्त्रानुक्रमणिका मन्त्र प्रतीक | उपनिषद् विवरण | मन्त्र प्रतीक | उपनिषद् विवरण यथा कृतायविजिता० | छान्दो० ४.१.४ | यदि मन्यसे | केन० २.१ यथा कृताय.... सयन्ति | छान्दो० ४.१.६ | यदृच्छवा सनिः | प्रश्न० ४.४ यथादर्शे तथात्मनि | कठ० २.३.५ | यदुदिति स उद्गीथो | छान्दो० २.८.२ यथा नद्यः स्यन्दमानाः | मुण्ड० ३.२.८ | यदु रोहितमिवाभूदिति | छान्दो० ६.४.६ यथान्तरं न भेदाः | स्क० १० | यदेतद्धृदयं | ऐत०३.१.२ यथा पर्वतधातूनाम् | अमृ० ७ | यदेव ते कश्चिद्रब्रवीत्तच्छृण | बृह० ४.१.३ यथा पुरस्ताद्भविता | कठ० १.१.११ | यदेव ते......गर्दभीविपीतो | बृह० ४.१.५ यथा विलीनमेवाङ्गास्या | छान्दो० ६.१३.२ | यदेव ते..... बर्कुर्वाष्णो० | बृह० ४.१.४ यथा शिवमयो | स्क० ९ | यदेव ते..... विदग्धः | बृह० ४.१.७ यथा सम्राडेवाधि... | प्रश्न० ३.४ | यदेव ते.....सत्यकामो | बृह० ४.१.६ यथा सोम्य पुरुषं गन्धा | छान्दो० ६.१४.१ | यदेवेह तदमुत्र | कठ० २.१.१० यथा सोम्य मधु | छान्दो० ६.९.१ | यदैतमनुपश्यत्यात्मानम् | बृह० ४.४.१५ यथासोम्यैकेन नखनिकृन्तनेन | छान्दो० ६.१.६ | यद्वाचानभ्युदितं | केन० १.४ यथा सोम्यैकेन मृत्पिण्डेन | छान्दो० ६.१.४ | यद्विज्ञातमिवाभूदित्० | छान्दो० ६.४.७ यथा सोम्यैकेन लोहमणिना | छान्दो० ६.१.५ | यद्विद्युतो रोहित | छान्दो० ६.४.४ यथेह क्षुधिता | छान्दो० ५.२४.५ | यद्वै तत्पुरुषे | छान्दो० ३.१२.४ यथैव बिम्बं मृदयो० | श्वेता० २.१४ | यद्वै तद्ब्रह्मेतीदम् | छान्दो० ३.१२.७ यथोदकं दुर्गे | कठ० २.१.१४ | यद्वै तन्न जिघ्रति जिघ्रन्वौ | बृह० ४.३.२४ यथोदकं शुद्धे | कठ० २.१.१५ | यद्वै तन्न पश्यति पश्यन्वौ | बृह० ४.३.२३ यथोर्णनाभिः सृजते | मुण्ड० १.१.७ | यद्वै तन्न मनुते | बृह० ४.३.२८ यदग्ने रोहितः | छान्दो० ६.४.१ | यद्वै तन्न रसयते | बृह० ४.३.२५ यदर्चिमद्गणुभ्योऽणु | मुण्ड० २.२.२ | यद्वै तन्न वदति | बृह० ४.३.२६ यदा चर्मवदाकाशम् | श्वेता० ६.२० | यद्वै तन्न विजानाति | बृह० ४.३.३० यदाऽतमस्तन्न दिवा | श्वेता० ४.१८ | यद्वै तन्न शृणोति | बृह० ४.३.२७ यदात्मतत्त्वेन | श्वेता० २.१५ | यद्वै तन्न स्पृशति | बृह० ४.३.२९ यदा त्वमभिवर्षस्यथेमा | प्रश्न० २.१० | यन्नु खलु सौम्यासमाभिः | गाय० १.५ यदादित्यस्य रोहितः | छान्दो० ६.४.२ | यन्मनसा न मनुते | केन० १.५ यदाप उच्छुष्यन्ति | छान्दो० ४.३.२ | यः पुनरेतं त्रिमात्रे | प्रश्न० ५.५ यदा पञ्चावतिष्ठन्ते | कठ० २.३.१० | यः पूर्वं तपसो | कठ० २.१.६ यदा पश्यः पश्यन्ते | मुण्ड० ३.१.३ | यः पृथिव्यां तिष्ठन् | बृह० ३.७.३ यदा लेलायते | मुण्ड० १.२.२ | यः प्राणे तिष्ठन् | बृह० ३.७.१६ यदा वा ऋचमाप्नोत् | छान्दो० १.४.४ | यमाद्यष्टाङ्गयोग...बन्धः | निरा० २३ यदा वै करोत्यथ | छान्दो० ७.२१.१ | यश इति पशुषु | तैत्ति० ३.१०.३ यदा वै निस्तिष्ठत्यथ | छान्दो० ७.२०.१ | यशो जनेऽसानि | तैत्ति० १.४.३ यदा वै पुरुषो० | बृह० ५.१०.१ | यश्चक्षुषि तिष्ठन् | बृह० ३.७.१८ यदा वै मनुतेऽथ | छान्दो० ७.१८.१ | यश्चन्द्रतारके | बृह० ३.७.११ यदा वै विजानात्यथ | छान्दो० ७.१७.१ | यश्छन्दसामृषभो | तैत्ति० १.४.१ यदा वै श्रद्दधात्यथ | छान्दो० ७.१९.१ | यः श्रोत्रे तिष्ठ० | बृह० ३.७.१९ यदा वै सुखम् | छान्दो० ७.२२.१ | यः सर्वज्ञः सर्वविद्यस्य | मुण्ड० १.१.९ यदा सर्वे प्रभिद्यन्ते | कठ० २.३.१५ | यः सर्वज्ञः सर्वविद्यस्यैष | मुण्ड० २.२.७ यदा सर्वे प्रमुच्यन्ते | कठ० २.३.१४ | यः सर्वेषु भूतेषु | बृह० ३.७.१५ यदिदं किञ्च | कठ० २.३.२ | यः सेतरीज्ञानानामक्षरं | ० १.३.२
मन्त्रानुक्रमणिका ५०८
| मन्त्र प्रतीक | उपनिषद् विवरण | मन्त्र प्रतीक | उपनिषद् विवरण |
|---|---|---|---|
| यस्तद्वेद स वेद | छान्दो० २.२१.४ | याज्ञवल्क्येति... सर्वमहोरात्राभ्यां | बृह० ३.१.४ |
| यस्तमसि तिष्ठन् | बृह० ३.७.१३ | याज्ञवल्क्येति होवाच कतिभिः | बृह० ३.१.९ |
| यस्तु विज्ञानयुक्तेन | कठ० १.३.६ | याज्ञवल्क्येति होवाच शाकल्यो | बृह० ३.९.१९ |
| यस्तु विज्ञानवान् भवति | कठ० १.३.८ | या तदभिमानम् | सर्व० ३ |
| यस्तु सर्वाणि | ईश० ६ | या ते तन्वार्वाचि | प्रश्न० २.१२ |
| यस्तूर्णनाभ इव | श्वेता० ६.१० | या ते रुद्र शिवा तनू० | श्वेता० ३.५ |
| यस्तेजसि तिष्ठन् | बृह० ३.७.१४ | यां दिशमभिष्ठोष्य.. | छान्दो० १.३.११ |
| यस्त्वचि तिष्ठन् | बृह० ३.७.२१ | या प्राणेन | कठ० २.१.७ |
| यस्त्वविज्ञान...म | कठ० १.३.७ | यामिषुं गिरिशंत | श्वेता० ३.६ |
| यस्त्वविज्ञान...युक्तेन | कठ० १.३.५ | या वाक्सर्क्सस्माद.... | छान्दो० १.३.४ |
| यस्मात्परम् | श्वेता० ३.९ | यावान्वा अयमाकाशस्ता | छान्दो० ८.१.३ |
| यस्मादर्वाक्संवत्सरो | बृह० ४.४.१६ | या वै सा गायत्रीयम् | छान्दो० ३.१२.२ |
| यस्मिंस्त्वयि किं | केन० ३.५ | या वै सा पृथिवीयम् | छान्दो० ३.१२.३ |
| यस्मिन्द्यौः पृथिवी | मुण्ड० २.२.५ | युक्तेन मनसा वयम् | श्वेता० २.२ |
| यस्मिन्न्रिदं | कठ० १.१.२९ | युक्त्वाय मनसा | श्वेता० २.३ |
| यस्मिन्नृच : साम | शिव० ५ | युञ्जानः प्रथमम् | श्वेता० २.१ |
| यस्मिन्पञ्च पञ्चजना | बृह० ४.४.१७ | युञ्जते मन उत | श्वेता० २.४ |
| यस्मिन्भावाः | मन्त्रि० १८ | युजे वां ब्रह्मपूर्व्यम् | श्वेता० २.५ |
| यस्मिन्सर्वमिदम् | मन्त्रि० १७ | ये तत्र ब्राह्मणाः | तैत्ति० १.११.४ |
| यस्मिन्सर्वाणि | ईश० ७ | येन कर्माण्यपसो | शिव० २ |
| यस्मिन् स लीयते | प्रण० १३ | येन च्छन्दसा | छान्दो० १.३.१० |
| यस्य देवे परा | श्वेता० ६.२३ | येन रूपं रसं | कठ० २.१.३ |
| यस्य ब्रह्म | कठ० १.२.२५ | येनावृतं नित्यमिदम् | श्वेता० ६.२ |
| यस्याग्निहोत्रम...... | मुण्ड० १.२.३ | येनाश्रुतः श्रुतं | छान्दो० ६.१.३ |
| यस्यानुवित्तः प्रतिबुद्ध | बृह० ४.४.१३ | येनासौ गच्छते | अमृ० २६ |
| यस्यामतं | केन० २.३ | येनेक्षते श्रृणोतीदम् | शु०२० ३१ |
| यस्यामृचि तामृचं | छान्दो० १.३.९ | येनेदं भूतं भुवनं | शिव० ४ |
| यस्येदं मण्डलम् | अमृ० ३९ | येयं प्रेते | कठ० १.१.२० |
| यागव्रत तपोधन.....बन्धः | निरा० २६ | ये ये कामा | कठ० १.१.२५ |
| याज्ञवल्क्य किं ज्योतिरयम् | बृह० ४.३.२ | योऽग्रौ तिष्ठन् | बृह० ३.७.५ |
| याज्ञवल्क्याद्याज्ञवल्क्य | बृह० ६.५.३ | यो दिक्षु तिष्ठन् | बृह० ३.७.१० |
| याज्ञवल्क्येति....कत्ययमद्याध्वर्युः | बृह० ३.१.८ | यो दिवि तिष्ठन् | बृह० ३.७.८ |
| याज्ञवल्क्येति....द्यग्भिः | बृह० ३.१.७ | यो देवानां... जनयामास | श्वेता० ३.४ |
| याज्ञवल्क्येति..... द्योद्गाता० | बृह० ३.१.१० | यो देवानां... पश्यत | श्वेता० ४.१२ |
| याज्ञवल्क्येति... पूर्वपक्षा० | बृह० ३.१.५ | यो देवानामधिपो | श्वेता० ४.१३ |
| याज्ञवल्क्येति ....मृत्युना | बृह० ३.१.३ | यो देवोऽग्रौ योऽप्सु | श्वेता० २.१७ |
| याज्ञवल्क्येति... मृत्योरन्नम् | बृह० ३.२.१० | योनिमन्ये | कठ० २.२.७ |
| याज्ञवल्क्येति..प्रियते | बृह० ३.२.१२ | योऽन्तरिक्षे तिष्ठन् | बृह० ३.७.६ |
| याज्ञवल्क्येति... यत्रायं पुरुषो | बृह० ३.२.११ | योऽप्सु तिष्ठन् | बृह० ३.७.४ |
| याज्ञवल्क्येति... यत्रास्य | बृह० ३.२.१३ | यो ब्रह्माणं विदधाति | श्वेता० ६.१८ |
| याज्ञवल्क्येति... यदिदम् | बृह० ३.१.६ | यो मनसि तिष्ठन् | बृह० ३.७.२० |
| योऽयं दक्षिणेऽक्षन्पुरुष० | बृह० ५.५.४ |
५०७ मन्त्रानुक्रमणिका मन्त्र प्रतीक उपनिषद् विवरण मन्त्र प्रतीक उपनिषद् विवरण यो योनिं योनिमधिति० श्वेता० ४.११ लोकादिमग्निं कठ० १.१.१५ यो योनिं..विश्वानि श्वेता० ५.२ लोकेषु पञ्चविधः छान्दो० २.२.१ यो रहस्योपनिषदं० शु०र० ५३ लोम हिंकारस्त्वक् छान्दो० २.१९.१ यो रेतसि तिष्ठन् बृह० ३.७.२३ वक्त्रेणोत्पलनालेन अमृ० १३ यो वा एतदक्षरं बृह० ३.८.१० वर्णाश्रम..कथ्यः निरा० २४ यो वा एतामेवं केन० ४.९ वाग्वां हिंकारो छान्दो० २.१६.१ यो वाचि तिष्ठन् बृह० ३.७.१७ वासिष्ठाय स्वाहेत. छान्दो० ५.२.५ यो वायौ तिष्ठन् बृह० ३.७.७ वह्नेर्यथा योनिगतस्य श्वेता० १.१३ यो विज्ञाने तिष्ठन् बृह० ३.७.२२ वाक्यार्थस्य विचारोऽथ शु०र० १९ यो वेदादौ स्वरः शु०र० ४८ वागेव ब्रह्मणश्चतुर्थः छान्दो० ३.१८.३ यो वै भूमा तत्सुखम् छान्दो० ७.२३.१ वागेवर्क् प्राणः छान्दो० १.१.५ यो वै स संवत्सरः बृह० १.५.१५ वाघोञ्चक्राम बृह० ६.१.८ योषा वा अग्निर्गौतम बृह० ६.२.१३ वाग्वाव नाम्नो भूयसि छान्दो० ७.२.१ योषा वाव गौतमाग्नि० छान्दो० ५.८.१ वाग्वै ग्रहः बृह० ३.२.३ यो ह खलु वावोपस्थिः मैत्रा० २.४ वाचं धेनुमुपासीत बृह० ५.८.१ यो ह वा आयतनम् छान्दो० ५.१.५ वाच्यं लक्ष्यमिति शु०र० ४० यो ह वा आयतनं वेद० बृह० ६.१.५ वायुरनिलममृतमथेदं ईश० १७ यो ह वै ज्येष्ठम् छान्दो० ५.१.१ वायुरेव सविता गाय० ३.३ यो ह वै ज्येष्ठं च बृह० ६.१.१ वायुर्यथैको कठ० २.२.१० यो ह वै प्रजापतिं वेद बृह० ६.१.६ वायुर्वाव संवर्गो छान्दो० ४.३.१ यो ह वै प्रतिष्ठाम् छान्दो० ५.१.३ वायुः संधानम् तैत्ति० १.३.२ यो ह वै प्रतिष्ठां वेद बृह० ६.१.३ वालाग्रशतभागस्य श्वेता० ५.९ यो ह वै वसिष्ठाम् छान्दो० ५.१.२ विज्ञातं विजिज्ञास्यमस्ति० बृह० १.५.८ यो ह वै वसिष्ठां वेद बृह० ६.१.२ विज्ञानं ब्रह्मेति तैत्ति० ३.५.१ यो ह वै शिशुः साधानः बृह० २.२.१ विज्ञानं यज्ञं तनुते तैत्ति० २.५.१ यो ह वै संपदम् छान्दो० ५.१.४ विज्ञानं वावध्यानाद्भूयो छान्दो० ७.७.१ यो ह वै संपदं वेद बृह० ६.१.४ विज्ञान सारथिर्यस्तु कठ० १.३.९ रक्तांगौ मणिप्रख्यः अमृ० ३६ विज्ञानात्मा सह प्र० ४.११ रहस्योपनिषदं ब्रह्म ध्यातम् शु०र० १८ वितत्य वागम् एका० ४ रहस्योपनिषदाज्ञा शु०र० १५ विद्यां चाविद्याम् ईश० ११ रुधिरं रेचकं चैव अमृ० १० विद्युदेव संविता गाय० ३.९ रूपाण्येव ....एवासावादित्ये बृह० ३.९.१२ विद्युद्वैद्युत्याहु० बृह० ५.७.१ रूपाण्येव यस्यायतनं बृह० ३.९.१५ विद्वानिति च ..जिहान् निरा० ३२ रेत एव यस्यायतनः बृह० ३.९.१७ विनार्दं साम्नो वृणे छान्दो० २.२२.१ रेतो होच्चक्राम बृह० ६.१.१२ विश्वतश्चक्षुरुत श्वेता० ३.३ रैक्वेमानि षट् छान्दो० ४.२.२ विश्वरूपं हरिणम् प्र० १.८ लय विक्षेप रहितं मैत्रा० ४.४ (छ) विश्वे निमृग्रा पदवोः एका० २ लघुत्वमारोग्यमलो श्वेता० २.१२ विश्वेश्वर नमः मैत्रा० ४.४ (ढ) लवणमेतदुदकेऽवधायाथ छान्दो० ६.१३.१ विष्णोर्मोक्ष प्रदक्षम् मुद्ग० १.३ लोकद्वारमपावा..वय छान्दो० २.२४.४ विस्मृत्य विश्वमेकाग्रः ना०बि० ४४ लोकद्वारमपावा..वैश छान्दो० २.२४.८ विस्मृत्य सकलम् ना०बि० ३९ लोकद्वारमपावा..स्वारा छान्दो० २.२४.१२ वृष्टौ पञ्चविध छान्दो० २.३.१
मन्त्रानुक्रमणिका ५०
| मन्त्र प्रतीक | उपनिषद् विवरण | मन्त्र प्रतीक | उपनिषद् विवरण |
|---|---|---|---|
| वेत्थ यथासौ | छान्दो० ५.३.३ | श्रोत्रमेव ब्रह्मणश्चतुर्थः | छान्दो० ३.१८.६ |
| वेत्थ यथेमाः प्रजाः | बृह० ६.२.२ | श्रोत्रस्य श्रोत्रं | केन० १.२ |
| वेत्थ यदि॒तोऽधि | छान्दो० ५.३.२ | श्रोत्रःहोच्चक्राम | छान्दो० ५.१.१० |
| वेदमन्च्याचार्यो | तैत्ति० १.११.१ | श्रोत्र ॱ होच्चक्राम | बृह० ६.१.१० |
| वेदा एव सविता | गाय० ३.११ | श्वेतकेतुर्ह वा आरुणेयः | बृह० ६.२.१ |
| वेदान्तविज्ञान | मुण्ड० ३.२.६ | श्वेतकेतुर्हाऽऽरुणेय आस | छान्दो० ६.१.१ |
| वेदान्ते परमं गुह्यम् | श्वेता० ६.२२ | श्वेतकेतुर्हारुणेयःपञ्चालाना | छान्दो० ५.३.१ |
| वेदाहमेतमजरम् | श्वेता० ३.२१ | श्वोभावा मर्त्यस्य | कठ० १.१.२६ |
| वेदाहमेतं पुरुषम् | श्वेता० ३.८ | षष्ठयामिन्द्रस्य | ना०बि० १५ |
| वैश्वानरः प्रविशति | कठ० १.१.७ | षोडशकलः सोम्य | छान्दो० ६.७.१ |
| व्यानः सर्वेषु चाङ्गेषु | अमृ० ३६ | संकल्पनस्पर्श० | श्वेता० ५.११ |
| व्याने तृप्यति श्रोत्रम् | छान्दो० ५.२०.२ | संकल्पमात्र....बन्धः | निरा० २८ |
| व्रात्यस्त्वं | प्रश्न० २.११ | संकल्पो वाव मनसो | छान्दो० ७.४.१ |
| शं नो मित्रः....ब्रह्म | तैत्ति० १.१२.१ | संन्यासीति च.... इति | निरा० ३९ |
| शं नो मित्रः...ब्रह्म | तैत्ति० १.१.१ | संप्राप्यैनमृषयो | मुण्ड० ३.२.५ |
| शंसन्तमनुशंसन्ति | मन्त्रि० ९ | संभूतिं च विनाशं | ईश० १४ |
| शतं चैका च | कठ० २.३.१६ | संयुक्तमेतत्क्षरमक्षरम् | श्वेता० १.८ |
| शतायुषः पुत्र | कठ० १.१.२३ | संवत्सरो वै | प्रश्न० १.९ |
| शब्दादिविषयान् पञ्च | अमृ० ५ | संविन्मात्रस्थितश्च | स्क० ३ |
| शाकल्येति होवाच | बृह० ३.९.१८ | स इमांल्लोकानसृजत | ऐत० १.१.२ |
| शान्तसंकल्पः | कठ० १.१.१० | स ईक्षत कथं | ऐत० १.३.११ |
| शास्त्राण्यधीत्य मेधावी | अमृ० १ | स ईक्षतेमे नु लोका | ऐत० १.१.३ |
| शिक्षां व्याख्यास्यामः | तैत्ति० १.२.१ | स ईक्षतेमे नु लोकाश्च | ऐत० १.३.१ |
| शिखा च दीपसंकाशा | प्रण० ९ | स ईक्षांचक्रे कस्मिन्न | प्रश्न० ६.३ |
| शिवाय विष्णुरूपाय | स्क० ८ | स एतमेव सीमानं | ऐत० १.३.१२ |
| शिष्य इति च...शिष्यः | निरा० ३१ | स एतां त्रयीं विद्याम् | छान्दो० ४.१७.३ |
| शौनको ह वै | मुण्ड० १.१.३ | स एतास्तिस्रो देवता | छान्दो० ४.१७.२ |
| श्यामाच्छबलम् | छान्दो० ८.१३.१ | स एतेन प्रज्ञे | ऐत० ३.१.४ |
| श्रवणं तु गुरोः पूर्वम् | शु०२० ४३ | स एनान्ब्रह्म | छान्दो० ४.१५.६ |
| श्रवणायापि | कठ० १.२.७ | स एव काले भुवनस्य | श्वेता० ४.१५ |
| श्रीपरम धाप्ने स्वस्ति | स्क० १३ | स एव ज्योतिषाम् | स्क० ५ |
| श्रीवेदव्यास उवाच-देवदेव | शु०२० ४ | स एवं विद्वान् | ऐत० २.१.६ |
| श्रीवेदव्यास उवाच-यथा | शु०२० ७ | स एवाधस्तात्स | छान्दो० ७.२५.१ |
| श्रीशुक उवाच-देवादिदिव | शु०२० ११ | स एष देवोऽम्बरगश्च | एका० ८ |
| श्री सदाशिव उवाच-साधु | शु०२० १४ | स एष परोवरीयानुद्गीथः | छान्दो० १.९.२ |
| श्रुतः ह्येव मे | छान्दो० ४.९.३ | स एष ये चैतस्माद् | छान्दो० १.७.६ |
| श्रूयते प्रथमाभ्यासे | ना०बि ३३ | स एष रसाना ॱ | छान्दो० १.१.३ |
| श्रेयश्च प्रेयश्च | कठ० १.२.२ | स एष वैश्वानरो | प्रश्न० १.७ |
| श्रोतुमिच्छामि | शु०२० १३ | स एष संवत्सरः प्रजा० | बृह० १.५.१४ |
| श्रोतुर्देहेन्द्रियातीतम् | शु०२० ३६ | स ऐक्षत यदि वा | बृह० १.२.५ |
| श्रोत्रं वै ग्रहः | बृह० ३.२.६ | स च पादनारायणो | मुद्ग० २.५ |
| श्रोत्रमेवार्ङ्मनः | छान्दो० १.७.३ | स जातो भूतान् | ऐत० १.३.१३ |
५०९ मन्त्रानुक्रमणिका मन्त्र प्रतीक उपनिषद् विवरण मन्त्र प्रतीक उपनिषद् विवरण स जातो यावदायुषं जीवति छान्दो० ५.१.२ स य एतदेवममृतं...साध्या छान्दो० ३.१०.३ स तत्राजगाम गाय० २.२ स य एतमेवं....आयतन० छान्दो० ४.८.४ स तन्मयो ह्यामृत श्वेता० ६.१७ स य एतमेवं...ज्योति० छान्दो० ४.७.४ स तस्मिन्नेवाकाशे केन० ३.१२ स य एतमेवं विद्वाः छान्दो० ४.५.३ सत्यकामो ह जाबालो छान्दो० ४.४.१ स य एतमेवं विद्वान छान्दो० ३.१९.४ सत्यं ज्ञानमनन्तमानन्द सर्व० १२ स य एतमेवं विद्वान्० छान्दो० ४.१२.२ सत्यमेव जयति मुण्ड० ३.१.६ स य एतमेवं विद्वान्० छान्दो० ४.११.२ सत्येन लभ्यस्तपसा मुण्ड ० ३.१.५ स य एतमेवं...विद्वान्० छान्दो० ४.१३.२ स त्रेधात्मानं व्यकु० बृह० १.२.३ स य एतमेवं...श्रुत्० छान्दो० ४.६.४ स त्वमग्निः कठ० १.१.१३ स य एवमेतत् छान्दो० २.२१.२ स त्वं प्रियान्प्रियरूपा कठ० १.२.३ स य एवमेतद्गायत्रं छान्दो० २.११.२ सदेव सोम्येदमग्र छान्दो० ६.२१ स य एवमेतद्बृहदादित्ये छान्दो० २.१४.२ स नैव व्यभवत्तच्छ्रेयो बृह० १.४.१४ स य एवमेतद्यज्ञाय छान्दो० २.१९.२ स नैव व्यभवत्स विश. बृह० १.४.१२ स य एवमेतद्रथन्तरमग्नौ छान्दो० २.१२.२ स नैव व्यभवत्स शौद्रम् बृह० १.४.१३ स य एवमेतद्राजनम् छान्दो० २.२०.२ स पर्यगाच्छुक्रम ईश० ८ स य एवमेतद्वामदेव्यम् छान्दो० २.१३.२ सप्त प्राणाः प्रभवन्ति मुण्ड० २.१.८ स य एवमेतद्वैराजमृतुषु छान्दो० २.१६.२ स प्राणमसृजत प्रश्न० ६.४ स य एवमेतद्वैरूपम् छान्दो० २.१५.२ स ब्रह्मचारिवृत्तिश्च मंत्रि० ११ स य एवमेताः छान्दो० २.१७.२ स ब्रह्मा स विष्णुः निरा० ८ स य एवमेता रेवत्यः छान्दो० २.१८.२ स ब्रूयान्नास्य छान्दो० ८.१.५ स य एवंवित् तैत्ति० ३.१०.५ समस्तस्य खलु छान्दो० २.१.१ स य एषोऽणिमैतदा० छान्दो० ६.८.७, समाधिनिर्धूतमलस्य मैत्रा० ४.४ (झ) ९,४,१०.३, १२.३, १३.३, १४.३, १५.३ समान उ एवायं छान्दो० १.३.२ स य एषोऽन्तर्हदय तैत्ति० १.६.१ समानमा सांजीवीपुत्रात् बृह० ६.५.४ स यः कामयेत बृह० ६.३.१ समानस्तु द्वयोर्मध्ये अमृ० ३८ स यत्रायमणिमानं न्येति बृह०४.३.३६ समाने तृप्यति मनस् छान्दो० ५.२२.२ स यत्रायमात्माऽबल्यं बृह० ४.४.१ समाने वृक्षे मुण्ड० ३.२.२ स यत्रैतत्स्वप्न्यया बृह० २.१.१८ समाने वृक्षे पुरुषो श्वेता० ४.७ स यथा तत्र नादाहयेत् छान्दो० ६.१६.३ समासक्तं यदा चित्तं मैत्रा० ४.४ (ङ) स यथा दुन्दुभेर्हन्यमा० बृह० २.४.७ समे शुचौ शर्करावह्नि० श्वेता० २.१० स यथा दुन्दुभेर्हन्यमानस्य बृह० ४.५.८ स य आकाशं छान्दो० ७.१२.२ स यथाद्रैंधाग्नेरभ्याहितस्य बृह० ४.५.११ स य आशां ब्रह्मेत्युपास्त छान्दो० ७.१४.२ स यथाद्रैंधाग्नेरभ्याहितात् बृह० २.४.१० स य इच्छेत्पुत्रो मे बृह० ६.४.१४ स यथावीणायै वाद्य० बृह० ४.५.१० स य इदमविद्वान् छान्दो० ५.२४.१ स यथा वीणायै वाद्यमानायै बृह० २.४.९ स य इमांस्त्रींल्लोकान् बृह० ५.१४.६ स यथा शकुनिः छान्दो० ६.८.२ स य एतदेवं छान्दो० २.१.४ स यथा शङ्खस्य बृह० ४.५.९ स य एतदेवममृतं..मरुता. छान्दो० ३.९.३ स यथा शङ्खस्यध्माय० बृह० २.४.८ स य एतदेवममृतं...रुद्रा. छान्दो० ३.७.३ स यथा सर्वासामपा २ बृह० २.४.११ स य एतदेवममृतं..वसूना. छान्दो० ३.६.३ स यथा सर्वासामपा बृह० ४.५.१२ स य एतदेवं विद्वान् छान्दो० १.४.५ स यथा सैन्धवखिल्य बृह० २.४.१२ स य एतदेवममृतं वेदादि. छान्दो० ३.८.३ स यथा सैन्धवघनो० बृह० ४.५.१३
मन्त्रानुक्रमणिका ५१०
| मन्त्र प्रतीक | उपनिषद् विवरण | मन्त्र प्रतीक | उपनिषद् विवरण |
|---|---|---|---|
| स यथा सोम्य | प्रश्न० ४.७ | सर्वास्वप्सु पञ्चविध | छान्दो० २.४.१ |
| स यथेमा नद्यः | प्रश्न० ६.५ | सर्वे तत्र लयम् | ना०बि० ५१ |
| स यथोभयपाद० | छान्दो० ४.१६.५ | सर्वेन्द्रियगुणाभासम् | श्वेता० ३.१७ |
| स यथोर्णनाभि० | बृह० २.१.२० | सर्वे वेदा यत्पदं | कठ० १.२.१५ |
| स यदवोचं प्राणम् | छान्दो० ३.१५.४ | सर्वे स्वरा इन्द्रस्यात्मनः | छान्दो० २.२२.३ |
| स यदशिशिषति | छान्दो० ३.१७.१ | सर्वे स्वरा घोषवन्तो | छान्दो० २.२२.५ |
| स यदा तेजसाभिभूतो | प्रश्न० ४.६ | सलिल एको द्रष्टाऽद्वैतो | बृह० ४.३.३२ |
| स यदि पितरं | छान्दो० ७.१५.२ | स वा अयं पुरुषो जायमानः | बृह० ४.३.८ |
| स यदि पितृलोककामो | छान्दो० ८.२.१ | स वा अयमात्मा ब्रह्म | बृह० ४.४.५ |
| स यद्येकमात्रमभिध्यायीत | प्रश्न० ५.३ | स वा अयमात्मा सर्वेषाम् | बृह० २.५.१५ |
| स यः संकल्पं ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.४.३ | स वा ..आत्माऽन्नादो | बृह० ४.४.२४ |
| स यस्तेजो ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.११.२ | स वा ..आत्मा योऽयं | बृह० ४.४.२२ |
| स यः स्मरः ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.१३.२ | स वा एष आत्मा | छान्दो० ८.३.३ |
| स यश्चित्तं ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.५.३ | स वा एष आत्मेत्यदो | मैत्रा० २.१० |
| स यावदादित्यः | छान्दो० ३.६.४ | स वा एष एतस्मिन्बुद्ध | बृह० ४.३.१७ |
| स यामिच्छेत्कामयेत | बृह० ६.४.९ | स वा एष एतस्मिन् स्वप्नान्ते | बृह० ४.३.३४ |
| स यावदादित्य उत्तरत | छान्दो० ३.१०.४ | स वा एष एतस्मिन् स्वप्ने | बृह० ४.३.१६ |
| स यावदादित्य..द्विस्ता | छान्दो० ३.७.४ | स वा एष महानज | बृह० ४.४.२५ |
| स यावदादित्यः पश्चादु० | छान्दो० ३.९.४ | स वा एष शुद्धः | मैत्रा० २.११ |
| स यावदादित्यो दक्षिणत | छान्दो० ३.८.४ | स वा एष.. संप्रसादे | बृह० ४.३.१५ |
| स योध्यानं ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.६.२ | स वा एषं सूक्ष्मो | मैत्रा० २.५ |
| स यो नाम ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.१.५ | सवित्रा प्रसवेन जुवेत | श्वेता० २.७ |
| स योऽन्नं ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.९.२ | स विश्वकृद्विश्वविदात्म. | श्वेता० ६.१६ |
| स योऽपो ब्रह्मेत्युपास्त | छान्दो० ७.१०.२ | स वृक्षकालाकृतिभिः | श्वेता० ६.६ |
| स यो बलं ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.८.२ | स वेदैतत्परमं | मुण्ड० ३.२.१ |
| स यो मनुष्याणां | बृह० ४.३.३३ | स वै नैव रेमे तस्मादेकाकी | बृह० १.४.३ |
| स यो मनो ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.३.२ | स वै वाचमेव प्रथमामत्यवहत्सा | बृह० १.३.१२ |
| स यो वाचं ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.२.२ | सव्याहृतिं सप्रणवाम् | अमृ० ११ |
| स यो विज्ञानं ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.७.२ | सशब्दश्चाक्षरे | ना०बि० ४९ |
| स यो ह वै तत्परमं | मुण्ड० ३.२.९ | स समित्पाणि.. तद्य | छान्दो० ८.१०.३ |
| सर्वकर्मा सर्वकामः | छान्दो० ३.१४.४ | स समित्पाणिः .... पुनरेयाय | छान्दो० ८.९.२ |
| सर्वचिन्तां समुत्सृज्य | ना०बि० ४१ | स समित्पाणिः ... नाह | छान्दो० ८.११.२ |
| सर्वज्ञो भवतु क्षिप्रम् | शु०र० ८ | स सर्ववेत्ता भुवनस्य | एका० ९ |
| सर्वतः पाणिपादम् | श्वेता० ३.१६ | स सविता सावित्र्या | गाय० ४.२ |
| सर्वं ह्येतद्ब्रह्मा | माण्डू० २ | स ह क्षत्ताऽन्विष्य | छान्दो० ४.१.७ |
| सर्वं खल्विदं..किंचन | निरा० ९ | स ह खादित्वा | छान्दो० १.१०.५ |
| सर्वं खल्विदं ब्रह्म | छान्दो० ३.१४.१ | स ह गौतमो राज्ञो० | छान्दो० ५.३.६ |
| सर्वं चेदं क्षयिष्णु | मैत्रा० १.४ | स ह द्वादशवर्ष | छान्दो० ६.१.२ |
| सर्वव्यापिनमात्मानं | श्वेता० १.१६ | सह नौ यशः | तैत्ति० १.३.१ |
| सर्वा जीवे सर्व संस्थे | श्वेता० १.६ | स ह पञ्चदशाहानि | छान्दो० ६.७.२ |
| सर्वा दिश ऊर्ध्वमधश्च | श्वेता० ५.४ | स ह प्रजापतिरीक्षांचक्रे | बृह० ६.४.२ |
| सर्वाननशिरोग्रीवः | श्वेता० ३. | स ह प्रातः संजिहान | छान्दो० १.१०.६ |
५११ मन्त्रानुक्रमणिका मन्त्र प्रतीक उपनिषद् विवरण मन्त्र प्रतीक उपनिषद् विवरण स ह मैत्रेयः प्रातः गाय० २.४ स होवाच ... वै खलु बृह० ४.५.५ स ह मैत्रेयः स्वानन्तेवासीन गाय० २.३ स होवाचात्र वा गाय० २.५ स ह मौद्गल्यः गाय० २.१ स होवाचा... पुरुष बृह० २.१.१६ स ह व्याधिना छान्दो० ४.१०.३ स होवाचा...पुरुषस्तदेषां बृह० २.१.१७ स ह शिलंकः छान्दो० १.८.३ स होवाचाजातशत्रुः प्रति बृह० २.१.१५ सं ह संपादयां चकार छान्दो० ५.११.३ स होवाचाजातशत्रोरेतावन्नू बृह० २.१.१४ सहस्रशीर्षा पुरुषः श्वेता० ३.१४ स होवाचैतदेवात्रात्विषम् गाय० २.६ सहस्रार्णमती ना०बि० ५ स होवाचैतद्वै तदक्षरम् बृह० ३.८.८ सह हारिद्रुमतम् छान्दो० ४.४.३ स होवाचोवाच वै सो बृह० ३.३.२ स हाशाथ हैनमुपससाद छान्दो० ६.७.४ स होवाचोषस्तश्चाक्रायणो बृह० ३.४.२ स हेभ्यं कुल्माषान् छान्दो० १.१०.२ सा चेदस्मै दद्यात् बृह० ६.४.८ स होवाच ... आकाश एव बृह० ३.८.७ सा चेदस्मै न बृह० ६.४.७ स होवाच...आकाशे तदोतं बृह० ३.८.४ सा ब्रह्मेति केन० ४.१ स होवाच ... ईश्वर इति च निरा० ४ सा भावयित्री ऐत० २.१.३ स होवाच ... एवायमग्नौ बृह० २.१.७ साम प्राणो वै साम बृह० ५.१३.३ स होवाच...एवायं छायामयः बृह० २.१.१२ सामवेदस्तथा प्रण० ६ स होवाच ... एवायमप्सु बृह० २.१.८ सामैश्चिन्दन्तो एका० १० स होवाच ... एवायमाकाशे बृह० २.१.५ सा वा एषा देवता बृह० १.३.९ स होवाच...एवायमात्मनि बृह० २.१.१३ सा वा ... पाप्मानं मृत्युमपहत्य बृह० १.३.१० स होवाच... एवायमादर्शे बृह० २.१.९ सा वा...मृत्युमपहत्या- बृह० १.३.११ स होवाच...एवासावादित्ये बृह० २.१.२ सा ह वागुच्चक्राम छान्दो० ५.१.८ स होवाच किं मेऽन्नम् छान्दो० ५.२.१ सा ह वागुवाच बृह० ६.१.१४ स होवाच किं मे वासो छान्दो० ५.२.२ सा हैनमुवाच नाहम् छान्दो० ४.४.२ स होवाच ... चन्द्रे बृह० २.१.३ सा होवाच नमस्तेऽस्तु बृह० ३.८.५ स होवाच... तात जानीथा बृह० ६.२.४ सा होवाच....नामृता बृह० ४.५.४ स होवाच ...दिक्षु बृह० २.१.११ सा होवाच ब्राह्मणा बृह० ३.८.१२ स होवाच देवेषु वै बृह० ६.२.६ सा होवाच मैत्रेयी यन्नु बृह० २.४.२ स होवाच न वा अरे पत्युः बृह० २.४.५ सा होवाच मैत्रेयी येनाहम् बृह० २.४.३ स होवाच ... पत्युः बृह० ४.५.६ सा होवाच मैत्रेय्यत्रैव बृह० २.४.१३ स होवाच पितरं कठ० १.१.४ सा होवाच मैत्रेय्यत्र मा बृह० ४.५.१४ स होवाच प्रतिज्ञातो बृह० ६.२.५ सा होवाच यदूर्ध्वं बृह० ३.८.३ स होवाच भगवन्तं छान्दो० १.११.२ सा होवाच...याज्ञवल्क्य बृह० ३.८.६ स होवाच महात्मन छान्दो० ४.३.६ सा होवाच...वित्तेन पूर्णाः बृह० ४.५.३ स होवाच महिमान बृह० ३.९.२ सा होवाचाहं वै त्वा बृह० ३.८.२ स होवाच यथा नस्त्वं बृह० ६.२.८ सिद्धासने स्थितो ना०बि० ३१ स होवाच ... यन्तम् बृह० २.१.१० सुकेशा च भारद्वाजः प्रश्न० १.१ स होवाच याज्ञवल्क्यः बृह० २.४.४ सुखदुःखबुद्ध्या सर्व० ६ स होवाचगर्वेढं छान्दो० ७.१.२ सुखमिति ... सुखम् निरा० १५ स होवाच वायुवैं गौतम बृह० ३.७.२ सुवरित्यादित्ये मह तैत्ति० १.६.२ स होवाच ... वायौ बृह० २.१.६ सुषारथिरश्वानिव शि०सं० ६ स होवाच विज्ञायते बृह० ६.२.७ सुषुप्तस्थानः माण्डू० ११ स होवाच ... विद्युति बृह० २.१.४ सूक्ष्मातिसूक्ष्मम् श्वेता० ४.१४