भारतकोश
अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)

अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)

Adbhut Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि (टीकाकार: पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र) द्वारा

स्रोत: Maharshi Valmiki Krit Srimad Adbhut Ramayanam with Hindi Tika by Pt. Jwala Prasad Mishra (उद्गम)

DevanagariHindipublished173 पृष्ठ

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(१२२) अद्भुतरामायण [त्रयोविंशति-

दीर्घजंघा महारावा मुंडमालाविभूषणा ॥ अस्थिकंकिणिका भीमा भीमवेगपराक्रमा ॥ ९ ॥ खरस्वरा महाघोरा विकृता विकृतानना, ॥ चतुर्भुजा दीर्घतुंडा शिरोऽलंकरणोज्ज्वला ॥ १० ॥

दीर्घजंघा महाशब्दवाली मुण्डमालाके भूषणोंवाली हड्डियोंकी क्षुद्रघण्टिका पहरे भीम वेग पराक्रमवाली ॥ ९ ॥ तीक्ष्ण शब्दवाली महाघोर विकृतमुखवाली चार भुजा दीर्घतुण्ड उज्ज्वल शिरके भूषण पहरे ॥ १० ॥

ललज्जिह्वा जटाजूटैर्मण्डिता चण्डरोमिका ॥ प्रलयांभोदकालाभा घंटापाशविधारिणी ॥ ११ ॥ अवस्कंद्य ॐ रथात्तूर्णं खड्गखर्परधारिणी ॥ श्येनीव रावणरथे पपात निमिषान्तरे ॥ १२ ॥

चलायमानजिह्वा जटाजूटसे मण्डित चण्डरोमवाली प्रलयसागर और कालके समान घंटापाशको धारण करनेवाली ॥ ११ ॥ पुष्पकसे शीघ्रतासे उतरकर खड्ग खर्पर धारण किये वाजिनीके समान रावणके रथपर टूट पडी ॥ १२ ॥

शिरांसि रावणस्याशु निमेषान्तरमात्रतः ॥ खड्गेन तस्य चिच्छेद सहस्राणीह लीलया ॥ १३ ॥ अन्येषां योद्धृवीराणां शिरांसि नखरेण हि ॥ भिन्ना निपातयामास भूमौ तेषां दुरात्मनाम् ॥ १४ ॥

एक निमेषमात्रमेंही लीलासे रावणके सहस्र शिर खड्गसे काट डाले ॥ १३। और भी वीर योध्दाओंके शिर नखोंसे तोड तोडकरं पृथिवीमें डाल दिये ॥ १४ ॥

केषांचित्पाटयामास नख कोष्ठानि जानकी ॥ खड्गेन चाच्छिनत्कांश्चित्क्रूरान्यादांश्च चिच्छिदे ॥ १५ ॥ खण्डं खण्डं चकारान्यांस्तिलशः कांश्चिदेव हि ॥ अन्त्राण्यन्यस्याचकर्ष पादाघातेन कांश्चन ॥ १६ ॥

किन्हींके कोष्ठ नखोंसे चीर डाले, किन्हींके चरण आदि अंग खड्गसे काट डाले ॥ १५ ॥ किन्हींके अंग खड्गसे तिलके वरावर काटकर चूर्णकर दिये, किसीको चरणाघात कर आंतें निकालकर खेंचन लगी ॥ १६ ॥

पार्श्वेन निजघानान्यान्याष्णिनान्यानपोथयत् ॥ कांश्चिच्छरीरवातेन दृष्ट्वाप्यन्यानपातयत् ॥ १७ ॥ प्रलयं कुर्वती सीता राक्षसानां भयंकरी ॥ निजघानाट्टहासेन कांश्चित्पृष्ठे द्विधाकरोत् ॥ १८ ।


* पुष्पादित्यर्थः । सम्पार पुष्पकं रथमित्यत्र पुष्पंके रथशब्द प्रयोगात् ।