अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)
Agastya Samhita of Sage Agastya with Commentary
महर्षि अगस्त्य / पं. भवनाथ झा द्वारा
पृष्ठ 113, कुल 337 में से
संदर्भ में पढ़ें(52) अगस्त्य-संहिता ———————————————————————————— श्रीरामद्वारपीठाङ्गपरिवारतया स्थिताः। ये सुरास्तानिह स्तौमितन्मूलाः सिद्धयो यतः। श्रीराम के द्वार पर, पीठ पर, अङ्ग के रूप में तथा परिवार के रूप में जो देवगण उल्लिखित हैं, उनकी स्तुतियाँ मैं करता हूँ; क्योंकि सिद्धियाँ उन्ही के द्वारा प्राप्त होतीं हैं। वन्दे गणपतिं भानुं त्रिलोकस्वामिनं शिवम्।।३।। क्षेत्रपालं तथा धात्रीं विधातारमनन्तरम्। गृहाधीशं गृहं गङ्गां यमुनां कुलदेवताम्।।४।। प्रचण्डचण्डौ च तथा शंखपद्मनिधी अपि। वास्तोष्पतिं द्वारलक्ष्मीं गुरुं वागधिदेवताम्।।५।। सर्वप्रथम गणेश, सूर्य, तीनों लोकों के स्वामी शिव, क्षेत्रपाल तथा धात्री की पूजा करें। इसके बाद ब्रह्मा की पूजा करें। फिर वास्तु के स्वामी, वास्तु, गंगा, यमुना और कुलदेवता की पूजा करें। प्रचण्डा, चण्ड, शंख, पद्म, निधि, वास्तोष्पति, द्वारलक्ष्मी, गुरु और वाक् की देवता सरस्वती की पूजा करें। एताः संपूज्य भक्त्याहं श्रीरामद्वारदेवताः। महामण्डूककालाग्निरुद्राभ्यां प्रणमाम्यहम्।।६।। आधारशक्तिकूर्माभ्यां नागाधिपतये तथा। पृथिव्यै च तथा लक्ष्म्यै सागराय¹ नमो नमः।।७।। श्वेतद्वीपाय रत्नाद्रौ कल्पवृक्षाय ते नमः। सुवर्णमण्डपायाथ पुष्पकाय महार्हते।।८।। विमानायाष्टरत्नाय सम्यक्सिंहासनाय च। उद्यदादित्यसंशोभिपद्माय तदनन्तरम्।।९।। श्रीराम के इन द्वार-देवताओं की पूजा कर प्रार्थना करें- 'महामण्डूक और कालाग्निरुद्र को प्रणाम करता हूँ। आधारशक्ति और कूर्मदेव को प्रणाम। शेषनाग को प्रणाम। पृथ्वी, लक्ष्मी और सागर को प्रणाम। श्वेतद्वीप और रत्नपर्वत पर स्थित कल्पवृक्ष को प्रणाम। सुवर्ण-मण्डप और विशाल पुष्पक विमान को प्रणाम। आठो रत्नों को और सुन्दर सिंहासन को प्रणाम। इसके बाद उगते हुए सूर्य के समान शोभायमान कमल पुष्प को प्रणाम।
- क. क्षीरसागराय