अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)
Agastya Samhita of Sage Agastya with Commentary
महर्षि अगस्त्य / पं. भवनाथ झा द्वारा
DevanagariSanskritpublished337 पृष्ठ
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(96) अगस्त्य-संहिता
लक्षं तदर्द्धमथवा जपित्वा तद्दशांशतः। तिलैर्वामलकैर्हुत्वा¹ यद्यदिष्टं तदश्नुते।।५।। विधानपूर्वक पीछे कही गयी विधि से होमकर्म पर्यन्त कर अग्नि में देवता का आवाहन कर पाँच या सोलह उपचारों से पृथक्-पृथक् पूजा कर पलाश, पीपल, खैर, गूलर, आम, बड़, या अन्य यज्ञीय की समिधा से अग्नि प्रज्वलित करें। वहीं 'श्रीराम की पूजा सम्यक् रूप से कर एक लाख अथवा पचास हजार जप कर उसका दशांश हवन करें। तिल से अथवा आँवला से हवन कर अभीष्ट वस्तु की प्राप्ति होती है। बिल्वप्रसूनैरैश्वर्यमर्चितेऽग्नौ हुतैर्भवेत्। पलाशकुसुमैर्हुत्वा मेधावी वेदविद् भवेत्।।६।। दूर्वाभिश्च गुडीचीभिः² प्रत्येकमाप चाक्षतैः। निरामयोऽपि दीर्घायुर्भवत्येव तपोधन³।।७।। पूजित अग्नि में बेल के फूल से हवन करने पर ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। पलाश के फूल से हवन कर वह मेधावी और वेद ज्ञानी होता है। दूर्वा या गुरुच के साथ अक्षत मिलाकर हवन करने से यजमान नीरोग और दीर्घायु होते हैं। सम्यक् चन्दनतोयेन प्रत्यग्रैश्च समुक्षितैः। जातीप्रसूनैर्हुत्वा तु राजानं वशमानयेत्।।८।। चन्दन के जल से सुगन्धित खिलेहुए तथा उचित रीति से तोड़े गये ताजे जूही के फूल से हवन कर राजा को वश में करे। ध्यात्वा च मन्मथं रामं⁴ सीतामपि रतिं स्मरेत्। सर्ववश्यप्रयोगेषु जपहोमादिकर्मसु।।९।। श्रीराम का कामदेव के रूप में तथा सीता को रति के रूप में सभी वशीकरण के प्रयोग में, जप होम आदि में स्मरण करें। रामं नवोपयन्तारं स्मरेणाराध्य⁵ भक्तितः। उपैति सदृशीं कन्यां लाजहोमेन साधकः।।१०।। कामबीज (क्लीं) से नव विवाहित श्रीराम की भक्तिपूर्वक आराधना कर धान के खील से हवन करने से साधक श्रीसीता के समान कन्या पत्नी के रूप में प्राप्त करता है।
- घ. कमलैर्हुत्वा। 2. घ. गुलूचीभिः। 3. घ. तपोनिधे। 4. घ. ध्यात्वापि राघवं कामं। 5. घ. स्मरन्नाराध्य।