भारतकोश
अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

Agastya Samhita of Sage Agastya with Commentary

महर्षि अगस्त्य / पं. भवनाथ झा द्वारा

DevanagariSanskritpublished337 पृष्ठ

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(122) अगस्त्य-संहिता

जाम्बवान्, धृष्टि, जयन्त, विजय, सुराष्ट्र, राष्ट्रवर्द्धन, अकोप, धर्मपाल और सुमन्त। नल, नील, गवय, गवाक्ष, गन्धमादन, सुरभि, मैन्द और द्विविद। वसिष्ठ, वामदेव, जाबालि, गौतम, भरद्वाज, कौशिक, वाल्मीकि और नारद। दशरथ, कौशल्या, कैकेयी, सुमित्रा। राम लक्ष्मण, भरत एवं शत्रुघ्न।) कर सीता आदि चार (सीता, माण्डवी, उर्मिला एवं श्रुतिकीर्ति) देवों का क्रमिक तर्पण करें। हृदादींस्तर्पयेत्पश्चान्मध्ये मध्ये रघूद्वहम्। नाममन्त्रैर्भविदेवं चत्वारिंशच्छतद्वयम् ॥६३॥ कृत्वैवं प्रत्यहं सम्यक् त्रिसन्ध्यन्तु यथाविधि। स्तुवंश्च प्रणमेद् रामं यथाशक्ति मुनीश्वर। कृतकृत्यो भवेन्मन्त्री सत्यं सत्यं न चान्यथा॥६४॥ हे मुनिश्रेष्ठ सुतीक्ष्ण! हृत् आदि को तर्पण बाद में करें; बीच-बीच में श्रीराम को तर्पण करें। इस प्रकार नाम मन्त्रों से यह तर्पण दो सौ चालीस बार होगा। इस प्रकार सम्यक् रीति से प्रतिदिन तीनों सन्ध्याओं में विधानपूर्वक कृत्य सम्पन्न कर तथा श्रीराम की स्तुति करते हुए, उन्हें यथाशक्ति प्रणाम करें। इस प्रकार साधक कृतकृत्य हो जाता है, यह सत्य है, सत्य है इसमें सन्देह नहीं। इत्यगस्त्यसंहितायां परमरहस्ये पूजाविधानं नाम सप्तदशोऽध्यायः। अथ अष्टादशोऽध्यायः अगस्त्य उवाच अथ पूजाविधानानां लक्षणान्यभिदध्महे। अम्बुचन्दनपुष्पाणि धूपदीपनिवेदनम्¹ ॥१॥ हरेरेतानि² मुख्यानि साधनानि मुनीश्वर। स्थलमप्यर्घ्यपात्राणि शङ्खं चैषाञ्च लक्षणम् ॥२॥ अगस्त्य बोले- हे मुनिश्रेष्ठ सुतीक्ष्ण, अब मैं पूजा-सामग्रियों के स्वरूप बतलाता हूँ। जल, चन्दन, फूल, धूप एवं दीप का समर्पण पूजा के मुख्य साधन हैं तथा पूजा-स्थल, अर्ध्यादिपात्र तथा शंख ये जो साधन हैं, उनका लक्षण मैं कहता हूँ।

  1. घ. धूपदीपौ निवेदयेत्। 2. क. हविरेतानि।