भारतकोश
अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

Agastya Samhita of Sage Agastya with Commentary

महर्षि अगस्त्य / पं. भवनाथ झा द्वारा

DevanagariSanskritpublished337 पृष्ठ

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पृष्ठ 193

(132) अगस्त्य-संहिता भक्तिभाव के साथ उपर्युक्त कर्म करें और पुरुषोत्तम की भावना करें। जो इस प्रकार पूजा, जप, होम आदि करते हैं, वे इस संसार में और परलोक में सबके द्वारा पूजित होते हैं। पूजा जपश्च होमश्च मन्त्राणामुद्धृतिस्तथा।।53।। दीक्षाभिषेकमार्गस्तु दर्शितोऽत्र तपोनिधे। पूजोपकरणादीनां लक्षणान्यपि सुव्रत।।54।। दर्शितानि प्रयत्नेन सर्वं भक्त्यावधारय। सुतीक्ष्णाभिहितं यत्नाद् यदेतद्¹ भुक्तिमुक्तिदम् ।।55।। नावैष्णवेभ्यो वक्तव्यं न श्राव्यमिति मे मतिः। यत्नेन विष्णुभक्ताय चार्हते² देयमित्यपि।।56।। पूजा, जप, होम, मन्त्रों की आहुति तथा दीक्षा और अभिषेक का मार्ग मैंने मूल रूप से बतला दिया। पूजा में प्रयुक्त होनेवाले उपकरणों के लक्षण भी प्रयत्नपूर्वक मैंने बलता दिया, उन सबको भक्तिभाव से समझो। हे सुतीक्ष्ण! मैंने जो पूजा की विधि तुम्हें बतलायी, उसे किसी वैष्णव से भिन्न व्यक्ति के सामने मत बोलना, न उन्हें सुनाना, यह मेरा मत है। विष्णु के भक्त जो इस विधि को ग्रहण करने में समर्थ हों, उन्हें यत्नपूर्वक देना चाहिए, यह भी मेरा मत है। इत्यगस्त्यसंहितायां परमरहस्ये आसनमुद्राप्रदर्शनं नामाष्टादशोऽध्यायः। अथ एकोनविंशोऽध्यायः अगस्तिरुवाच सुतीक्ष्ण मन्त्रवर्येषु श्रेष्ठो वैष्णव उच्यते। गाणपत्येषु शैवेषु शाक्तसौरेष्वभीष्टदः।।1।। वैष्णवेष्वपि सर्वेषु राममन्त्रः फलाधिकः। गाणपत्यादिमन्त्रेषु कोटिकोटिगुणाधिकः।।2।। अगस्त्य बोले- हे सुतीक्ष्ण! गाणपत्य, शैव, शाक्त, सौर मन्त्रों में भी वैष्णव मन्त्र श्रेष्ठ है तथा मनोरथ सिद्ध करनेवाला है। वैष्णव-मन्त्रों में भी राममन्त्र गाणपत्य आदि मन्त्रों में करोड़ों गुना अधिक फल देनेवाला है।

  1. घ. यद्वद्वैष्णवं। 2. क. चार्थिने। 3. घ. ⁰कामदोऽयं।