अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)
Agastya Samhita of Sage Agastya with Commentary
महर्षि अगस्त्य / पं. भवनाथ झा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें(18) अगस्त्य-संहिता 16वीं शती में मिथिला के महेश ठाकुर ने भी 'अगस्त्य-संहिता' का उल्लेख रामनवमी-प्रकरण में ही किया है- चैत्रशुक्लनवमी रामनवमी, सा च मध्याह्नयोगिनी ग्राह्या। इसके प्रमाण में उन्होंने 'अगस्त्य-संहिता' को उद्धृत करते हुए लिखा है कि- चैत्रशुक्ले तु नवमी पुनर्वसुयुता यदि। सैव मध्याह्नयोगेन महापुण्यतमा भवेत्। इत्यगस्त्यसंहितोक्तेश्च इति मत्कृतस्मृतिरत्नाकरे। (तिथितत्त्वचिन्तामणि) महेश ठाकुर ने इसके अतिरिक्त नवमी चाष्टमीविद्धा त्याज्या विष्णुपरायणैः। इस पंक्ति को भी अगस्त्य-संहिता से उद्धृत माना है। प्रस्तुत 'अगस्त्य संहिता' में यह पंक्ति 28वें अध्याय के 13वें श्लोक का पूर्वार्द्ध है, जहाँ रामपरायणैः पाठान्तर है। इसके अतिरिक्त महेश ठाकुर ने निम्नलिखित श्लोकों को भी अगस्त्य- संहितोक्त मानकर उद्धृत किया है- उपोषणं जागरणं पितृनुद्दिश्य तर्पणम्। तस्मिन् दिने तु कर्तव्यं ब्रह्मप्राप्तिमभीप्सुभिः।। सर्वेषामप्ययं धर्मो भुक्तिमुक्त्यैकसाधनम्। अशुचिर्वापि पापिष्ठः कृत्वेदं व्रतमुत्तमम्।। पूज्यः स्यात् सर्वभूतानां यथा रामस्तथैव सः।। 17वीं शती में अनन्तदेव ने भी 'स्मृति-कौस्तुभ' में इसी रामनवमी-निर्णय के प्रसंग में अगस्त्य-संहिता का उल्लेख किया है- अगस्तिसंहितायां- चैत्रे नवम्यां प्राक्पक्षे दिवा पुण्ये पुनर्वसौ। मेषे पूषणि संप्राप्ते लग्ने कर्कटकाह्वये। आविरासीत्स कलया कौसल्यायां परः पुमान्। तस्मिन्दिने तु कर्तव्यमुपवासव्रतं सदा। तत्र जागरणं कुर्याद्रघुनाथपरो भुवि। प्रातर्दशम्यां कृत्वा तु संध्याद्याः कालिकाः क्रियाः। संपूज्य विधिवद्रामं भक्त्या वित्तानुसारतः।