भारतकोश
अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

Agastya Samhita of Sage Agastya with Commentary

महर्षि अगस्त्य / पं. भवनाथ झा द्वारा

DevanagariSanskritpublished337 पृष्ठ

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पृष्ठ 21

प्रस्तावना (19) ब्राह्मणाम्भोजयेद्भुक्त्वा दक्षिणाभिश्च तोषयेत्। गोभूतलहिरण्याद्यैर्वस्त्रालंकरणैस्तथा । रामभक्तान् प्रयत्नेन प्रीणयेत्परया मुदा। एवं यः कुरुते भक्त्या श्रीरामनवमीव्रतम्। अनेकजन्मसिद्धानि पातकानि बहून्यपि। भस्मीकृत्वा व्रजत्येव तद्विष्णोः परमं पदम्। सर्वेषामप्ययं धर्मो भुक्तिमुक्त्येकसाधनम्। इति। ये सभी उद्धरण इस 'अगस्त्य-संहिता' में उपलब्ध हैं। आधुनिक काल के विख्यात आगमविद् सरयू प्रसाद द्विवेदी (विक्रम संवत् 1892 से 1963) ने अपने ग्रन्थ 'आगम रहस्य' में भी 'अगस्त्य-संहिता' का पर्याप्त उल्लेख किया है। यह ग्रन्थ राजस्थान प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर से ग्रन्थाङ्क 88 के रूप में प्रकाशित है। इस ग्रन्थ में आचार्य ने त्रयोदश पटल में पुरश्चरण प्रकरण में अगस्त्य- संहिता से निम्नलिखित स्थल को उद्धृत किया है- अगस्त्य-संहितायाम् अथ वक्ष्ये महादेवि पौरश्चरणिकं विधिम्। विना येन न सिद्धिः स्यान्मन्त्रो वर्षशतैरपि।।1।। यह श्लोक किंचित् पाठान्तर से इस ग्रन्थ के षोडश अध्याय के आरम्भ में है। अगस्त्य-संहिता की प्राचीनता पर विचार उपनिषदों में आगमशास्त्रीय 'रामरहस्योपनिषद्' तथा रामतापनीयोपनिषद् वैष्णवागम में महत्त्वपूर्ण है। इसका रचनाकाल निर्धारित नहीं है, किन्तु इसका उल्लेख मुक्तिकोपनिषद् में अथर्ववेद से सम्बद्ध उपनिषदों में किया गया है। सामान्यतः यह अवधारणा रही है कि आदि शंकराचार्य ने जिन उपनिषद्-ग्रन्थों पर शांकर-भाष्य लिखा है, उसके अतिरिक्त उपनिषद् परवर्ती काल के हैं। किन्तु, शंकराचार्य ने उपनिषद् भाष्य में अनेक ऐसे उपनिषदों को उद्धृत किया है, जो आगम की परम्परा में हैं और मुक्तिकोपनिषद् में उल्लिखित 108 उपनिषदों की सूची में हैं।