भारतकोश
अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

Agastya Samhita of Sage Agastya with Commentary

महर्षि अगस्त्य / पं. भवनाथ झा द्वारा

DevanagariSanskritpublished337 पृष्ठ

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(178) अगस्त्य-संहिता

श्रीसीताराम के स्वरूप न्यास करें। तब प्रत्येक अक्षर से संहारन्यास करें जो पैरों से लेकर मस्तक तक के क्रम से होता है तथा इसके बाद नाभि से प्रारम्भ कर ऊपर नीचे उत्पत्तिन्यास करें। तब मूर्तिन्यास करें, तब तत्त्वन्यास के बाद केशवादिन्यास करें। अन्त में, सभी मन्त्रों से सर्वाङ्गन्यास करें। ध्यायेद् हृत्पुण्डरीकाक्षं परं ज्योतिः परात्परम् ।। २७ ।। तत्रैव देवमभ्यर्च्य मानसैरुपचारकैः । जपेत् क्वचन चैकान्ते रामं ध्यायन्ननन्यधीः ।। २८ ।। इसके बाद हृदयरूपी कमल के समान आँखोंवाले परम ज्योतिर्मय, परात्पर पुरुष का ध्यान करें। वहीं मानसोपचार से देवता की अर्चना कर कहीं एकान्त स्थान में श्रीराम का ध्यान एकाग्र होकर करते हुए जप करें। नीलजीमूतसंकाशं विद्युद्वर्णाम्बरावृतम् । सन्तप्तकाञ्चनप्रख्यां सीतामङ्कगतां पुनः ।। २९ ।। अन्योन्याश्लिष्टहृद्बाहुनेत्रं पश्यन्तमादरात् । दक्षिणेन कराग्रेण कुचाग्रे चञ्चलालकम् ।। ३० ।। स्पृशन्तं वलनोत्सङ्गैः¹ परिहासे मुहुर्मुहुः । विनोदयन्तं ताम्बूलचर्वणैकपरायणम् ।। ३१ ।। सर्वरूपोज्ज्वलद्वन्द्वं² योषित्पुरुषयोरिव । श्रीरामसीतयोः सर्वसम्पत्करविधायकम् ।। ३२ ।। श्रीराम नीले मेघ के समान हैं और विद्युत् से समान वर्ण (पीत) के वस्त्र पहने हुए हैं और तपे हुए सोने के समान आभा वाली सीता उनकी गोद में बैठी हुई हैं। एक दूसरे के हृदय, बाहें और नेत्र मिले हैं, जिसे श्रीराम आदर के साथ देख रहे हैं। दाहिने हाथ की अंगुलियाँ श्रीसीता के स्तनाग्र पर लटके चंचल लटों को बार बार परिहास में घेर कर आलिंगन कर छू रही हैं। श्रीराम पान चबा रहे हैं, सभी रूपों में उज्ज्वल रहनेवाले युगलस्वरूप स्त्री और पुरुष के समान श्रीसीताराम का ध्यान करें, जो सभी प्रकार के ऐश्वर्य प्रदान करनेवाले हैं। जपहोमार्चनादीनि कुर्यात् कर्माणि सन्ततम् । यत्किञ्चिदप्यनन्तं स्यात् सत्यं सत्यं न संशयः ।। ३३ ।।

१. ग. च ततो त्याग=| २. ग. पूर्वरूपोज्ज्वलद्वन्द्वं ।