भारतकोश
अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

Agastya Samhita of Sage Agastya with Commentary

महर्षि अगस्त्य / पं. भवनाथ झा द्वारा

DevanagariSanskritpublished337 पृष्ठ

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पृष्ठ 251

(190) अगस्त्य-संहिता सभी कृत्य कर श्रीराम की विधिवत् पूजा भक्ति के साथ अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार करें। भक्तिपूर्वक ब्राह्मण भोजन करावें तथा दान-दक्षिणा देकर उन्हें सन्तुष्ट करें। परम प्रसन्न होकर यत्नपूर्वक श्रीराम के भक्तों को सन्तुष्ट करें। ऐसा करने से अनेक जन्मों में उपजे अनेक पाप को भस्म कर वह व्यक्ति विष्णु का परम धाम प्राप्त करता है। सर्वेषामप्ययं धर्मो मुक्तिभुक्त्यैकसाधनः। अशुचिर्वापि पापिष्ठः कृत्वेदं व्रतमुत्तमम्।।11।। पूज्यः स्यात् सर्वभूतानां यथा रामस्तथैव सः। यह सबके लिए धर्म है, जो भोग और मोक्ष का निश्चित साधन है। चाहे वह अपवित्र हो या सबसे बड़ा पापी क्यों न हो, यह श्रेष्ठ व्रत कर सभी प्राणियों के बीच जैसे श्रीराम पूज्य हैं वैसे वह भी पूज्य हो जाता है। यस्तु रामनवम्यान्तु भुङ्क्ते स तु नराधमः।।12।। कुम्भीपाकेषु घोरेषु पच्यते नात्र संशयः। त्रैलोक्यपापमश्नाति स्वधर्मो निष्फलो भवेत्।।13।। यस्तु रामस्य नवमीमनादृत्य नराधमः। अश्नीयान्नरकं गच्छेद्यावदाचन्द्रतारकम्।।14।। अकृत्वा रामनवमीव्रतं सर्वोत्तमोत्तमम्। व्रतान्यन्यानि कुरुते न तेषां फलभाग् भवेत्।।15।। सर्वव्रतस्य प्रीत्यर्थमिदं श्रीरामव्रतं चरेत्। रहस्यकृतपापानि प्रख्यातानि बहून्यपि। महान्ति विप्रणश्यन्ति श्रीरामनवमीव्रतात्।।16।। जो रामनवमी के दिन भोजन करते हैं, वे मनुष्यों में अधम बन जाते हैं और कुम्भीपाक नरक का ताप भोगते हैं, इसमें सन्देह नहीं है। तीनों लोकों में पाप के भागी होते हैं, उनका अपना धर्म निष्फल हो जाता है। जो नराधम श्रीराम की नवमी तिथि का अनादर कर भोजन कर लेते हैं वे चन्द्रमा और नक्षत्रों के विद्यमान रहने तक नरक का भोग करते हैं। सभी व्रतों में उत्तम रामनवमी का व्रत न कर जो दूसरे व्रत करते हैं, उन्हें उन अन्य व्रतों का फल नहीं मिलता सभी व्रतों की प्रीति के लिए श्रीराम का व्रत करना चाहिए। इसे करने से गुप्त रूप से या प्रकट रूप से किये गये सभी महान् पाप नष्ट हो जाते हैं।