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अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

Agastya Samhita of Sage Agastya with Commentary

महर्षि अगस्त्य / पं. भवनाथ झा द्वारा

DevanagariSanskritpublished337 पृष्ठ

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पृष्ठ 267

(206) अगस्त्य-संहिता रामनवमी के दिन आलस्य छोड़कर उपवास करे, तो वह पुनः माता का गर्भ प्राप्त नहीं करता है और श्रीराम-स्वरूप हो जाता है। नवमी चाष्टमी विद्धा त्याज्या रामपरायणैः।¹ उपोषणं नवम्यां वै दशम्यामेव पारणम्।।13।। श्रीराम में परायण भक्तों के द्वारा अष्टमीविद्धा नवमी का त्याग करना चाहिए और नवमी में उपवास कर दशमी में पारणा करनी चाहिए। नीलोत्पलदलश्यामं पीताम्बरधरं विभुम्। द्विभुजं कञ्जनयनं दिव्यसिंहासने स्थितम्।।14।। वसिष्ठाद्यैश्च परितो वृतं रत्नकिरीटिनम्। सीतासंलापचतुरं दिव्यगन्धादिशोभितम्।।15।। चापद्वयकरेणारात्² सेवितं लक्ष्मणेन च। शत्रुघ्नभरताभ्यां च पार्श्वयोरथ सेवितम्।।16।। ध्यायन्ननन्यहृद्रामं द्वादशाक्षरमन्वहम्। प्रजपेद् दीक्षितो नित्यं श्रीरामन्यासपूर्वकम्।।17।। मन्त्रसन्ध्यां विधायैव त्रिकालं पूजयेत् सदा।।18।। नीलकमल के समान श्यामल वर्ण वाले, पीताम्बरधारी, दो हाथों वाले, कमलनयन, दिव्य सिंहासन पर स्थित, वसिष्ठ आदि पार्षदों से चारो ओर से घिरे हुए, रत्न का मुकुट धारण करनेवाले, श्रीसीता के साथ आलाप करने में चतुर, दिव्य चन्दन आदि से शोभित दो धनुष हाथ में लिए हुए लक्ष्मण द्वारा दूर से सेवित, दोनों पार्श्वों में शत्रुघ्न और भरत से सेवित प्रभु श्रीराम का हृदय में अनन्य भाव से ध्यान करते हुए प्रतिदिन श्रीराम के द्वादशाक्षर मन्त्र का जप श्रीराम का न्यास कर, मन्त्र सन्ध्या करके ही करें और तीनों कालों में हमेशा पूजा करें। सुतीक्ष्ण उवाच भगवन् योगिनां श्रेष्ठ सर्वशास्त्रविशारद। किं तत्त्वं किं परं जाप्यं किं ध्यानं मुक्तिसाधनम्। ज्ञातुमिच्छामि तत्सर्वं ब्रूहि मे मुनिसत्तम।।19।। सुतीक्ष्ण ने पूछा- हे भगवान् अगस्त्य! आप योगियों में श्रेष्ठ हैं, सभी शास्त्रों का ज्ञान रखते हैं। हे मुनिश्रेष्ठ! मैं जानना चाहता हूँ कि तत्त्व क्या है? जप का परम मन्त्र क्या है ध्यान क्या है और मुक्ति का उपाय क्या है? यह सब मुझे कहें।

  1. यह श्लोक धर्मशास्त्रीय ग्रन्थों में 'विष्णुपरायणैः' पाठान्तर के साथ उपलब्ध है।
  2. ग. चापबाणकरेणारात्।
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