भारतकोश
अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

Agastya Samhita of Sage Agastya with Commentary

महर्षि अगस्त्य / पं. भवनाथ झा द्वारा

DevanagariSanskritpublished337 पृष्ठ

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पृष्ठ 274

एकोनत्रिंशोऽध्यायः (213) अग्रहण अथवा वैशाख मास की पूर्णिमा को चन्द्र तारा आदि के बली होने पर मूल आदि नक्षत्र-दोष न रहने पर विधानपूर्वक श्रीराम की प्रतिष्ठा करें। प्रयत्न कर विधान से अपनी शक्ति के अनुसार भक्ति के साथ स्थापना करें। गोपालस्य प्रतिष्ठायां श्रावणं शस्यते सदा। नृसिंहानां तु वैशाखे केशवस्यापि शस्यते।।20।। चैत्रे तु रामचन्द्रस्य माघे वापि बलान्विते। अनन्तस्यापि माघे स्यादन्येषां च यथारुचि ।।21।। श्रीकृष्ण की स्थापना में श्रावण मास, नृसिंह और केशव आदि की स्थापना में वैशाख प्रशस्त मास हैं। श्रीराम की स्थापना चैत्र मास में और चन्द्रतारा आदि बली रहे तो माघ में एवं अनन्त भगवान् की स्थापना माघ में करें। अन्य देवताओं की स्थापना अपनी रुचि के अनुसार करें। सर्वकालेषु सर्वत्र प्रतिष्ठाप्यो रघूत्तमः। न लग्नं न तिथिवारो न नक्षत्रबलं न च ।।22।। सभी कालों में, किसी भी स्थान पर श्रीराम की स्थापना करें, इसके लिए, लग्न, तिथि, दिन और नक्षत्र के बल की गणना अपेक्षित नहीं है। चैत्रशुद्धनवम्यां च स्थाप्यो रामो मुमुक्षुभिः। सर्वान् कामानवाप्नोति माघे शुभबलान्विते ।।23।। कुर्यात् श्रीरामचन्द्रस्य प्रतिष्ठां वै नरोत्तमः। मार्गशीर्षे च वैशाखेऽप्येवमेव यथाविधिः।।24।। मोक्ष चाहनेवाले चैत्र शुक्ल नवमी को श्रीराम की स्थापना करें। इससे उनकी सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। माघ मास में चन्द्र और तारा का शुभ बल देखकर मनुष्यों में श्रेष्ठ श्रीराम की स्थापना करें। अग्रहण और वैशाख में भी यही नियम है। सूर्यग्रहे महापुण्ये कुरुक्षेत्रे विधानतः। कृतैर्यत्पुण्यमाप्नोति तुलापुरुषाकादिभिः ।।25।। तत्पुण्यं प्राप्नुयान्मर्त्यः प्रतिष्ठाप्य रघूत्तमम्। यः कुर्याद्रामचन्द्रस्य प्रतिष्ठां विधिवन्नरः।।26।। ऐहिकानखिलान् भोगान् भुक्त्वा नारायणो भवेत्।