अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)
Agastya Samhita of Sage Agastya with Commentary
महर्षि अगस्त्य / पं. भवनाथ झा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें(34) अगस्त्य-संहिता हेन्स बेकर ने अपनी पुस्तक 'अयोध्या' में अगस्त्य-संहिता से अनेक श्लोकों को उद्धृत किया है तथा इस आधार पर रामोपासना की प्रक्रिया का विशद विवेचन किया है, इस क्रम में उन्होंने 33वें अध्याय से भी अनेक श्लोकों को उद्धृत किया है। हेन्स बेकर ने चूँकि रामनारायण दास द्वारा सम्पादित एवं 1998 ई. में लखनऊ से प्रकाशित 'अगस्त्य-सुतीक्ष्ण संवाद' ग्रन्थ का उपयोग किया है, अतः हेन्स बेकर द्वारा उद्धृत 33वाँ अध्याय रामनारायण दास द्वारा सम्पादित 'अगस्त्य- संहिता' का मूल भाग माना जा सकता है, किन्तु इस 33वें अध्याय का विवेचन इस दृष्टि से आवश्यक है कि यह ग्रन्थ का मूल अंश है या परवर्ती प्रक्षेप है। इस विषय पर विचार करने से पूर्व इस 33वें अध्याय के कुछ श्लोक यहाँ उद्धृत किये जाते हैं, जिन्हें हेन्स-बेकर ने संकलित किया है- ॐ नमो भगवते श्रीरामाय परमात्मने। सर्वभूतान्तरस्थाय ससीताय नमो नमः॥42॥ ॐ नमो भगवते श्रीरामचन्द्राय व्यापिने। सर्ववेदान्तवेद्याय ससीताय नमो नमः॥43॥ ॐ नमो भगवते श्री विष्णवे परमात्मने। परात्पराय रामाय ससीताय नमो नमः॥44॥ ॐ नमो भगवते श्रीरघुनाथाय शार्ङ्गिणे। चिन्मयानन्दरूपाय ससीताय नमो नमः॥45॥ ॐ नमो भगवते श्रीरामकृष्णाय चक्रिणे। विशुद्धज्ञानदेहाय ससीताय नमो नमः॥46॥ ॐ नमो भगवते श्रीवासुदेवाय विष्णवे। पूर्णानन्दैकरूपाय ससीताय नमो नमः॥47॥ ॐ नमो भगवते श्रीरामभद्राय वेधसे। सर्वलोकशरण्याय ससीताय नमो नमः॥48॥ ॐ नमो भगवते श्रीरामायामिततेजसे। ब्रह्मानन्दैकरूपाय ससीताय नमो नमः॥49॥ विशुद्धज्ञानदेहाय रघुनाथाय विष्णवे। अन्तःकरणसंशुद्धिं देहि मे रघुवल्लभ॥50॥