अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)
Agastya Samhita of Sage Agastya with Commentary
महर्षि अगस्त्य / पं. भवनाथ झा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्रस्तावना (35)
नमो नारायणानन्त श्रीराम करुणानिधे। मामुद्धर जगन्नाथ घोरसंसारसागरात् ।।51।। रामचन्द्र महीपाल शरणत्राणतत्पर। त्राहि मां सर्वलोकेश तापत्रयमहार्णवात् ।।52।। श्रीकृष्ण श्रीधर श्रीश श्रीराम श्रीनिधे हरे। श्रीनाथ श्रीमहाविष्णो श्रीनृसिंह कृपानिधे ।।53।। गर्भजन्मजराव्याधिघरसंसारसागरात् । मामुद्धर जगन्नाथ कृष्ण विष्णो जनार्दन ।।54।। इन श्लोकों की शैली, भाषा तथा कथ्य के आधार पर स्पष्ट है कि ये परवर्ती पाठ हैं, जो 'अगस्त्य-संहिता' के मूल अंश के आधार पर पौरोहित्य कर्म में सुविधा के लिए रचे गये प्रक्षेप हैं। इसी 33वें अध्याय से हेन्स बेकर ने अनेक ऐसे मन्त्रों का भी उल्लेख किया है, जो 18वें अध्याय में भी हैं। इस प्रकार सम्पूर्ण 33वाँ अध्याय 'अगस्त्य-संहिता' का व्यावहारिक अध्याय है, जो कर्मकाण्ड कराने में सुविधा की दृष्टि से बाद में किसी पुरोहित के द्वारा रचे गये हैं। इसी प्रकार 'अगस्त्य-संहिता' से ली गयी 'रामनवमी व्रत कथा' 'अगस्त्य- संहिता' के दाय के रूप में उपलब्ध है। रामनवमी व्रत कथा की दो पाण्डुलिपियाँ मेरे अधिकार में हैं। दोनों उत्तर मिथिला की प्राचीन लिपि मिथिलाक्षर अथवा तिरहुता में हैं। दोनों में की पुष्पिका में इत्यगस्त्यसंहितोक्ता रामनवमीकथा समाप्ता का उल्लेख है। दोनों में पूजा पद्धति में पर्याप्त भिन्नता है, किन्तु कथा पाठान्तर होने के बाद भी एक है। इन दोनों पाण्डुलिपियों के आधार पर रामनवमी व्रत कथा का सम्पादन कर यहाँ परिशिष्ट 3 के रूप में प्रकाशित है। इन दोनों पाण्डुलिपियों का विवरण क्रमशः इस प्रकार है- पाण्डुलिपि 'अ' नाम – रामनवमीव्रतकथा प्राप्ति-स्थान – हटाढ़ रुपौली, झंझारपुर, मधुबनी स्वत्व – पं. भवनाथ झा आधार – हस्तनिर्मित वसहा कागज । आकार – 28 से. मी. लम्बाई एवं 9.5 से. मी. चौड़ाई । लिखित स्थान – 23 से. मी. लम्बाई एवं 5.5 से. मी. चौड़ाई ।