भारतकोश
अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

Agastya Samhita of Sage Agastya with Commentary

महर्षि अगस्त्य / पं. भवनाथ झा द्वारा

DevanagariSanskritpublished337 पृष्ठ

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पृष्ठ 38

(36) अगस्त्य-संहिता पत्र सं. - 7 पृष्ठ सं. - 12 प्रति पृष्ठ पंक्ति सं.- 8 प्रति पंक्ति अक्षर संख्या - 44-45 लिपि - मिथिलाक्षर या तिरहुता लिपिकार - वधू शर्मा लिपिकाल - सन् 1262 साल (अर्थात् 1854-55 ई.)। आरम्भ - अथ रामनवमीपूजाविधिः। सुवर्णप्रतिमां कारयित्वा मृण्मयं वा प्रातः कृतनित्यक्रियः---। अन्त- इत्यगस्त्यसंहितोक्ता रामनवमीव्रतकथा समाप्ता। ॐ यदक्षरेत्यादि। ॐ नममस्ससीतारामलक्ष्मणाभ्याम्। सन् 1262 साल चैत्रकृष्णषष्ठ्यां शुक्रे। लिखितमिदं श्रीरामनवमीकथापूजापुस्तकम्। श्री बच्छूशर्म्मणे द्विजः।(?) पाण्डुलिपि 'आ' नाम रामनवमीव्रतकथा प्राप्ति-स्थान - हटाढ़ रुपौली, झंझारपुर, मधुवनी स्वत्व - पं. भवनाथ झा आधार - ब्रिटिशकालीन कागज। आकार - 22 से. मी. लम्बाई एवं 9 से. मी. चौड़ाई। लिखित स्थान - 16.5 से. मी. लम्बाई एवं 6 से. मी. चौड़ाई। पत्र सं. - 16 पृष्ठ सं. - 30 प्रति पृष्ठ पंक्ति सं.- 7 प्रति पंक्ति अक्षर संख्या - 26-29 लिपि - मिथिलाक्षर या तिरहुता लिपिकार - अज्ञात लिपिकाल - सन् 1287 साल (अर्थात् 1879-80 ई.)। आरम्भ - राम 1 प्र : सु. सीता 1 प्रः सु.। अन्त- इत्यगस्त्यसंहितोक्ता रामनवमीव्रतकथा समाप्ता। ॐ यदक्षरेत्यादि। ॐ नममस्ससीतारामलक्ष्मणाभ्याम्। सन् 1287 साल चैत्रशुक्लद्वितीयायां लिखित्।(?)