भारतकोश
अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

Agastya Samhita of Sage Agastya with Commentary

महर्षि अगस्त्य / पं. भवनाथ झा द्वारा

DevanagariSanskritpublished337 पृष्ठ

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प्रस्तावना (37)

इसी प्रकार सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के सरस्वती भवन पुस्तकालय में अगस्त्य-संहिता के नाम से एक अपूर्ण पाण्डुलिपि सुरक्षित है, जिसमें एकतालीसवाँ अध्याय पूर्ण है। इस पाण्डुलिपि का विवरण इस प्रकार है- । नाम अगस्त्य-संहिता प्राप्ति-स्थान - सरस्वती भवन पुस्तकालय, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी। प्रवेश संख्या - 104571 विषय - पुराणेतिहास आधार - कागज । आकार - 5.5 इंच लम्बाई एवं 4.5 से. मी. चौड़ाई । पत्र सं. - 11 पत्रांक - 31-41 पृष्ठ सं. - 22 प्रति पृष्ठ पंक्ति सं. - 8 प्रति पंक्ति अक्षर संख्या - 21-23 लिपि - देवनागरी लिपिकार - अज्ञात लिपिकाल - अज्ञात आरम्भ - १ श्रीरामचन्द्राभ्यां नमः । श्रुतिरुवाच । अन्त- श्रीअगस्त्यसंहितायामेकचत्वारिंशोध्यायः । यद्यपि इस पाण्डुलिपि पत्रांक 31 से आरम्भ है, अतः प्रथम दृष्ट्या खण्डित प्रतीत होती है और अपेक्षा की जाती है कि इसके पूर्व और परवर्ती पृष्ठ कभी थे किन्तु वे नष्ट हो गये हैं। किन्तु गहन विवेचन करने पर यह पाण्डुलिपि स्वतन्त्र एवं पूर्ण प्रतीत होती है। इस अध्याय के आरम्भ में १श्रीरामचन्द्राभ्यां नमः है तथा यह पंक्ति पत्र के ऊपरी भाग से आरम्भ है, अर्थात् इसके पूर्व 40वें अध्याय का अन्त नहीं हुआ है। संख्या 1 भी इस बात का संकेत करती है कि लिपिकार ने पाण्डुलिपि का आरम्भ यहीं से स्वतन्त्र रूप में किया है, न कि विशाल ग्रन्थ के साथ अविच्छिन्न रूप में। पाण्डुलिपि का अन्त पृष्ठ के आधे भाग पर हुआ है, जिसके बाद पृष्ठ रिक्त है। यदि इसके बाद भी 42 अध्याय होता तो पाण्डुलिपि लेखन की शैली के अनुरूप उसी स्थान से लेखन आरम्भ होता अथवा इसी 41वें

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