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अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

Agastya Samhita of Sage Agastya with Commentary

महर्षि अगस्त्य / पं. भवनाथ झा द्वारा

DevanagariSanskritpublished337 पृष्ठ

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अगस्त्य-संहिता सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में 'अगस्त्य-संहिता' की अनेक पूर्ण-अपूर्ण पाण्डुलिपियाँ उपलब्ध हैं; उनमें से एक पाण्डुलिपि 'अगस्त्य-संहिता' के 41वें अध्याय की बतलायी गयी है; स्पष्टतः यह किसी परवर्ती कवि की रचना है। इस 'अगस्त्य-संहिता' में किसी विद्वान् ने 5 अध्यायों का प्रक्षेप जोड़ा. है, जिसे 'अगस्त्य-संहिता' के उत्तर-खण्ड में 131वें से 135वें अध्याय का बतलाया गया है। इसे पहले भविष्योत्तर-खण्ड का बतलाया गया था। किन्तु 'अगस्त्य-संहिता' में भविष्य या भविष्योत्तर-खण्ड है या नहीं, यह विवेच्य है। वस्तुतः यह ग्रन्थ खण्डों में विभक्त है ही नहीं। इसमें 32 या अधिकतम 33 अध्याय हैं। फिर 131 से 135 अध्याय कहाँ से टपक पड़े? और बीच के अध्याय कहाँ लुप्त हो गये? बलभद्र दास ने लिखा है कि जिसने पाँच अध्यायों का यह क्षेपक जोड़ा है, उसने 'अगस्त्य-संहिता' का दर्शन भी नहीं किया था। मैं भी इससे सहमत हूँ। उसे इतना ही ज्ञात था कि यह संहिता अगस्त्य-सुतीक्ष्ण संवाद के रूप में है; क्योंकि 'अगस्त्य-संहिता' को 'अगस्त्य-सुतीक्ष्ण संवाद' के नाम से भी जाना जाता था। सचमुच, प्रक्षेपक को 'अगस्त्य-संहिता' का दर्शन हुआ होता, तो वह प्रक्षिप्त अंश को 33वें अध्याय से प्रारम्भ करता! किन्तु इस अंश का प्रक्षेपक कौन है? क्या यह गुजरात-राजस्थान की कारयित्री प्रतिभा की परिणति है? या पं० रामनारायण दास हैं, जिन्होंने 1898 ई० में 'अगस्त्य-संहिता' का प्रकाशन लखनऊ से किया था और 1906 ई० में 'रामानन्द जन्मोत्सव कथा' के नाम से पुस्तक का सम्पादन किया था, जिसमें 'वैश्वानर संहिता' और 'श्रीरामानन्दभवोत्सा्राष्टकम्' भी समाविष्ट थे। इस पुस्तक में पण्डित रामनारायण दास ने लिखा था कि यह 'रामानन्दजन्मोत्सव कथा' 'अगस्त्य-संहिता' के भविष्य खण्ड में 131-135 अध्यायों में वर्णित है। इस पुस्तक को डाकोर, गुजरात के वैष्णवरामदासजी ने मुंबई से 1906 ई. में छपवाया। प्रसिद्ध इतिहासकार डी.आर. भण्डारकार ने अपनी पुस्तक 'वैष्णविज्म, शैविज्म एण्ड माइनर रिलीजियस सिस्टम्स' में पहली बार यह लिखा कि उन्हें रामानन्दाचार्य के जन्म की तिथि प्रामाणिक स्रोत से प्राप्त हो गयीं है और इस स्रोत का नाम 'अगस्त्य-संहिता' बतलाया। तबसे इस देश के अधिकतर लेखकों एवं समीक्षकों ने मूल स्रोत की जाँच किये बिना रामानन्दाचार्य का जीवन-वृत्त 'अगस्त्य-संहिता' के फर्जी अंश के आधार पर प्रस्तुत किया है। किन्तु पं. रामनारायण दास इस फर्जी अंश के प्रक्षेपक नहीं हो सकते; क्योंकि उन्हें यदि यह अंश जोड़ना होता, तो 1898 ई. में ही इसका सम्पादन करते समय जोड़ देते। किन्तु 1898 ई. में उनके द्वारा सम्पादित 'अगस्त्य-संहिता' में कोई प्रक्षेप