भारतकोश
ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation

महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा

स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished592 पृष्ठ

पृष्ठ 283, कुल 592 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 283

पाँचवाँ अध्याय ] २६९ इनके पहले पाद में देवतों का नाम आया है । यह पहले दिन का रूप है । मरुत्वतीय प्रगाथ यह है:— प्र व इन्द्राय बृहते मरुतो ब्रह्मार्चत । वृत्रं हनति वृत्रहा शतक्रतुर्वज्रेण शतपर्वणा ॥ अभि प्र भर धृषता धृषन्मनः श्रवश्चित्ते असद् बृहत् । अर्षन्त्वापो जवसा वि मातरो हनो वृत्रं जया स्वः॥ (ऋ० ८।८६।३-४) इसमें 'प्र' आया है । यह पहले दिन का रूप है । निविद् सूक्त यह है:— आ यात्विन्द्रो वस उप न इह..........इत्यादि । (ऋ० ४।२१) इसमें 'आ' है, यह पहले दिन का रूप है । रथतंतर पृष्ठ यह है :— अभि त्वा शूर नोनुमोऽदुग्धा इव धेनवः । ईशानमस्य जगतः स्वदृशमीशानमिन्द्र तस्थुषः ॥ न त्वावाँ अन्यो दिव्यो न पार्थिवो न जातो न जनिष्यते । अश्वायन्तो मघवन्निन्द्र वाजिनो गव्यन्तस्त्वा हवामहे ॥ (ऋ० ७।३२।२२-२३) अभित्वा पूर्वपीतय इन्द्रस्तोमेभिरायवः । समीचीनास ऋभवः समस्वरन् रुद्रा गृणन्त पूर्व्यम् ॥ अस्येदिन्द्रो वावृधे वृष्ण्यं शवो मदे सुतस्य विष्णवि । अद्या तमस्य महिमानमायवोऽनुष्टुवन्ति पूर्वथा ॥ (ऋ० ८।३।७-८) यह रथंतर पृष्ठ है, यह पहले दिन का रूप है । धाय्य यह है :— “यद् वावानपुरुतमं पुराषाड्” । (ऐतरेय ब्रा० ३।२२) इसमें 'आ' आया है । यह पहले दिन का रूप है । साम प्रगाथ यह है :— पिबा सुतस्य रसिनो मत्स्वा न इन्द्र गोमतः । आपिनो बोधि सधमाद्यो वृधे३ऽस्माँ अवन्तु ते धियः ॥