भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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मलखानका विवाह । १७५ १६ लाग घुमावन तब खंभा को क्षत्री गये सनाकाखाय ४६ लात मारिकै इक छत्री को ताकी लीन ढाल तलवार ॥ मलखे ठाकुर के मारुन में आँगन बही रक्तकी धार ५० सिंह गरज्जनि मलखे गर्जे इत उत हनें बीर दश पांच ॥ जितने कायर रहें आँगन में देखत ढीलिहोइ तिन कांच ५१ फिरि फिरि मारै औ ललकारै नाहर समरधनी मलखान ॥ लरि लरि गिरिगे कितन्यो छत्री भारी लाग तहाँ खरिहान ५२ जैसे भेड़िन भेड़हा पैठै जैसे अहिर बिडारै गाय ॥ तैसे मलखे के मुर्चा में कोउ राजपूत न रोके पायँ ५३ सूरज ठाकुर तहँ पाछे सों कम्मरपकरिलीन फिरिआय ॥ बहुतक छत्री यकमिल हैकै बन्धन फेरि लीन करवाय ५४ त्यालिया खंदक में गजराजा फिरि मलखे को दीन डराय ॥ हाल पायकै फुलिया मालिनि बेटी पास पहुंची जाय ५५ कही हकीकत सब मलखे की मालिनि बार बार तहँ गाय ॥ सुनिसुनिबातें तहँ मालिनिकी बेटी बार बार पछिताय ५६ तुम्हें विधाता अस चहिये ना जैसी कीन हमारे साथ ॥ बड़े दयालू औ बरदाता हमपर कृपाकरो रघुनाथ ५७ फिरि फिरि बिनवै रघुनन्दनको धरिकै भूमि आपनो माथ ॥ कैसे देखैं हम बालम को मालिनि फेरिकहौ यहगाथ ५८ सुनिकै बातें गजमोतिनिकी मालिनिकही कथा समुझाय ॥ दिवस बीतिगा इन बातन में संध्याकाल पहुंचा आय ५६ थार मँगायो तब चाँदी का भोजन सबै लीन धरवाय ॥ चाँदी केरे फिरि लोटा में निर्मल पानी लीन भराय ६० पाँच पान को बीरा लैके रेशम रस्सी लीन मँगाय ॥