भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

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ब्रह्माका विवाह । २३५ १६ लालति तुम्हरे मन चब्बन को तुमका बार बार धिक्कार ८० त्यही समैया ऊदन चलिभा सबसों बिदा मांगि त्यहिबार ॥ चढ़ा पालकी ब्रह्मा ठाकुर ऊदन बेदुल भा असवार ८१ आयकै पहुंचे दूउ लश्कर में जहाँ दरबार चँदेले क्यार ॥ हाथ पकरिकै ब्रह्मा ऊदन तम्बुन गये दोऊ सरदार ८२ चरणन परिकै परिमालिक के बैठे दूऊ बीर बलवान ॥ पूंछन लागे बघऊदन ते तुरतै तहाँ बीर मलखान ८३ कहौ हकीकति सब महलनकी कैसी भई रीति ब्यवहार ॥ सुनिकै बातें मलखाने की कहिगा यथातथ्य सरदार ८४ सुनिकै बातें बघऊदन की आल्हा ठाकुर लीन बुलाय ॥ कमर बिलोकै बघऊदन की कैसा परा कटारी घाय ८५ चिह्न न पायो कहूं घाव को आल्हा बोल्यो बचनसुनाय ॥ झूठ न बोलत तुम ऊदन रहौ कैसी किह्यो दिल्लगी भाय ८६ ब्रह्मा बोले तब आल्हा ते दोऊ हाथ जोरि शिरनाय ॥ साँची दादा ऊदन बोल्यो झूठ न कह्यो लहुरवाभाय ८७ लीन्हे बूटी रानी आई सो ऊदन के दिह्यो लगाय ॥ घाव पूरिगा बघऊदन का औ उठि बैठ लहुरवा भाय ८८ सुनिकै बातें ब्रह्मानँद की गे परिमाल सनाकाखाय ॥ कूच कराओ अब लश्कर को बोला फेरि चँदेलाराय ८९ बातें सुनिकै महराजा की मलखे रुपना लीन बुलाय ॥ औ समझायो यह रुपना को यह तुम कहौ पिथौ रैजाय ९० कह्यो सँदेशा परिमालिक है बेटी बिदा देयँ करवाय ॥ इतना सुनिकै रुपना चलिभा औफिरि अटा द्वारपरजाय ९१ द्वारे ठाढे पिरथी राजा तिनसों बोला शीश नवाय ॥