अनुरागसागर वाणी
Anuragsagar Vani
स्वामी मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
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साहिब बन्दगी
अद्या को भी मिला शाप
नीचहि ऊँच सिताय, बदल मोहि सो पावई ॥
द्वारपर युग जब आय, तुमहुँ पंच भतारि हो ॥
निरंजन ने कहा कि आगे भी जो कोई बलवान निर्बल को सतायेगा, मैं उसे बदले में दुख दूगाँ, और अद्या को शाप दिया कि जब द्वारपर युग आयेगा जो द्रोपती (गायत्री) के पाँच पति होंगे वो आपके (आद्या शक्ति) पुत्र होंगे और बिना बाप के होंगे।
शाप ओयल जब सुनेउ भवानी। मन सन गुने कहा नहिं बानी ॥
ओयल प्रभाव शाप हम पाया। अब कहा निरंजन राया ॥
तोरै बस परी हम आई। जस चाहो तस करो उपाई ॥
बदले में निरंजन की आकाशवानी सुन अद्या चुप रह गयी और मन ही मन कहने लगी कि शाप के बदले में मैंने शाप पाया, पर मैं तो तेरे वश में हूँ, इसलिए जो तेरी इच्छा है, वही कर।
मन ही सख्यी देव निरंजन, तोहि रहा भरमाई। पांच पचीस तीन का पिंजड़ा, जामें तोहि राखा भरमाई॥