भारतकोश
अनुरागसागर वाणी

अनुरागसागर वाणी

Anuragsagar Vani

स्वामी मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

Devanagarihipublished144 पृष्ठ

पृष्ठ 75, कुल 144 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 75

चार खानि के तत्व भेद

धर्मदास ने पूछा

धर्मदास नायो पद शीशा। यह समुझाय कहो जगदीशा॥

सकल योनि जिव एक समाना। किमि कारण नहिं इक सम ज्ञाना॥

सो चरित्र मुहि कहौ बुझाई। जाते चित संशय मिट जाई॥

धर्मदास ने पूछा-हे सदगुरु! सभी योनियों में यदि एक ही जीव है तो क्या कारण है कि सबमें एक समान ज्ञान नहीं है?

साहिब ने कहा

चार खानि जिव एकै आहीं। तत्व वशेष अहैं सुन ताहीं॥

सो अब तुमसों कहो बखानी। तत्व एक अस्थावर जानी॥

ऊष्मज दौय तत्व परमाना। अंडज तीन तत्वगुणजाना॥

पिंडज चार तत्व गुण कहिये। पाँच तत्व मानुष तन लहिये॥

तासों होय ज्ञान अधिकारी। नर की देह भक्ति अनुसारी॥

साहिब ने कहा कि यद्यपि चारों खानि में एक ही जीव है, पर तत्वों के कारण सबमें कम-ज्यादा ज्ञान है, चेतना है। अस्थावर खानि के जीवों की रचना एक तत्व से हुई है, उकमज में दो तत्व हैं, अंडज में तीन तत्व हैं, पिंडज में चार तत्व हैं और मनुष्य में पाँचों तत्व हैं। इसी कारण मनुष्य में ज्ञान अधिक है, यह भक्ति-ध्यान के अनुकूल है।

धर्मदास ने पूछा

हे साहिब मुहि कहु समुझाई। कौन कौन तत्व इन सब पाई॥

अंडज अरु पिंडज के संग। ऊष्मज और अस्थावर अंगा॥

75