अर्थसंग्रह (लौगाक्षि भास्कर - पूर्वमीमांसा न्याय एवं धर्म-मीमांसा सटीक)
Arthasangraha of Laugakshi Bhaskara with Hindi Commentary
लौगाक्षि भास्कर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंदीपिकाटीकासहितः । ४५ त्वाज्ज्योतिष्टोमविकारः । अतस्ते त्रयोऽपि पशुयागाः साद्यस्के चोदकप्राप्ताः । तेषां च तत्र साहित्यं श्रुतं 'सह पशूनालभेत' इति । तच्च साहित्यं सवनी- यदेशे, तस्य प्रधानप्रत्यासत्तेः, स्थानातिक्रमसाम्याच्च । विकृति याग में आश्विनग्रहण के बाद ही सवनीय याग का स्थान है यह बत- लाने के लिये याग का पहले प्रकृति याग में सवनीय स्थान बतलाते हैं—ज्योतिष्टोम में तीन पशुयाग हैं—अग्नीषोमीय, सवनीय और आनुबन्ध्य । इन तीनों यागोंके अलग २ देश हैं । जैसे औपवसथ्यनामकदिनमें अग्नीषोमीयका और सुत्याकाल में सवनीयका तथा अवभृथके बाद आनुबन्ध्यका विधान है । साद्यस्क सोमयाग का नाम है । साद्यस्कमें किसी देवताका निर्देश नहीं है अतः यह याग ज्योतिष्टोम का विकृतियाग है । इसलिये “प्रकृतिवद् विकृतिः कर्तव्या” इस अतिदेशसे साद्यस्क यागमें भी पूर्वोक्त तीनों पशुयाग प्राप्त होते हैं । साद्यस्क यागमें ( सह पशूनालभेत ) इस वचनसे उन तीनों पशुयागोंमें साहित्य का श्रवण होता है । वह साहित्य सवनीयदेशमें ही होगा क्योंकि जैसे ज्योतिष्टोमरूपप्रकृति यागमें सुत्या ( सोमरस निकालनेका ) समयकालिक सवनीय को प्रधान ( सोम ) के साथ प्रत्यासत्ति ( सम्बन्ध ) है उसी तरह विकृति साद्यस्क यागमें भी सुत्याकालिक सवनीयका प्रधान ( सोम ) के साथ प्रत्यासत्ति है और सवनीयदेशमें साहित्य होनेसे ( केवल अग्नीषोमीय और आनुबन्ध्यके ही स्वस्व- स्थानका अतिक्रमण होता है । अतः साद्यस्कमें भी तीनोंका स्थान सवनीयदेश ( सुत्याकाल ) ही माना जाता है । सवनीयदेशे ह्यनुष्ठानेऽग्नीषोमीयानुबन्ध्ययोः स्वस्वस्थानातिक्रमो भवति ( प्रधानप्रत्यासत्तिलाभश्च । ) अग्नीषोमीयदेशे त्वनुष्ठाने सवनीयस्य स्व- स्थानातिक्रममात्रम् । अग्नीषोमीयस्य सवनीयस्थानातिक्रमः अनुबन्ध्यस्य तु स्वस्थानातिक्रमः सवनीयस्थानातिक्रमश्च स्यादिति त्रयाणां स्वस्वस्था- नातिक्रमः । एवमनुबन्ध्यदेशेऽग्नीषोमीयस्य द्रष्टव्यः स्थानातिक्रमः । तथा च सवनीयदेशे सर्वेषामनुष्ठाने कर्तव्ये सवनीयस्य प्रथममनुष्ठानम् । आश्विनग्रहणानन्तरं हि सवनीयदेशः । उक्त स्थानातिक्रममें लाघव बतलाते हैं, सवनीयदेश (सुत्याकाल)में अनुष्ठान करनेसे केवल अग्नीषोमीय और आनुबन्ध्यके ही अपने २ स्थानका अतिक्रमण