भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

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२४ भाषार्थसहिता ॥

नाग्निंमुखेनेतिचयलौकिकेयोजयन्तितत् ॥ १५ ॥ इति कात्यायनस्मृतौ नवमः खंडः ॥ ९ ॥

यथाहनितथाप्रातर्नित्यंस्नायादनातुरः । दन्तान्प्रक्षालयनद्यादौ गृहेचेत्तदमन्त्रवत् ॥ १ ॥ नारदाद्युक्तवृक्षांयदष्टाङ्गुलमपाटितम् । सत्वचंदन्तकाष्ठंस्यात्तदग्रेणप्रधावयेत् ॥ २ ॥ उत्थायनेत्रेप्रक्षाल्य शुचिर्भूत्वासमाहितः । परिजप्यचमन्त्रेण भक्षयेद्दन्तधावनम् ॥ ३ ॥ आयुर्बलंयशोवर्चः प्रजाःपशून्वसूनिच । ब्रह्मप्रज्ञांचमेधांच तन्नोधेहिवनस्पते ॥ ४ ॥ मासद्वयंश्रावणादिसर्वांनद्योरजस्वलाः । तासुस्नानंनकुर्वीत वर्जयित्वासमुद्रगाः ॥ ५ ॥


को मुख से न फूके ऐसा मनु ने कहा है तो वह मनु जी का कथन लौकिक (साधारण) अग्नि के लिये है ॥ १५ ॥

यह नवां खंड पूरा हुआ ॥ ९ ॥

नीरोग मनुष्य जैसे दिन में स्नान करे तैसे ही प्रातःकाल भी करे नदीआदि के समीप दातौन करके स्नान करे और घर में करे तो मन्त्रों के बिनाहीकरे ॥१॥ नारद आदि ऋषियों ने कहे जो वृक्ष उन की आठ अंगुल लम्बी बिना फटी और वक्कल सहित-दांतौन होनी चाहिये उस के अग्रभाग से दातों को अच्छी तरह शुद्ध करे ॥२॥ प्रातःकाल सोते से उठ कर नेत्रों को धोके सावधानी से शुद्ध होकर और (अन्नाद्यायव्यूहध्वं०) इत्यादि मन्त्र को जप के दातौन करे॥३॥ और वनस्पति से प्रार्थना करे कि हे वृक्ष तू मुझे अवस्था-बल कीर्त्ति तेज,प्रजा, पशु, धन, वेद और उत्तम बुद्धि इन को दे ॥४॥ श्रावण आदि दो महीनों में सब नदी रजस्वला [मलिन जल वाली] होजाती हैं जो नदी समुद्र तक जाती हैं उन को छोड़ कर रजस्वला नदियों में स्नान न करे ॥ ५ ॥