भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

पृष्ठ 353, कुल 805 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 353

२२ पराशरस्मृतिः ॥

जलावगाहनात्तेषां सद्यःशौचंविधीयते ॥ ५० ॥
असगोत्रमबन्धुंच प्रेतीभूतंद्विजोत्तमम् ।
नीत्वाचदाहयित्वाच प्राणायामेनशुद्ध्यति ॥ ५१ ॥
अनुगम्येच्छयाप्रेतं ज्ञातिमज्ञातिमेववा ।
स्नात्वासचैलंस्पृष्ट्वाग्निं घृतंप्राश्यविशुद्ध्यति ॥ ५२ ॥
क्षत्रियंमृतमज्ञानाद् ब्राह्मणोयोऽनुगच्छति ।
एकाहमशुचिर्भूत्वा पञ्चगव्येनशुद्ध्यति ॥ ५३ ॥
शवंचवैश्यमज्ञानाद् ब्राह्मणोह्यनुगच्छति ।
कृत्वाशौचंद्विरात्रंच प्राणायामान्षडाचरेत् ॥ ५४ ॥
प्रेतीभूतंतुयःशूद्रं ब्राह्मणोज्ञानदुर्बलः ।
अनुगच्छेन्नीयमानं त्रिरात्रमशुचिर्भवेत् ॥ ५५ ॥
त्रिरात्रेतुततःपूर्णे नदींगत्वासमुद्रगाम् ।
प्राणायामशतंकृत्वा घृतंप्राश्यविशुद्ध्यति ॥ ५६ ॥
विनिर्वर्त्ययदाशूद्रा उदकान्तमुपस्थिताः ।


कर्म करने में कुछ भी अशुभ वा दोष नहीं है क्योंकि जल में स्नान करने से उन की उसी समय शुद्धि हो जाती है ॥ ५० ॥ जो ब्राह्मण अपने गोत्र का न हो और अपना बन्धु भी न हो वह मरजाय तो श्मशान में ले जा कर और दाह करके प्राणायाम करने से शुद्ध हो जाता है ॥५१॥ अपने कुटुम्ब के वा अन्य कुटुम्ब के मुर्दा के संग जाकर वस्त्रों सहित स्नान, अग्नि का स्पर्श और थोड़ा घी खाकर शुद्ध होता है ॥५२॥ मरे हुए क्षत्रिय के संग जो ब्राह्मण श्मशान में जाता है वह एक दिन अशुद्ध रह कर पञ्चगव्य सेवन करने से शुद्ध होता है ॥५३॥ जो ब्राह्मण मरे हुए वैश्य के संग अज्ञान से जावे वह दो दिन रात का अशौच करके छः प्राणायाम करे ॥ ५४ ॥ जो अज्ञानी ब्राह्मण मरे हुए शूद्र के संग जाता है वह तीन दिन रात अशुद्ध होता है ॥ ५५ ॥ तीन दिन के पीछे जो समुद्र में जाने वाली हो उस नदी में जाके स्नान करे प्राणायाम कर और घी खाके शुद्ध होता है ॥ ५६ ॥ जब श्मशान से लौटकर शूद्र लोग जल के समीप तिलाञ्जलि देने को आवें तब द्विज लोग उन के स-