भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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अत्रिसमृतिः ॥ ४३

बहूनामेकलग्नाना-मेकश्चेदशुचिर्भवेत् । अशौचमेकमात्रस्य नेतरेषांकथंचन ॥ २४१ ॥

एकपंत्युपविष्टानां भोजनेषुपृथक्पृथक् । यद्येकोलभतेनीलीं सर्वेतेऽशुचयःस्मृताः ॥ २४२ ॥

यस्यपट्टेपट्टसूत्रे नीलीरक्तोहिदृश्यते । त्रिरात्रंतस्यदातव्यंशेषाश्चैकोपवासिनः ॥ २४३ ॥

आदित्येऽस्तमितेरात्रा-वस्पृशंस्पृशतेयदि । भगवन्केनशुद्धिःस्या-त्ततोब्रूहितपोधन ! ॥ २४४ ॥

आदित्येऽस्तमितेरात्रौ स्पर्शहीनंदिवाजलम् । तेनैवसर्वशुद्धिःस्यात् शवस्पृष्टंतुवर्जयेत् ॥ २४५ ॥

देशंकालंचवयःशक्तिं पापंचावेक्ष्यतत्वतः । प्रायश्चित्तंप्रकल्प्यंस्याद्यस्यचोक्ताननिष्कृतिः ॥२४६॥


एक फर्से आदि पर बैठे हुए मनुष्यों में से जो एक अशुद्ध होजाय तो वही अशुद्ध होता है अन्य मनुष्य कदाचित् भी अशुद्ध नहीं होते ॥ २४१ ॥ भोजन करने के समय एक पंक्ति में अलग २ बैठे मनुष्यों में जो एक मनुष्य के देह में नील का वस्त्रादि छूजाय तो वे सब अशुद्ध हो जाते हैं ॥ २४२ ॥ और पूर्वोक्त एक पङ्क्ति में बैठे हुओं के बीच में जिस के वस्त्र अथवा पट्ट वस्त्र (दुपट्टा) पर नील का रंग दीख पड़े तो उसे तीन दिन का उपवास और शेष मनुष्यों को एक २ उपवास करना चाहिये ॥ २४३ ॥ हे भगवन् अत्रिजी ! सूर्य के छिप जाने पर रात्रि में यदि स्पर्श करने के अयोग्य वस्तु का स्पर्श क-रले तो किस से शुद्धि हो उस शुद्धि को कहो ॥ २४४ ॥ सूर्य के छिप जाने पर रात्रि में किसी का न छुआ निर्मल जो दिन का जल उसी से सब की शुद्धि होती है किन्तु जिसने मुर्दे का स्पर्श किया हो उसकी शुद्धि जल मात्र से नहीं होती ॥ २४५ ॥ और देश-समय-सामर्थ्य और पाप को भी यथार्थ देखकर उस पाप के प्रायश्चित की कल्पना विद्वान् करले जिस पाप का प्रायश्चित्त शास्त्र में नहीं कहाहो ॥ २४६ ॥