भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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पृष्ठ 603

भाषार्थसहित ॥ ३१

सर्वे चोत्तरोत्तरं परिचरेयुरार्यार्नार्ययोर्व्यतिक्षेपे कर्मणः साम्यं साम्यम् ॥ ५ ॥ इति गौतमीये धर्मशास्त्रे दशमोऽध्यायः ॥ १० ॥ राजा सर्वस्येष्टे ब्राह्मणवर्जं साधुकारी स्यात् साधुवादी त्रय्यामान्वीक्षिक्यां चाभिविनीतः शुचिर्जितेन्द्रियो गुणवत्सहायोऽपायसंपन्नः समः प्रजासु स्याद्धितं चासां कुर्वीत, तमुपर्य़ासीनमधस्तादुपासीरन्नन्ये ब्राह्मणेभ्यस्तेऽप्येनं मन्येरन्, वर्णानाश्रमांश्च न्यायतोऽभिरक्षेच्चलतश्चैनान्स्वधर्मे एव स्थापयेद्धर्म्मस्योऽशभाग्भवतीति विज्ञायते। ब्राह्मणं च पुरोदधीत विद्याभिजनवाग्रूपवयःशीलसंपन्नं न्यायवृत्तं तपस्विनं


सब वर्ण अपने २ से ऊपर २ वर्ण की सेवा करें जैसे साधारण मूर्ख ब्राह्मण विद्वानों की, क्षत्रिय ब्राह्मणों की, वैश्य क्षत्रियों की, और शूद्र वैश्यों की सेवा करें। क्योंकि ब्राह्मणादि और शूद्रादि का अधिक संसर्ग होने से लौट पोट हो कर दोनों के कर्म एक से ही बिगड़ेंगे हानि होगी ॥ ५ ॥ यह गौतमीय धर्मशास्त्र के भाषानुवाद में दशवां अध्याय पूरा हुआ ॥ १० ॥

ब्राह्मण को छोड़कर राजा सबका ईश्वर है। राजा अच्छे निर्दोष काम करे। सत्य और कोमल भाषण करे। तीनों वेदों की त्रयीविद्या और न्याय शास्त्र का अच्छा जानने वाला राजा हो, विनीत स्वभाव रक्खे, पवित्र रहे, जितेन्द्रिय हो, गुणवान् पुरुषों को अपना सहायक बनावे, उन्ही से सलाह सम्मति करे, दानशील हो, प्रजाओं पर समदृष्टि रक्खे, प्रजाओंका हित किया करे, ऊपर गद्दी पर बैठे ( विराजमान ) उस राजा से नीचे सब प्रजा के लोग (ब्राह्मणों को छोड़कर) बैठाकरें। ब्राह्मणलोग भी राजाका मान्य कियाकरें। वर्णों और आश्रमों की राजा न्यायधर्म से सदा रक्षा करे। यदि ब्राह्मणादि वर्ण और ब्रह्मचर्यादि आश्रम अपने कर्त्तव्य से च्युत होते हों तो उनको अपने२ धर्म पर ही स्थापित करे। यदि वर्ण तथा आश्रम अधर्मस्थ हो जांय तो उस अधर्म का भाग राजा को भी लगता है यह वेद में लिखा है। अच्छी वाणी, अच्छेरूप, अच्छी अवस्था और अच्छे स्वभाव वाले, जिसका बर्त्ताव आचार विचार न्यायाानुकूल धर्म युक्त हो ऐसे कुलीन तपस्वी विद्वान् ब्राह्मण