भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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२२ शातातपस्मृतिः॥

रीतिंपलशतंदद्यादलङ्कृत्यद्विजंशुभम् ॥ ४ ॥
मुक्ताहारीचपुरुषो जायतेपिङ्गमूर्द्धजः ।
मुक्ताफलशतंदद्यादुपोष्यसविधानतः ॥ ५ ॥
त्रपुहारीचपुरुषो जायतेनेत्ररोगवान् ।
उपोष्यदिवसंचापि दद्यात्पलशतंत्रपु ॥ ६ ॥
सीसहारीचपुरुषो जायेतशीर्षरोगवान् ।
उपोष्यदिवसंदद्याद् घृतधेनुंविधानतः ॥ ७ ॥
दुग्धहारीचपुरुषो जायतेबहुमूत्रकः।
सद्याद्दुग्धधेनुंच ब्राह्मणावयथाविधि॥ ८ ॥
दधिचौरश्चपुरुषो जायतेमद्गवान्यतः ।
दधिधेनुःप्रदातव्या तेनविप्रायशुद्धये ॥ ९ ॥
मधुचोरस्तुपुरुषो जायतेदांतरोगवान् ।
सद्यान्मधुधेनुंच समुपोष्यद्विजातये ॥ १० ॥
इक्षोर्विकारहारीच भवेद्गुदरुगान्वितः ।


होता है। वह एकादशी के दिन उपवास करके पीतल के चार सेर पात्रों का सुपात्र ब्राह्मण को वस्त्रादि सहित दान करे ॥ ४ ॥ मोती चुरानेवाला पुरुष पीले केशोंवाला होता है। वह एक दिन उपवास करके विधिपूर्वक सौ १०० मोती का दान करे ॥ ५ ॥ रांगा का चुरानेवाला पुरुष नेत्र का रोगी होता वह एक दिन उपवास करके चार सेर रांगे का दान करे ॥ ६ ॥ सीसे का चुरानेवाला शिर के रोग से युक्त होता है वह एक दिन उपवास करके घी की कागद में रखकर विधिपूर्वक घी का दान करे ॥ ७ ॥ दूध चुरानेवाला बहुमूत्ररोग युक्त होता है वह विधिपूर्वक ब्राह्मण को दुग्ध धेनु का दान करे ॥८॥ दही चुराने से मनुष्य मन्द ( मदयुक्त ) होता है उसको अपनी शुद्धि के लिये दधि धेनु का ब्राह्मण के लिये दान देना चाहिये ॥ ९ ॥ शहद चुरानेवाला पुरुष दांत के रोग से युक्त होता है वह एक दिन उपवास करके ब्राह्मण को मधु धेनु देवे ॥ १० ॥ ईख के विकार रस गुड़ आदि को चुरानेवाला