आश्वलायन गृह्यसूत्र (अनाविला टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)

आश्वलायन गृह्यसूत्र (अनाविला टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)
Ashvalayana Grihyasutra Hindi
महर्षि आश्वलायन (टीकाकार: हरदत्त आचार्य) द्वारा
स्रोत: Asvalayana Grihya Sutram with Anavila Commentary by Haradatta (उद्गम)
DevanagariHindipublished292 पृष्ठ
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विषयानुक्रमणी ।
प्रथमोऽध्यायः ।
१ — २१. खण्डाः । स्थालीपाकाद्युपाककर्मान्तानि कर्माणि ।
प्रथमः खण्डः ।
| सूत्रम्. | विषयः. |
|---|---|
| १. | गृह्यप्रतिज्ञानम् । |
| २. | पाकयज्ञप्रकारः । |
| ३. | पाकयज्ञानां हुतप्रहुतादिभेदत्रयम् । |
| ४. | पाकयज्ञानां यज्ञवन्नित्यत्वम् । |
| ५. | पाकयज्ञप्रशंसा । |
द्वितीयः खण्डः ।
| सूत्रम्. | विषयः. |
|---|---|
| १. | सायंप्रातः सिद्धहविष्यहोमः । |
| २. | भूतयज्ञाख्यबलिहरणम् । |
| ३. | पितृयज्ञः । |
तृतीयः खण्डः ।
| सूत्रम्. | विषयः. |
|---|---|
| १. | वक्ष्यमाणकर्मणां होमविधिः । |
| २. | पवित्राभ्यामाज्यस्योत्पवनम् । |
| ३. | पवित्रलक्षणम्, उत्पवनप्रकारस्तन्मन्त्रश्च । |
| ४. | आज्यहोमेषु परिस्तरणस्य वैकल्पिकत्वम् । |
| ५. | पाकयज्ञेष्वाज्यभागयोर्वैकल्पिकत्वम् । |
| ६. | पाकयज्ञेषु ब्रह्मणो वैकल्पिकत्वं, धन्वन्तरियज्ञशूलगवयdisplayो-र्ब्रह्मणो नित्यत्वं च । |
| ७. | देवतामात्रोपदेशे देवतापदैरेव होमः । |
| ८. | अनादेशे देवतानिर्णयः । |