अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 790, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंसदासि रण्वो यवसेव पुष्यते होत्राभिरग्ने मनुषः स्वध्वरः. विप्रस्य वा यच्छशमान उक्थ्यो ३ वाजं ससवाँ उपयासि भूरिभिः.. (२२) हे अग्नि! तुम यज्ञ को सुंदरतापूर्वक पूर्ण करते हो. जिस प्रकार हरी घास आदि को खाने वाला पशु अपने पालने वाले को सुंदर दिखाई देता है, उसी प्रकार घृत आदि से अपनेआप को पुष्ट करने वाले यजमान के लिए तुम दर्शनीय हो जाते हो. (२२) उदीरय पितरा जार आ भगमियक्षति हर्यतो हृत्त इष्यति. विवक्ति वह्निः स्वपस्यते मखस्तविष्यते असुरो वेपते मती.. (२३) हे अग्नि! आकाशरूपी अपने पिता और पृथ्वीरूपी माता को तुम यहां के लिए प्रेरित करो. जिस प्रकार सूर्य अपने प्रकाश को प्रेरित करते हैं, उसी प्रकार तुम अपने तेज को प्रेरित करो. यह यजमान जिन देवताओं की कामना करता है, अग्नि स्वयं उस की कामना करते हैं. वे इच्छित पदार्थ देने की बात कहते हैं और यज्ञ के हेतु यजमान के समीप आते हैं. (२३) यस्ते अग्ने सुमतिं मर्तो अख्यत् सहसः सूनो अति स प्र शृण्वे. इषं दधानो वहमानो अश्वैरा द्युमां अमवान् भूषति द्यून.. (२४) हे अग्नि! जो यजमान तुम्हारी कृपा का दूसरों के सामने वर्णन करता है, वह तुम्हारी कृपा के कारण सभी जगह प्रसिद्ध होता है. वह अन्न, अश्व आदि से युक्त होता हुआ चिरकाल तक ऐश्वर्य से प्रतिष्ठित रहता है. (२४) श्रुधी नो अग्ने सदने सधस्थे युक्ष्वा रथममृतस्य द्रवित्नुम्. आ नो वह रोदसी देवपुत्रे माकिर्देवानाम्प भूरिह स्याः.. (२५) हे अग्नि! तुम इस देव स्थान अर्थात् यज्ञशाला में हमारा आह्वान सुनो. तुम अपने जल बरसाने वाले रथ को लाने लिए प्रस्तुत करो. जो आकाश और पृथ्वी देवताओं के पलक के समान है, उन्हें भी अपने साथ लाओ. ऐसा कोई भी देवता शेष न रहे जो यहां न आया हो. (२५) यदग्न एषा समितिर्भवाति देवी देवेषु यजता यजत्र. रत्ना च यद् विभाजासि स्वधावो भागं नो अत्र वसुमन्तं वीतात्.. (२६) हे अग्नि! तुम पूजा करने योग्य हो. जब देवताओं में स्रोतों और हवियों की संगति हो, तब तुम स्तुति करने वालों के लिए रत्न दाता बनो तथा उन्हें बहुत धन प्रदान करो. (२६) अन्वग्निरुषसामग्रमख्यदन्वहानि प्रथमो जातवेदाः. अनु सूर्य उषसो अनु रश्मीननु द्यावापृथिवी आ विवेश.. (२७) अग्नि उषा काल के साथ ही प्रकाशित होते हैं. ये दिनों के साथ भी प्रकाशित होते हैं. ये ebook converter DEMO Watermarks*