भविष्य पुराण
Bhavishya Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 304, कुल 654 में से
संदर्भ में पढ़ें- प्रतिसर्गपर्व, प्रथम खण्ड *
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पश्चिममें सिन्धुदेश, वायव्य दिशामें कैक्यदेश, उत्तरमें मद्रदेश और ईशानमें कुलिन्द देश हैं। इस प्रकार आर्यदेशका उन्होंने भेद किया। इस देशका नामकरण महात्मा मागधके पुत्रने किया था। अनन्तर राजाने यज्ञके द्वारा बलरामजीको प्रसन्न किया, इसके फलस्वरूप बलभद्रके अंशसे शिशुनागका जन्म हुआ, उसने सौ वर्षतक राज्य किया। उसे काकवर्मा नामका पुत्र हुआ, उसने नब्बे वर्षतक राज्य किया। उसे क्षेमधर्मा नामका पुत्र हुआ, उसने अस्सी वर्ष राज्य किया। उसका पुत्र क्षेत्रौजा हुआ, उसने सत्तर वर्षतक राज्य किया। उसके वेदमिश्र नामक पुत्र हुआ, उसने साठ वर्षतक शासन किया। उसे अजातरिपु (अजातशत्रु) नामक पुत्र हुआ, उसने पचास वर्षतक राज्य किया। उसका पुत्र दर्भक हुआ, उसने चालीस वर्षतक राज्य किया। उसे उदयाश्र१ नामका पुत्र हुआ, उसने तीस वर्षतक शासन किया। उसका पुत्र नन्दवर्धन हुआ, उसने बीस वर्षतक शासन किया। नन्दवर्धनका पुत्र नन्द हुआ, उसने पिताके तुल्य वर्षांतक राज्य किया। नन्दके प्रनन्द हुआ, जिसने दस वर्ष राज्य किया। उससे परानन्द हुआ, उसने अपने पिताके तुल्य वर्षांतक ही राज्य किया। उससे समानन्द हुआ, उसने बीस वर्ष राज्य किया। उससे प्रियानन्द हुआ, उसने भी पिताके समान वर्षांतक राज्य किया। उसका पुत्र देवानन्द हुआ, उसने भी पिताके समान राज्य किया। देवानन्दका पुत्र यज्ञभंग हुआ, उसने अपने पिताके आधे वर्षांतक (दस वर्ष) राज्य किया। उसका पुत्र
मौर्यानन्द और उसका पुत्र महानन्द हुआ। दोनोंने अपने-अपने पिताके समान वर्षांतक राज्य किया।
इसी समय कलिनै हरिका स्मरण किया। अनन्तर प्रसिद्ध गौतम नामक देवताकी काश्यपसे उत्पत्ति हुई। उसने बौद्धधर्मको संस्कृतकर पट्टण नगर (कपिलवस्तु)-में प्रचार किया और दस वर्षतक राज्य किया१। उससे शक्यमुनिका जन्म हुआ, उसने भी बीस वर्षतक राज्य किया। उससे शुद्धोदन नामक पुत्र हुआ, उसने तीस वर्षतक शासन किया। उससे शक्यसिंहका जन्म हुआ। कलियुगके दो हजार वर्ष व्यतीत हो जानेके बाद शताद्विमें उसने शासन किया। कलिके प्रथम चरणमें वेदमार्गको उसने विनष्ट कर दिया और साठ वर्षतक उसने राज्य किया। उस समय प्रायः सभी बौद्ध हो गये। विष्णुस्वरूप उसके राजा होनेपर जैसा राजा था, वैसी ही प्रजा हो गयी, क्योंकि विष्णुकी शक्तिके अनुसार ही जगत्में धर्मकी प्रवृत्ति होती है। जो मनुष्य मायापति हरिकी शरणमें जाते हैं, वे उनकी कृपाके प्रभावसे मोक्षके भागी हो जाते हैं। शक्यसिंहका पुत्र बुद्धसिंह हुआ, उसने तीस वर्ष राज्य किया। उसका पुत्र (शिष्य) चन्द्रगुप्त२ हुआ, जिसने पारसीदेशके राजा सुलूब (सेल्युकस)-की पुत्रीके साथ विवाह कर यवन-सम्बन्धी बौद्धधर्मका प्रचार किया। उसने साठ वर्षतक शासन किया। चन्द्रगुप्तका पुत्र बिन्दुसार (बिम्बसार) हुआ। उसने भी पिताके समान राज्य किया। उसका पुत्र अशोक हुआ। उसी समय कान्यकुब्ज देशका एक ब्राह्मण आबू पर्वतपर
१-इसीने राजगृहसे हटाकर राजधानी गङ्गाके किनारे बसायी और उसका नाम पाटलिपुत्र या पटना पड़ा। इसके आगेके राजागण पटनासे ही भारतका शासन करते थे।
२-यहाँसे आगे अब लिच्छवि राज्यवंशका वर्णन है, जिसकी राजधानी कपिलवस्तु थी।
३-अब यहाँ फिर पाटलिपुत्रके राजवंशका वर्णन प्रारम्भ हुआ और यह चन्द्रगुप्त ही मौर्यवंशका पहला राजा था। जिसने भारतके साथ अन्य देशोंपर अधिकार किया था, जिन्हें बादमें अशोकने बौद्ध देश बना डाला। उन दिनों वे सभी देश भारतके ही उपनिवेश थे। जिसका यहाँ आगे वर्णन है। चन्द्रगुप्तने ही सेल्युकसकी पुत्रीसे शादी की थी।
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