ब्रह्मचर्य ही जीवन है
Brahmacharya Hi Jeevan Hai
स्वामी शिवानन्द द्वारा
स्रोत: Chatra Hitkari Pustakmala, Daraganj, Prayag (1926) · Kedarnath Gupta, Chatra Hitkari Pustakmala · 1926 (उद्गम)
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❁ ब्रह्मचर्य ही जीवन है ❁
पेशाव के समय गिलास या लोटा में पानी अवश्य ले जाया करो । बहुत ही उपकार होगा । शर्म से अपना सत्यानाशन कर लो । बाहर घूमने जाते समय हर वक्त एक रुमाल या अँगोखा साथ में रखो, ताकि उसे ही पानी में भिगो कर काम में ला सको । दिशा के समय पानी बड़े लोटे में ले जाओ । कई सज्जन तो बिना लोटा में पानी लिये ही दिशा मैदान जाते हैं ! यह क्या सम्भ्यता, ज्ञान और सच्चरित्रता के लक्षण हैं । यह कैसा घोर पशुपन है ? भाइयो, मनुष्य बनो ! मनुष्य बनो ! दिशा पेशाव के बाद संपूर्ण हाथ पैर ( अधूड़े नहीं ) ठंडे जल से स्वच्छ धो डालने चाहिये, इससे और भी लाभ होता है ।
“नियमित व्यायाम”
नियम ग्यारहवाँ:—
“प्रायेण श्रीमतां लोके भोक्तुं शक्तिं विद्यते ।
काष्ठान्यपि हि जीर्यन्ते दरिद्राणां च सर्वशः ॥”
— महाभारत ।
“धनी लोगा को सुपक्व अन्न भी पचाने की प्रायः शक्ति नहीं होती; परन्तु गरीब लोगो को काष्ठ तक पच जाते हैं” ।
दो लड़के थे—एक गरीब का और दूसरा धनी का । धनी के लड़के ने गरीब से पूछा, “भाई, तू गरीब होने पर भी इतना सशक्त