ब्रह्मचर्य ही जीवन है
Brahmacharya Hi Jeevan Hai
स्वामी शिवानन्द द्वारा
स्रोत: Chatra Hitkari Pustakmala, Daraganj, Prayag (1926) · Kedarnath Gupta, Chatra Hitkari Pustakmala · 1926 (उद्गम)
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❁ ब्रह्मचर्य ही जीवन है ❁
सर्वत्रवर्जयेत्” । ( १० ) सामान्यतः व्यायाम और भोजन में २ घण्टे का अन्तर होना चाहिये । ( ११ ) भूख लगने पर व्यायाम न करना चाहिये और व्यायाम करने पर तत्काल न खाना-पीना चाहिये । नागपुर में एक वजाज का लड़का कसरत के बाद तुरन्त पानी पीने से मर गया; फिर कुछ खा लेना कितना भयानक है ? व्यायाम से गले में कुछ खुशकी मालूम होती है, इसलिए शीतल जल का कुल्हा कर लेना चाहिये या मुख में मिश्री की डली अथवा इलायची के २-४ दाने रख लेना चाहिये । कसरत के एक या आध घंटा बाद दूध पीना अच्छा है । ( १२ ) हर एक मौसम में स्नान के पहले ही कसरत करनी चाहिये । ( १३ ) मालिश करना बहुत अच्छा है, उससे बहुत रोग नष्ट होते हैं । रोज करना ठीक नहीं । जाड़े में एक हफ्ते में २-३ बार और गर्मी के महीने में २-३ बार करना चाहिये, क्योंकि मालिश भी अप्राकृतिक ही है । अपने हाथ मालिश करने से स्वास्थ्य और भी दुःखस्त होता है । पीठ की मालिश चाहे तो दूसरे के द्वारा की जाय । ( १४ ) व्यायाम को खेल समझ कर करो, न कि बोझ । इससे बहुत जल्द तुम पहलवान बन जाओगे । ( १५ ) व्यायाम करने का ढंग भी अच्छा होना चाहिये । उस समय टेढ़ा बाँका मुँह बनाने से व्यायाम के बाद भी चेहरा वैसा ही बना रहेगा और प्रसन्नबदन रहने से तुम भी प्रसन्न बन जाओगे । इसके लिये सामने शीशा रखने से निस्सीम लाभ होगा । ( १६ ) व्यायाम के समय सामने शीशा रहने पर मनुष्य की भावना बड़ी बलवती बनती है और अंग प्रत्यंग भी प्रबल भावना के कारण बड़ी शीघ्रता से पुष्ट व गठीले बनते हैं । अतः व्यायाम के समय चित्त एकाग्र रख कर दृढ़