ब्रह्मचर्य ही जीवन है
Brahmacharya Hi Jeevan Hai
स्वामी शिवानन्द द्वारा
स्रोत: Chatra Hitkari Pustakmala, Daraganj, Prayag (1926) · Kedarnath Gupta, Chatra Hitkari Pustakmala · 1926 (उद्गम)
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❁ ब्रह्मचर्य ही जीवत है ❁
किये समजम्म में भी प्राप्त नहीं हो सकता, यह भी उतना ही सत्य सिद्धान्त है। अपने को नेता समझने वाले बड़े बड़े लोग आज दो चार ही नहीं बल्कि सैकड़ों सुधारों के पीछे पड़े हैं। क्या सामाजिक, क्या धार्मिक, क्या व्यवहारिक, कोई भी सुधार क्यों न हो, परन्तु बिना इस एक विषय में अर्थात् ब्रह्मचर्य में सुधार किये, कोई भी सुधार कदापि चिरस्थायी व यशस्वी हो नहीं सकता यह सिद्धान्त वाक्य हमें हृदय पट में अंकित कर वा अपनी दृष्टि के समाने बड़े बड़े अक्षरों में टैंगवा कर रखना चाहिये और रोज उसका दर्शन करना चाहिये। चणिक सुधार किस काम का? पानी पर लकीरें खींचने से क्या मतलब व जड़ को छोड़ कर डाल और पत्तियों पर पानी छिड़कने से क्या लाभ? यह नितान्त सत्य है कि, सम्पूर्ण सुधारों की और यश की कुंजी एक मात्र ब्रह्मचर्य ही है। बिना वीर्यधारण किये कोई भी जाति कदापि उन्नत नहीं हो सकती। निवीर्य जाति दूसरों की सदा गुलाम ही बनी रहती है। यदि हमें गुलामी को जड़ मूल से हटाना हो, हमें स्वतंत्र, सुखी, सत्ताशाली और वैभवसम्पन्न बनना हो, और पहले की तरह पुनः श्रेष्ठ बनना हो तो हमें पहले के समान पुनः वीर्यसम्पन्न अवश्य ही बनना होगा ! बिना ब्रह्मचर्य धारण किये हम कदापि पूर्व वैभव प्राप्त नहीं कर सकते। ब्रह्मचर्य ही सम्पूर्ण उन्नति का वीज मंत्र है ! ब्रह्मचर्य ही सम्पूर्ण सुखों का निधान है !! ब्रह्मचर्य ही एक मात्र सम्पूर्ण सुधारों का दादा है !!!