ब्रह्मचर्य ही जीवन है
Brahmacharya Hi Jeevan Hai
स्वामी शिवानन्द द्वारा
स्रोत: Chatra Hitkari Pustakmala, Daraganj, Prayag (1926) · Kedarnath Gupta, Chatra Hitkari Pustakmala · 1926 (उद्गम)
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२०—हमारी भारत माता
अब स्पष्ट मालूम हो गया है कि केवल ब्रह्मचर्य धारण ही में हमारा तथा देश का सच्चा कल्याण है, पुनरुद्धार है। ब्रह्मचर्य ही से हम पुनः सिंह बन सकते हैं ब्रह्मचर्य ही से हम सभी को भयभीत कर सकते हैं, ब्रह्मचर्य ही से हम सम्पूर्ण सिद्धियाँ प्राप्त कर सकते हैं ब्रह्मचर्य ही से हम स्वतंत्र तथा सम्पूर्ण जगत् के स्वामी बन सकते हैं, यही नहीं बल्कि ब्रह्मचर्य ही से हम परब्रह्म को भी वशीभूत कर सकते हैं फिर सामान्य लोगों की कथा ही क्या है।
जो भारत एक समय सिंह-तुल्य निर्भय, स्वतंत्र व बलिष्ठ था; जिसके गर्जन तर्जन से सम्पूर्ण दिग् मण्डल कांप उठता था, जिसके तरफ कोई भी राष्ट्र आँख उठा के नहीं देख सकता था, जिस भारत में मणि मौक्तिक के खिलौने हमारे हाथ में रहते थे, उसी भारत में आज हमारे हाथ में की रोटी का टुकड़ा भी छीन लूट कर और मार पीट कर दूसरे लोग ले जा रहे हैं और हमें भूखों मार रहे हैं ! हांय ! इससे बढ़कर और दुःखमय स्थिति कौन सी हो सकती है ? आज हम वकरी के माफिक बन गये हैं; जो आता है सोई हमें हलाल करता है। हम अपना सच्चा सिंह स्वरूप भूल गये हैं। हमारे में पूर्वजों का वीर्य नहीं दिखाई देता; हम आज निर्वीर्य से हो गये हैं।
ऐ मेरे परम प्रिय भाइयो और बहिनों ! अब आँखें खोलो ! जागो ! विषय की मोहनिद्रासे अति शीघ्र जागो। और अपनी तथा देश की स्थिति पर कृपादृष्टि डालो ! हमारी असहाय भारत माता आँसू-भरे नयनों से आशायुक्त अन्तःकरण से हमारी तरफ देख
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