ब्रह्मचर्य ही जीवन है
Brahmacharya Hi Jeevan Hai
स्वामी शिवानन्द द्वारा
स्रोत: Chatra Hitkari Pustakmala, Daraganj, Prayag (1926) · Kedarnath Gupta, Chatra Hitkari Pustakmala · 1926 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( २ )
विकारों को किस प्रकार वश में करना चाहिये, इसकी समुचित शिक्षा दी गई है। पुस्तक की उत्तमता एक बार पढ़ने ही से ज्ञात होगी। मूल्य ॥४॥
(४) भारतके दश रत्न—यह जीवनियों का संग्रह है। भीष्मपितामह, श्रीकृष्ण, महाराणा प्रतापसिंह, स्वामी विवेकानन्द आदि दश महापुरुषों को जीवनियाँ बड़ी खूबी के साथ संक्षेप में लिखी गई हैं। मूल्य प्रति पुस्तक का ।-१)
(५) ब्रह्मचर्य ही जीवन है—इस पुस्तक की प्रशंसा सभी पत्र-पत्रिकाओं ने की है। अधिक न लिख कर कुछ पत्र-पत्रिकाओं की सम्मतियाँ हम यहाँ उद्धृत करते हैं:—
“अभ्युदय” इस पुस्तक की विस्तृत समालोचना करते हुए अन्त में लिखता है:—“यह पुस्तक क्या है, नवयुवकों के लिये कल्पबुद्ध है। हम “अभ्युदय” के पाठकों से जोरों के साथ अनु-रोध करते हैं कि वे एक बार इस पुस्तक को अवश्य पढ़ें और अपने बालकों को दें। समालोचक ने स्वयं इसे बीसों बार पढ़ा है पर तृप्ति नहीं हुई।”
“प्रताप” लिखता है—“इस पुस्तक में ब्रह्मचर्य के सम्बन्ध में लगभग सभी ज्ञातव्य बातों का समावेश किया गया है। ब्रह्मचर्य की महिमा, अष्टमैथुन, वीर्य नाश के मुख्य लक्षण, गृहस्थी में ब्रह्मचर्य, वीर्य रक्षा के नियम आदि का वर्णन अच्छे ढंग से किया गया है।”...यह पुस्तक नवयुवकों के बड़े काम की है। हम चाहते हैं कि प्रत्येक युवक इस पुस्तक को पढ़कर लाभ उठावे।”