भारतकोश
ब्रह्मचर्य ही जीवन है

ब्रह्मचर्य ही जीवन है

Brahmacharya Hi Jeevan Hai

स्वामी शिवानन्द द्वारा

स्रोत: Chatra Hitkari Pustakmala, Daraganj, Prayag (1926) · Kedarnath Gupta, Chatra Hitkari Pustakmala · 1926 (उद्गम)

DevanagariHindipublished199 पृष्ठ

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( ३ )

( ६ ) वीर राजपूत—यह एक वीररस पूर्ण ऐतिहासिक उपन्यास है एक सच्चे राजपूत की बहादुरी का जीता जागता चित्र खींचा गया है इसे पढ़ कर कायर पुरुषों का हृदय वीररस पूर्ण हो जायगा । एक प्रति मंगा कर देखिये । छपाई सफाई सराहनीय है । ढाई सौ से अधिक पृष्ठों की पुस्तक का दाम केवल १।

( ७ ) हम सौ वर्ष कैसे जीवें—पुस्तक का विषय नाम ही से स्पष्ट है । इसमें बतलाया गया है कि हम लोग किस प्रकार सौ वर्ष की आयु तक स्वस्थ तथा नीरोग रह कर जीवन के आनन्द का उपभोग कर सकते हैं । हम दावे के साथ कहते हैं कि हिन्दी में यह पुस्तक अपने हंग की एक ही है । इसकी भूमिका 'आज' के विद्वान तथा यशस्वी पादक पं० बाबूराव विष्णु पराड़कर ने लिखी है, जो भूमिका के अन्त में लिखते हैं:— “ऐसी उपयोगी पुस्तक लिखने के लिए मैं श्रीयुत केदारनाथ गुप्त को बधाई देता हूँ । आशा है कि हिन्दी संसार इसका समुचित आदर करेगा । तथा भारत की भावी आशा के अंकुर हमारे होनहार विद्यार्थी इससे विशेष रूप से लाभ उठावेंगे ।”

( ८ ) महात्मा टाल्मटाय की वैज्ञानिक कहानियाँ—विज्ञान की शिक्षा देने वाली रोचक तथा मनोरञ्जक पुस्तक है । मूल्य १।

( ९ ) वीरों की सच्ची कहानियाँ—यदि आप को अपने प्राचीन भारत के गौरव का ध्यान है, यदि आप वीर और