भारतकोश
ब्रह्मचर्य ही जीवन है

ब्रह्मचर्य ही जीवन है

Brahmacharya Hi Jeevan Hai

स्वामी शिवानन्द द्वारा

स्रोत: Chatra Hitkari Pustakmala, Daraganj, Prayag (1926) · Kedarnath Gupta, Chatra Hitkari Pustakmala · 1926 (उद्गम)

DevanagariHindipublished199 पृष्ठ

पृष्ठ 196, कुल 199 में से

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( ४ )

महादुःख बनना चाहते हैं, तो इसे पढ़िये। इस में अपने पुरुषार्थों की सच्ची वीरता पूर्ण यश गायायें पढ़ कर आप का हृदय फड़क उठेगा। नसों में वीररस प्रवाहित होने लगेगा पुरुषार्थों के गौरव का रक्त उबलने लगेगा। स्कूल में बालकों को इतिहास पढ़ाने में अपने पुरुषार्थों की वीरता पूर्ण घटनाएं नहीं पढ़ाई जाती। विदेशी पुरुषों की प्रशंसा के ही पाठ पढ़ाये जाते हैं। आवश्यकता है देश का कोई बालक ऐसे समय इस पुस्तक को पढ़ाने से न चूके। मूल्य केवल ॥॥

( १० ) आहुतियाँ—यह एक विलकुल नये प्रकार की नयी पुस्तक है। देश और धर्म पर धलिदान होने वाले वीर किस प्रकार हँसते हँसते मृत्यु का आवाहन करते हैं ? उनकी आत्मायें क्यों इतनी प्रबल हो जाती हैं ? वे मर कर भी कैसे जीवन का पाठ पढ़ाते हैं ? इत्यादि दिल फड़काने वाली कहानियाँ पढ़नी हों तो “आहुतियाँ” आज ही मँगा लीजिये। मूल्य केवल ॥॥

( ११ ) जगमगाते हीरे—प्रत्येक आर्य संतान के पढ़ने लायक यह एक ही नयी पुस्तक है यदि रहस्यमयी, मनोरंजक, दिल में गुद गुदी पैदा करने वाला महापुरुषों की जीवन घटनायें पढ़नी हैं। यदि छोटी छोटी बातों से ही महापुरुष बनने की ज़रा भी अभिलाषा दिल में है तो एक बार अवश्य इस सचित्र पुस्तक को आप खुद पढ़िये और अपनी स्त्री बच्चों को पढ़ाइये। मूल्य केवल १।

( १२ ) पढ़ो और हँसो—विषय जानने के लिये पुस्तक का नाम ही काफी है। एक एक लाइन पढ़िये और लौट पीट होते जाइये। आप पुस्तक अलग अकेले में पढ़ेंगे; पर सरेंदू

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