ब्रह्मचर्य ही जीवन है
Brahmacharya Hi Jeevan Hai
स्वामी शिवानन्द द्वारा
स्रोत: Chatra Hitkari Pustakmala, Daraganj, Prayag (1926) · Kedarnath Gupta, Chatra Hitkari Pustakmala · 1926 (उद्गम)
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महादुःख बनना चाहते हैं, तो इसे पढ़िये। इस में अपने पुरुषार्थों की सच्ची वीरता पूर्ण यश गायायें पढ़ कर आप का हृदय फड़क उठेगा। नसों में वीररस प्रवाहित होने लगेगा पुरुषार्थों के गौरव का रक्त उबलने लगेगा। स्कूल में बालकों को इतिहास पढ़ाने में अपने पुरुषार्थों की वीरता पूर्ण घटनाएं नहीं पढ़ाई जाती। विदेशी पुरुषों की प्रशंसा के ही पाठ पढ़ाये जाते हैं। आवश्यकता है देश का कोई बालक ऐसे समय इस पुस्तक को पढ़ाने से न चूके। मूल्य केवल ॥॥
( १० ) आहुतियाँ—यह एक विलकुल नये प्रकार की नयी पुस्तक है। देश और धर्म पर धलिदान होने वाले वीर किस प्रकार हँसते हँसते मृत्यु का आवाहन करते हैं ? उनकी आत्मायें क्यों इतनी प्रबल हो जाती हैं ? वे मर कर भी कैसे जीवन का पाठ पढ़ाते हैं ? इत्यादि दिल फड़काने वाली कहानियाँ पढ़नी हों तो “आहुतियाँ” आज ही मँगा लीजिये। मूल्य केवल ॥॥
( ११ ) जगमगाते हीरे—प्रत्येक आर्य संतान के पढ़ने लायक यह एक ही नयी पुस्तक है यदि रहस्यमयी, मनोरंजक, दिल में गुद गुदी पैदा करने वाला महापुरुषों की जीवन घटनायें पढ़नी हैं। यदि छोटी छोटी बातों से ही महापुरुष बनने की ज़रा भी अभिलाषा दिल में है तो एक बार अवश्य इस सचित्र पुस्तक को आप खुद पढ़िये और अपनी स्त्री बच्चों को पढ़ाइये। मूल्य केवल १।
( १२ ) पढ़ो और हँसो—विषय जानने के लिये पुस्तक का नाम ही काफी है। एक एक लाइन पढ़िये और लौट पीट होते जाइये। आप पुस्तक अलग अकेले में पढ़ेंगे; पर सरेंदू
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लोग समझेगे कि आज किससे यह कहकहा हो रहा है। पुस्तक की तारीफ़ यह है कि पूरी मनोरंजक होते हुए भी अश्लीलता का कहीं नाम नहीं। यदि शिक्षा-प्रद मनोरंजक पुस्तक पढ़नी है तो इसे पढ़िये। मूल्य केवल ॥॥)
१ ( १३ ) कुसुम-कुञ्ज—कविवर गुरु भक्त सिंह 'भक्त' कृत अमनीय कविताओं का संग्रह है। ये कवितायें अपने ढंग की एकही हैं। मूल्य ॥॥)
( १४ ) चारचिन्तामणि कोष—इस पुस्तक में श्री गास्वामी तुलसीदास जी के सब ग्रन्थों से उन भागों का संग्रह किया गया है जिनका सम्बन्ध श्री रामनाम से है। संग्रहकर्ता राम के अनन्य भक्त श्री जयरामदास जी हैं। पुस्तक अपने ढंग की एकही है। मूल्य ॥॥)
मैनेजर व्हाच हितकारी पुस्तकमाला
दारागंज, प्रयाग
सस्ती साहित्य पुस्तकमाला
प्रकाशित पुस्तकें
वंकिम ग्रन्थावली—प्रथम खंड—वंकिम बाबू के आनन्द मठ, लोक-रहस्यं तथा देवी चौधरानी का अविकल अनुवाद । पृष्ठ संख्या ४१२ मू० १)
गोरा—जगत् विख्यात रवीन्द्रनाथ ठाकुर कृत गोरा नामक पुस्तक का अविकल अनुवाद । पृष्ठ-संख्या ६८८ मू० १।-॥ सजिल्द १॥३॥
वंकिम ग्रन्थावली—द्वितीय खण्ड—वंकिम बाबू के सीताराम और दुर्गेश नन्दिनी का अविकल अनुवाद । पृष्ठ संख्या ४३२ मू० ॥-॥ सजिल्द १॥३॥
वंकिम ग्रन्थावली—तीसरा खण्ड—वंकिम बाबू के कृष्ण कान्तेर बिल, कपाल कुण्डला, और रजनी का अविकल अनुवाद । पृष्ठ संख्या ४३२ मू० ॥-॥ सजिल्द १॥३॥
चण्डी चरण ग्रन्थावली—प्रथम खण्ड । अर्थात् टॉम काका की कुटिया ( Uncle Toms Cabin ) का अविकल अनुवाद । पृष्ठ संख्या ४६२ मू० १॥॥ सजिल्द १॥॥
चण्डी चरण ग्रन्थावली—दूसरा खण्ड—चण्डी चरण सेन के दीवान गंगा गोविन्द सिंह का अविकल अनुवाद । पृष्ठ संख्या २६० मू० ॥॥
श्रीमत् बाल्मीकीय रामायण—बालकाण्ड—साहित्याचार्य पं० चन्द्रशेखर शास्त्री कृत सरल हिन्दी अनुवाद सहित बड़े साइज का १६२ पृष्ठ का मू० ॥॥
अयोध्या काण्ड—मू० १॥॥
आरण्य काण्ड—मू० ॥॥
सस्ती साहित्य पुस्तकमाला कार्यालय, बनारस सिटी ।
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