ब्रह्मचर्य ही जीवन है
Brahmacharya Hi Jeevan Hai
स्वामी शिवानन्द द्वारा
स्रोत: Chatra Hitkari Pustakmala, Daraganj, Prayag (1926) · Kedarnath Gupta, Chatra Hitkari Pustakmala · 1926 (उद्गम)
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लोग समझेगे कि आज किससे यह कहकहा हो रहा है। पुस्तक की तारीफ़ यह है कि पूरी मनोरंजक होते हुए भी अश्लीलता का कहीं नाम नहीं। यदि शिक्षा-प्रद मनोरंजक पुस्तक पढ़नी है तो इसे पढ़िये। मूल्य केवल ॥॥)
१ ( १३ ) कुसुम-कुञ्ज—कविवर गुरु भक्त सिंह 'भक्त' कृत अमनीय कविताओं का संग्रह है। ये कवितायें अपने ढंग की एकही हैं। मूल्य ॥॥)
( १४ ) चारचिन्तामणि कोष—इस पुस्तक में श्री गास्वामी तुलसीदास जी के सब ग्रन्थों से उन भागों का संग्रह किया गया है जिनका सम्बन्ध श्री रामनाम से है। संग्रहकर्ता राम के अनन्य भक्त श्री जयरामदास जी हैं। पुस्तक अपने ढंग की एकही है। मूल्य ॥॥)
मैनेजर व्हाच हितकारी पुस्तकमाला
दारागंज, प्रयाग