ब्रह्मचर्य ही जीवन है
Brahmacharya Hi Jeevan Hai
स्वामी शिवानन्द द्वारा
स्रोत: Chatra Hitkari Pustakmala, Daraganj, Prayag (1926) · Kedarnath Gupta, Chatra Hitkari Pustakmala · 1926 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें❁ हस्तमैथुन और उसके दुष्परिणाम ❁
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(११) रात्रि में स्वप्रदोष होना, यह पापी वा कामी मन का पूर्ण लक्षण है ।
(१२) वीर्य का पानी जैसा पतला पड़ना और पेशाब के बक्त वीर्य का बूँद बूँद बाहर निकलना, यह भी हस्तमैथुन का एक मुख्य चिन्ह है । इसका अन्तिम भयानक परिणाम पुरुषत्व का नाश अर्थात् नपुंसकता है ।
(१३) बार बार पेशाब होना तथा गरमी, परमा, प्रमेहादि उग्र रोग होना ।
(१४) हाथ पैर और शरीर के पोर पोर में ( सन्धि में ) दर्द मालूम होना । हाथ पैरों में शिथिलता, जड़ता व सनसनी उत्पन्न होना तथा उनका मुर्दे की तरह ठंड पड़ जाना ।
(१५) तलुवे तथा हथेलियों का पसीजना, यह वीर्य-अष्टता का मुख्य लक्षण है ।
(१६) हाथ पैरों में कंप मालूम होना, ( हाथ में पकड़ा हुआ काराज व कोई वस्तु हिलने लगना, हाथ काँपना )
(१७) नाटक उपन्यास आदि शृङ्गारिक किताबें तथा चित्र पढ़ने व देखने की अत्यन्त रुचि रखना ।
(१८) स्त्रियों में बार बार आना जाना; निर्लज्जता से गीध व ऊँट की तरह सर उठाकर या घुमाकर किंवा चोर-टुष्टि से झिपकर स्त्रियों की तरफ देखना ।
(१९) चेहरे पर पिटिका ( मुहरसा ) उभड़ना यह पापी व कामी मन का पूर्ण लक्षण है ।