ब्रह्मचर्य ही जीवन है
Brahmacharya Hi Jeevan Hai
स्वामी शिवानन्द द्वारा
स्रोत: Chatra Hitkari Pustakmala, Daraganj, Prayag (1926) · Kedarnath Gupta, Chatra Hitkari Pustakmala · 1926 (उद्गम)
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❁ ब्रह्मचर्य ही जीवन है ❁
सच्चा पालन कर सकेंगे और कामरूपी मेघनाद को निश्चयपूर्वक मार सकेंगे। सारांश यह कि किसी स्त्री की ओर न देखना ही ब्रह्मचर्य-रक्षा का परम श्रेष्ठ रहस्य है—उपाय है।
“सादी रहन-सहन”
नियम तीसरा :—
वक्तव्यः—ब्रह्मचर्य-रक्षा के लिये हमें अपना जीवनक्रम 'Simple living and high thinking' यानी “सादा वर्तव और ऊँचा ख्याल” इस सद्गुणदेश के अनुसार अत्यन्त सीधा-सादा प्रकार का रखना होगा; क्योंकि सादापन ही बड़पन का चिह्न है, बल्कि रहस्य है। Simpleness is itself greatness संसार में आज तक जितने महापुरुष हुए हैं वे सब सादी ही रहन-सहन से हुए हैं। अधिक सुख-भोग की सामग्री से घिरे रहना मानों अपने को व्यभिचारी ही बनाना है। श्रद्धार से कामदेव जागृत होता है। विलासप्रियता से तन, मन, धन, तीनों बरबाद हो जाते हैं। पेश-आराम का चसका ही मनुष्य को धूल में मिला देता है। आराम-तलव मनुष्य को कामरिपु पटक पटक कर मारता है। यही कारण है कि गरीबों से धनी लोग विशेष कामी और विशेष दुःखी रहते हैं। नखरेबाजी से मनुष्य आतिशबाजी की तरह बिलकुल जल उठता है। नकाशीदार लोटा या गिलास में जैसे सर्वत्र मैल भरा रहता है, उसी प्रकार नखरेबाज स्त्री-पुरुषों में भी काम, क्रोध, अहंकारादि मैल विशेष भरा रहता है। सत्पुरुष कहते हैं :—